वैसे तो जो स्वभाव से भले होते हैं वे हर हाल में भले बने रहते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं । जिनके अंदर छल कपट कूट कूट कर भरा होता है जो हद दर्जे के मतलबी इंसान होते हैं मगर भलाई का दिखावा करने में सबसे आगू रहते हैं जहाँ उनका स्वार्थ हल करना होता है वहाँ ये शराफ़त की हद तक पार कर देते हैं । सामने वाले को जब तक पटकनी नहीं मिलती तब तक वो उन्हें दुनिया का सबसे भला इंसान समझता रहता है। जो लोग इनकी फितरत को जान जाते हैं । वो इन के फायदे की बात करके इनसे धन ऐंठते हैं फिर उसके अनुसार वे उन्हें लाभ भी पहुँचाते हैं जिसे देखकर उन्हें संतुष्टि मिलती है। एक ग्रामीण स्तर के कर्मचारी थे उन्हें अपना प्रमोशन लेना था उन्होंने साहब की निगाह में भले बनने के हर हथकण्डे अपनाना शुरू कर,दिए । साहब को पाँच हजार वर्ग फीट का भूखण्ड फार्म हाऊस के लिए खरीधना साहब उसके लिए पचास ,लाख रुपये देने को तैयार थे इन्होंने उन्हें दस हजार वर्ग फीट का भूखण्ड साठ लाख में दिलवा दिया तथा दस लाख रुपये की दलाली भी खा ली। साहब को इसकी भनक भी नहीं लग पाई साहब की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था साहब के मित्र सी एम ओ साहब थे।...
अक्सर क्रोध के कारण जो अपना काम बिगाड़ लेते हैं । बाद में उन्हें ख़ूब पछतावा होता है । तब वे सोचते हैं आखिर उन्होंने क्रोध किया ही क्यों शाँत रहकर भी तो बात की जा सकती थी । तब काम बिगड़ने की नौबत ही नहीं आती। क्रोध करने वाला अपनी आदत से मज़बूर होता है वो दूसरों का पक्ष सुनना ही पसंद नहीं करता उसकी निगाह में उसको छोड़ कर सब गलत होते हैं। रवि अपने गुस्सैल स्वभाव से खुद ही परेशान था। गुस्से में वो किसी का लिहाज नहीं करता था। खूब जली कटी सुनाए बिना उसे चैन नहीं पड़ता था। एक साल में तीन बार उसे किराये का मकान बदलना पड़ता था तीन महीने से ज्यादा उसकी किसी मकान मालिक से नहीं निभती थी। आखिर लड़ाई हो ही जाती थी। जिसके नतीजे में उसे मकान खाली करना पड़ता था। पन्द्ह साल में दस जगह वो नौकरी कर चुका था कोई उसकी बात अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाता था । ऐसे लोग बार बार ठोकर खाते हैं । इनका गुस्सा बुरा ही हुआ करताहै इस बात को अच्छी तरह जानते हुए भो यह गुस्सा करने से कभी बाज नहीं आते। आत्म सम्मान सबका होता है कोई अपना अपमान सार्वजनिक रूप से सहन नहीं कर सकता। ऐसे लोग जब क्रोध में क...