व्यवस्था की खामियों का लाभ उठाकर मुफ्त खोरी करने वालों की संख्या कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। ये दूसरों की कमाई पर मौज करते हैं । निर्माण कार्य,में लगे मज़दूर को दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद ढाइ सौ रुपये मिल रहे थे।पता चला कि उसके मजदूरी चार सौ रुपये थी ।उसके डेढ़ सौ रुपये कोई और हड़प रहा था। उसके पास ऐसे चालीस मजदूर थे जिनसे उसे रोज के छः हजार रुपये मिल रहे थे। बाकी चार,लाख रुपये उसने पन्द्रह प्रति शत मासिक की दर से कर्जे पर भी बाँट रखे थे जिनका प्रतिमाह ब्याज साठ हजार रुपये मिल रहा था। वो कोई काम नहीं करता था दिन भर स्क्रापियो में घूमता रहता था मजदूरों की निगाह मेः वो बड़ा आदमी था । इस तरह के मुफ्तखोर आपको हर,क्षेत् में मिल जाएँगे एक ने अपने परिचित से कहा कि मुझे प्लॉट खरीदना है। उसने एक प्रापर्टी डीलर के पास भेज दिया । प्लॉट बाइस लाख का था इसके उसे चवालीस हजार रुपये बिना कुछ किए धरे ही मिल गए। कुछ लोग सामान खरीदवाने के लिए दुकान पर ले जाते हैं बाद में दुकानदार से मोटी रकम वसूल लेते हैं। एक स्थान पर किसी ने कार खड़ी की सिर्फ जरा सी देर के लिए। जबकि वो कोई पार्किंग वाली जगह ...
कुछ लोग बड़े चालाक चतुर,चपल होते हैं वे किसी की खूब झूठी तारीफ करके उसे फुलाकर कुप्पा बना देते हैं जिससे वो अपनी औकात भूल जाता है फिर उसे चने के झाड़ पर चढ़ाने की बात करते हैं चने का ऐसा झाड़ तो नहीं मिलता जिस पर कोई आदमी चढ़ सके। लेकिन जो फूल कर,अपनी औकात भूल जाता है वो ऐसा मिटता है जिसका सँभलना मुश्किल हो जाता है। हाट बाजारों में अगरबत्ती के पैकेट से रुपये निकालने का झाँसा देने के लिए वे ठग अपने आदमी को पैकेट बेचकर मोटी रकम दिदलवा देते हैं उसके धोखे में तमाशबीन अगरबत्ती के पैकेट खरीदते चले जाते हैं लेकिन उन्हें,एक धेला भी नसीब नहीं होता। किसी को चने के झाड़ पर चढ़ाने की बात करने वाले अपना उल्लू सीधा करने के लिए ऐसा करते हैं। जिसका शिकार बनने वाला बेबस होकर रह जाता है। दंसरी ओर कुछ लोग ऐसे होते हैं जो मनोबल गिराकर उसकी भविष्य की संभावनाओं पर कुठाराघात करते हैं। यह किसी इंसान की योग्यता और कार्यक्षमता देखकर उससे जलन रखने लगते हैं। ऐसा इंसान अगर कोई स्टार्ट अप शुरू करना चाहे तो यह उसका मनोबल बुरी तरह तोड़कर रख देते हैं जिससे उसकी उन्नति के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं। य...