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व्यंग्य: अपनों की दगाबाजी

जिन अपनों को इंसान अपना आधार समझता है वे ही अगर दगाबाजी करने लगें तो इंसान भीतर ही भीतर टूट जाते हैं इन अपनों की दगाबाजी ने मज़बूत रिश्तों की नींव भी खिसका दी है बच्चे बड़े होकर माँ बाप को धोखा दे रहे हैं। पति पत्नी को धोखा दे रहा है पत्नी पति को धोखा दे रही है ।दोस्त दोस्त को दगा दे रहे हैं जो सहकर्मी है वो भी अपना नहीं है। ऐसे में समाज से नैतिक मूल्य खत्म होते जा रहे हैं।
ऐसी बात भी नहीं है कि पूरा समाज ही बिगड़ गया है पर जितना बिगड़ा है वो भी कम चिंता की बात नहीं है। आए दिन ऐसी कई घटनाएँ हमारे सामने घटती रहती हैं जो हमें सोचने पर मज़बूर कर देती हैं। ऐसी ही एक बात है असीम घर का बड़ा बैटा था । माँ बाप उसके छोटे भाई प्रखर से ज्यादा लगाव रखते थे उसकी हर जिद पूरी करते थे । जबकि असीम को उन्होंने उपेक्षित कर रखा था। इसके कारण प्रखर बिगड़ गया था। असीम को छोटी जरूरतों के लिए भी तरसाया जाता था। उसका जन्मदिन कभी नहीं मनाया जाता था जबकि प्रखर का जन्म दिन खूब धूमधाम के साथ मनाया जाता था। असीम थोड़ा बड़ा हुआ तो जल्दी ही आत्म निर्भर हो गया अब माता पिता उससे कहने लगे कि वो पूरी कमाई उन्हें दे उसने ऐसा किया भी फिर भी उनके बर्ताव में बदलाव नहीं आया तो उसने पैसे देना बंद कर दिए तो पिता के कहने पर माँ ने खाना देना बंद कर दिया। वो टिफिन सेन्टर से खाना मँगाने लगा । तो माँ ने उसे परेशान करने का नया तरीका निकाला वो उसके क्लाइन्ट को बाहर से ही फटकार कर भगाने लगी। एक बार तो हद हो गई उसकी शादी का रिश्ता लेकर लड़की वाले आए तो वे उनके सामने असीम की खुलकर बुराई करने लगे । और प्रखर से रिश्ता करने पर जोर देने लगे। बात बनी नहीं। असीम उन्हें बस स्टॉप तक छोड़ने आया तब लड़की के भाई ने कहा हमारी बड़ी इच्छा थी कि आपसे हमारा रिश्ता हो तब असीम ने कहा तो ठीक है मैं तैयार हूँ। असीम की शादी की खबर सुनकर माँ बाप ने उसे घर से निकाल दिया। आज असीम शादी के आठ साल बाद खुशहाल जिंदगी जी रहा है। बढ़िया मकान है खूब पैसा है दो बच्चे हैं। समाज में खूब मान प्रतिष्ठा है। दूसरी ओर प्रखर के कारण उसके माता पिता पूरी तरह मिट गए हैं। अधिक शराब पीने के कारण उसकी दोनों किडनी खराब हो गई है लीवर खराब हो गया उनकी सारी जमीन जायदाद बिक गई है और वे किराये के मकान में ह रहे है। असीम की आज भी वे जी भर कर बुराई करते हैं उसे कपूत कहते हैं। जबकि उसे घर से निकालकर उन्होंने ही अखबार में सूचना निकाली थी जिसमें असीम से उन्होंने सारे संबंध खत्म करने की घोषणा की थी। 
एक अन्त घटना में शमिता ने अपने पति अमित को तगड़ धोखा दे दिया। अमित ने एक आवासीय भूखण्ब लिया था। उस पर मकान बनवाने के लिए उसने फंड इकठ्ठा करने के लिए शमिता के नाम बैंक में खाता खुलवाया था पूरे दो साल बाद जब अमित ने उस पर मकान बनवाने का विचार किया और जब बैंक जाकर पत्नी का खाता चेक किया तो हैरान रह गया उसमें सिर्फ दो हजार रुपये पड़े हुए थे। जब उसने जाँच की तो पता चला उसकी पत्नी ने पूरे पचपन लाख रुपये की गडबड़ी की थी वो पैसे उसन मायके में दिए थे जिससे उसके पिता ने मकान खरीदकर किराये के मकान से निजात पाई थी पिता ने यह कहा था कि जब जरूरत पड़ेगी तब हम तुरंत पूरा रुपया दें देंगे लेकिन उसके भाई को जुए सट्टे की लत थी। उसने वो मकान बी बेच दिया था कर्ज अधिक होजाने के कारण उसने वो शहर छोड़ दिया था और छोटे से किराये मकान में दूसरे शहर में रह रहा था उसमें ही उसके माता पिता भी रह रहे थे अमित जब उनसे अपने पैसे लेने गया तो वे बोले कैसे पैसे कौनसे पैसे तुमने कब दिए हमें पैसे जो पैसे माँग रहे हो ।अमित अपना सा मुँह लेकर आ गया इसके बाद भी उसकी पत्नी मायके की एक भी बुराई सुनने को तैयार नहीं थी अमित यह सोचकर कुछ नसीं बोला कि वो उसके दो बच्चों की माँ थी। 
ऐसी अनगिनत घटनाएँ हैं जो अपनों की दगाबाजी से भरी हुई हैं।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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