जब गलत लोग गलत तरीकों से सफलता हासिल कर लेते हैं और सही लोग सही तरीके से प्रयास करने के बाद भी असफल हो जाते हैं तो ऐसा समाज के लिए अच्छा नहीं होता यह नैतिक रूप से पतनशील समाज की निशानी बन जाता है। जहाँ योग्यता को नकार,दिया जाता हो और,अयोग्य को उसका स्थान दिला दिया जाता है वहाँ के लोग कैसे होंगे उनकी सोच कैसी होगी इस का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे अयोग्य लोग योग्य,लोगों को पीछे धकेल कर आगे बढ़ जाते हैं। एक विभाग में लेखा विभाग के प्रभारी बड़े योग्य और,ईमानदार थे। पर उनके साहब भ्रष्ट थे। उनके कारण वे भ्रष्टाचार नहीं कर पा रहे थे। साहब ने कई झूठे आरोप लगाकर उनकी गोपनीय चरित्रावलि पर प्रतिकूल टीप लिखकर उनका डिमोशन करा दिया और उन्हें लूप होल में पटक दिया। उनके स्थान पर,एक अयोग्य,जो उनके जैसा ही भ्रष्ट था ।की सी आर अच्छी लिखकर उसका प्रमोशन करा दिया । अब वे दोनों मिलकर खुला भ्रष्टाचार कर रहे हैं उनसे लोग परेशान तो हैं पर उनका कोई बाल बाँका करने वाला नहीं है। क्योंकि उनका सुरक्षा कवच भ्रष्टाचार के घेरे से मजबूत है जब योग्य,ईमानदार को हटाया गया तो उसकी पैरवी करने वाला कोई नहीं ...
जब आपस में खूब गहरी दोस्ती रहती है तब किसी को उनकी भलाई बुराई का पता नहीं चलता इसका पता तो तब चलता है जब उनमें दुश्मनी ठन जाती है इसके बाद,उनका आमना सामना होता है फिर वे आपस में लड़ते हुए एक दूसरे की बुराइयाँ खुलकर बताते हैं,एक दूसरे की पोल पट्टी खोलते हैं तब लोग जान पाते हैं,इनकी असलियत क्या है। जिनमें दोस्ती गहरी होती है तथा दोस्ती की जड़ें मज़बूत होती हैं । उनमें थोड़ी बहुत नौंक झौंक होती रहती है कभी हल्की फुल्की तकरार भी हो जाती है फिर मान मनौव्वल से दोस्ती और मज़बूत हो जाती है। क्योंकि वे एक दूसरे के हितैषी होते हैं एक दूसरे का भला चाहते हैं इसलिए वे दोस्ती पर कभी आँच नहीं आने देते सबसे अधिक बुरी मतलबी की दोस्ती होती है। ऐसे लोग दोस्ती का हाथ तभी बढ़ाते हैं जब उन्हें अपना मतलब निकालना होता है मतलब निकलते ही ये फिर कभी किसी प्रकार का वास्ता नहीं रखते । कुसुम और सरोज में ऐसी ही दोस्ती थी कुसुम थोड़ी सरल और भावुक थी जबकि सरोज चपल चालाक तथा मतलबी कुसुम भी मेहनत मजदूरी करती थी तथा उसका पति हलवाई था। सरोज ने उसकी खूब चानलूसी कर के उससे गयारह हजार रुपये उधार ले लिए थे कुसुम के ...