जो अच्छे लोग होते हैं वो किसी का छोटा से छोटा अहसान भी नहीं भूलते तथा उस अहसान का बदला चुकाने का अवसर तलाशते रहते हैं और जब उन्हें मौका मिल जाता है तो फौरन उस अहसान का बदला चुका देते हैं तभी उनको चैन मिलता है। दूसरी ओर वे लोग भी हैं जो अपने ऊपर किया गया किसी का बड़े से बड़ा अहसान भी नकार देते हैं आजकल इनकी संख्या ज्यादा ही बढ़ती जा रही है। जब इनकी गरज होती है तब खूब चिकनी चिपड़ी बातें करते हैं ख़ुशामद में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहने देते ।और जब उनकी गरज निकल जाती है तो ऐसे मुँह फेर लेते हैं जैसे की जानते ही न हों कई लोगों का बहुत सा पैसा इनके फेर में पड़कर डूब गया है। माँगी लाल ने दस साल पहले रोशन लाल से पाँच लाख रुपये का कर्ज लिया था तब माँगीलाल अपना मकान बनवा रहा था जिसमें लागत का सत्तर प्रतिशत रुपया रोशन लाल द्वारा दिए गए कर्ज से प्राप्त हुआ था रोशनलाल ने अपने गाँव की जमीन बेची थी। उसके पैसे उनके पास थे। जो उन्होंने माँगीलाल की दयनीय दशा पर द्रवित होकर दे दिए थे उस समय?माँगीलाल ने सात लाख में पूरा मकान बनवा लिया था। जाज उस मकान की कीमत सत्तर लाख रूपये हो गई थी। उस समय सो...
ब्याज का चंगुल वो चंगुल है जिसमें फँसना तो आसान है पर उससे छूटना आसान नहीं होता लोग कर्ज लेकर बड़े खुश होते हैं जिसका लोन स्वीकृत हो जाए उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता। उस समय वो इस पर तनिक भी विचार नहीं करता कि इसे अदा कैसे करेगा फिर नौबत यह आती है कि गिरवी रखी संपदा हाथ से निकल जाती है अशोक जी ने मकान बनवाते समय एक साहूकार से पाँच लाख रुपये का कर्ज लिया था उसकी ब्याज दर भारी थी मकान उन्होंने कुछ ज्यादा ही अच्छा बना लिया था जिसकी छोटी मोटी उधारी बहुत लोगों की बकाया थी। कर्ज देने वाले ने भी तकाजा नहीं किया पाँच साल बाद पूरे बत्तीस लाख रुपये की वसूली करने वो अशॅक के पास आया तीन प्रतिशन मासिक चक्रवर्ती ब्याज बढ़ते बढ़ते पूरे सत्ताइस लाख रुपये हो गया था। इतनी बड़ी राशि का सुनकर अशोक जी के होश गुम हो गए कर्ज देने वाला दबंग था अशोक के पसा और लोगों का कर्ज भी था। हारका उसे वो मकान बेचना पड़ा उस पैसे से अशोक जी ने कर्ज अदा किया। आजकल वे किराये के मकान में रह रहें। हैं कभी कभी वे सोचते हैं अगर उन्होंने बिना कर्ज लिए मकान बनाया होता वो भले ही छोटा तो तो आज ये नौबत नहीं आती...