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व्यंग्य : संबंधों का निर्वाह

कहते हैं कि अगर अच्छे रिश्तेदार से ज्यादा कोई सुख प्रदान नहीं कर सकता । तो वहीं बुरे रिश्तेदारों से अधिक दुखदायी कोई भी नहीं हो सकता। इन रिश्तों में अपने खून के रिश्ते भी शामिल होते हैं। सबसे निकट का रिश्ता पति पत्नी का माना जाता है पर उनमें भी अगर अहं की लड़ाई हो या किसी एक का स्वभाव खराब हो तो दूसरे की ज़िंदगी नर्क से भी अधिक बदतर हो जाती है एक रिश्ता जीजा साले का भी होता है जिसमें सबसे ज्यादा विवादास्पद रिश्ता साले का समझा जाता है तभी तो किसी को साला कहना गाली समझी जाती है। अगर किसी की तरक्की देखकर सबसे अधिक जलने वालों की सूची बनाई जाए तो उसमें अधिकांश रिश्तेदार ही शामिल होते हुए नज़र आएँगे। हाँलाकि इसमें मतभेद हो सकते हैं पर ज्यादातर लोगों का यही कहना होता है। अनिल ने एक आवासीय भूखण्ड का सौदा किया था पास में ही उसके साले दीपक का भी मकान था। अनिल से इतनी गलती हो गई कि उसने भूखण्ड की रजिस्ट्री होने के पहले यह बात अपने साले को बता दी। साले ने ऊपरी तौर पर तो ख़ुशी जताई पर भीतर ही भीतर?जल भुनकर खाक हो गया। उसने भूखण्ड के मालिक से मिलकर उसे इतना भड़काया कि उसने भूखण्ड बेचने से ...
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व्यंग्य : सरकारी नौकरी वाला दूलूहा

वैसे तो सरकारी नौकरी मिलना आसान नहीं है । पर जिनकी सरकारी नौकरी लग जाती हैं उनके यहाँ विवाह योग्य लड़कियों के माता पिता की भीड़ लगना शुरू हो जाती है उसी हिसाब से दहेज भी निर्धारित हो जाता है। ऐसे दूल्हे के पिता को अपने बेटे के लिए दुल्हन की तलाश नहीं करना पड़ती । ऐसे दूल्हों की संख्या बहुत कम होती है तथा विवाह योग्य लड़कियों की संख्या कई गुना अधिक ऐसे में जो सबसे अधिक रुपया देता है वो अपनी बेटी की शादी ऐसे दूल्हे से करने में सफल हो जाता है बाकी सब मायूस हो जाते हैं। जिस तरह सरकारी नौकरी करने वाले लड़कों की पूछ होती है उसी तरह सरकारी नौकरी करने वाली लड़की के पिता के दिमाग भी सातवे आसमान पर होते हैं ऐसी लड़की से विवाह करने वाले लड़कों की संख्या कम नहीं होती वर पक्ष द्वारा इनको दहेज रहित शादी के ऑफर दिए जाते हैं ऐसी लड़की के नैन नक्श पर भी ध्यान नहीं दिया जाता सरकारी नौकरी की विशेषता ही ऐसी है जिसके सामने बाकी सब कुछ गौण हो जाता है। विशाल एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था साठ हजार?रुपये वेतन मिल रहा था उसकी शादी अंजलि से लगभग तय हो गई थी लेकिन जब अंजलि को सरकारी नौकरी करने वा...

व्यंग्य : सफलता की चमक

सफलत की चमक लोगों को भले ही चकाचौंध कर दे पर जिसको सफलता भिलती है उससे पूछो इसके लिए उसने कितने प्रयास किए हैं। सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता यह कठोर?परिश्रम लग्न से प्राप्त होती है जो सफल होता है वो सोने की तरह खरा होता है। हीरा कितना ही कठोर क्यों न हो उसे भी अगर तराशा न जाए तो वह भी अपनी पूरी चमक नहीं बिखरा सकता। । पारखी कहते हैं कि सोने में प्राकृतिक रूप से कोई खोट नहीं होती यही उसकी विशेषता होती है और यही उसकी चमक का सबसे बड़ा कारण जो किसी भी हाल में फीकी नहीं होती ना ही सोने में कभी जंग लगती है। सोने में खोट अगर मिला भी दी जाए तो उसे इतना तपाया जाता है कि खोट सारी जलकर राख हो जातो है पर सोने में और अधिक निखार आ जाता है। शेखर जब कलेक्टर बनकर जिला मुख्यालय पर आए कार्यभार ग्रहण करने के बाद जब उन्होंने स्टॉफ के सदस्यों से परिचय प्राप्त किया तो अपने सहपाठी सुधीर को देखकर चौंक गए। सुधीर ने स्नातक परीक्षा में बहत्तर प्रतिशत?अंक प्राप्त कैए थे जबकि उनके अठ्ठावन प्रतिशत अंक आए थे उसका सबसे बड़ा कारण था कि सुधीर के चाचा यूनिवर्सिटी में सेवारत थे उनके कारण षुधीर के इतने अं...

व्यंग्य : बदला

जिस तरह दिवाली पर कुछ लोग जुआ खेलते हैं कि जो कि एक बुराई हे। उसमें जो बड़ी रकम हार जाते हैं उसकी क्षतिपूर्ती करने में उन्हें पूरा साल लग जाता है उसी तरह होली पर लोगो को दुश्मनी निकालने का मौका मिल जाता है होली की आड़ में वे अपने दुश्मन की तबियत से पिटाई करके अपना बदला निकाल लेते हैं । तभी तो यह कहावत चल गई कि दिवाली का लुटा और होली के पिटे के ठीक होने में पूरा साल लग जाता है। कुछ लोगों बदला निकालने की भावना बहुत तीव्र होते हैं जब तक यह अपना बदला नहीं निकाल लें ते तब तक उन्हें चैन नहीं पड़ता सुरेश को कक्षा में शिक्षक की मार?खाना पड़ी वहीं राकेश खड़ा था । सुरेश ने यह मान लिया कि राकेश के कारण उसकी पिटाई हुई। उसके मन में बदला लेने की भावना तीव्र हो गई । उसने छल कपट से राकेश को अपने साथ ले लिया अपने चार दोस्तों को भी इशारा कर दिया फिर किसी खँडहर में?सुन सान जगह उसके और उसके दोस्तों ने मिलकर राकेश की खूब पिटाई कर दी तब कहीं उसके मन को चैन मिला। कई लोग ऐसे होते हैं जो बात तो भले की करते हैं पर वो होती है बहुत कड़वी। जो कुछ लोगों को बुरी लगती है और वो उसका बदला भी निकालते हैं चाहे उ...

व्यंग्य : हाँ में हाँ मिलाने वाले

जो मतलबी इंसान होते हैं वे सिर्फ अपने मतलब से वास्ता रखते हैं ।इसलिए वे हाँ में हाँ मिलाना बुरा नही॔ समझते और झूठी तारीफों के पुल बाँधते हैं जिससे सामने वाले को अपनी गलतियाँ भी सही लगने लगती हैं जो उससे गहरे नुक्सान में धकेल देती हैं। फिर भी यह उसके चहेते बने रहते सैं जैसे कुछ लोगों की ख़ुशामद करने की आदत होती है वेसे ही कुछ लोग अपनी खुशामद से खुश होते हैं और?अपने आपको श्रेष्ठ और सही मानने का भ्रम पाल लेते हैं। यह चापलूसी करने वाले आपको हर क्षेत् में मिल जाएँगे सरकारी दफ्तर में बड़े साहब की चापलूसी करने वाला सबसे ख़ास होता है क्योंकि बड़े साहब उसकी हर बात मानते हैं। जो खरीऔर कड़वी बात करता है वो किसी को अच्छा नहीं लगता। एक ऑफिस में एक हितग्राही से बड़े साहब की तीखी तकरार हो गई थी बड़े साहब ने भी कसम खा ली थी चाहे कुछ भी हो जाए इसका काम नहीं करूँगा । उनके इस इरादे को मज़बूती दी उनके चापलूस राकेश ने वो ऑफिस के चक्कर लगा लगा कर थक गया लेकिन उसका काम नहीं हुआ। खैर वक्त ने करवट बदली कोई उसे कलेक्टर साहब के पास ले गया उसकी बात सुनकर साहब पसीज गए उन्होने संबंधित अधिकारी के खिलाफ जाँ...

व्यंग्य : बुझे दीपक

जब रात गहरी अंधेरी होती है तब दीपक सबसे महत्वपूर्ण हो जाते हैं उजाले के लिए उनको जलाया जाता है तेज हवा से बुझने से बचाने के लिए कई प्रकार के उपाय करना पड़ते हैं। उनका विशेष ख्याल रखा जाता है । वही दीपक सुब्ह होने पर बुझाकर किसी कोने में रख दिए जाते हैं फिर पूरे दिन उनकी कोई खोज खबर नहीं ली जाती यही बात इंसानों पर भी लागू होती है। जब कोई आदमी जवान होता है मजबूत होता है ख़ूब पैसा कमाता है पूरे परिवार का खर्च चलाता है तब उसकी बड़ी पूछ परख होती है तब उजाला देते हुए दीपक के समान होता है। वही आदमी बूढ़ा हो जाता है कमाने योग्य नहीं रहता पुत्रों पर आश्रित हो जाता है तब उसकी दशा बुझे हुए दीपक के समान हो जाती है उपेक्षा का शिकार हो जाता है। यह बुझे हुए दीपक जैसे लोग जब आपस में बातचीत करते हैं तब अपने पुराने सुहाने समय में खो जाते हैं जिससे वो कभी उबरना नहीं चाहते इनकी बातों पर बाकी लोग ध्यान नहीं देते किसी के पास इनकी बातों को सुनने की फुरसत नही होती। यही हाल काका धनीराम का था। वे भी बुझे हुए दीपक की तरह हो गए थे। दो लड़के थे जिन्होंने उनकी दोनों दुकानों पर?अधिकार कर लिया था वे खर्च...

व्यंग्य : खुली लूट

जबसे उच्च स्तर के कुछ विशिष्टों ने आम जनता के साथ खुली लूटा का मुद्दा उठाया है तबसे सोशल मीडिया पर यह सबसे बड़ी चर्चा का विषय भन जया है जिसमें सबसे ज्यादा पीड़ित आम आदमी मुखर नजर आ रहा है बाकी अधिकाँश विशिष्ट लोग इस पर चुपूपी साथकर बैठे हुए हैं सोशल मीडिया चर यह भी चल रहा है कि टोल आम आदमी से ही क्यों वसंला जाए बाकी सभी लोगों से क्यों नहीं सक्षम होते हुए भी उन्हें ये छूट किस कारण से दी जा रही है। कोई यह भी कह रहा है कि जो करोड़ों के पर्स लाखों का पानी एक कप चाय अथवा कॉफी गटक रहें हैं वो भी दो सौ रुपये रोज की दिहाड़ी करने वाले मजदूर की गाढ़ी कमाई की जेब से निकला हुआ पैसा है। जो कुछ खास लोगों को करोड़ों रुपये के गिफ्ट दिए गए हैं वो भी आम आदमी के जेब से निकाले गए पैसे हैं। जो वैधानिक रूप से वसूले गए हैं। इसका सबसे बड़ा कारण मोनो पाली है चार कंपनियों के हाथ में पूरा कारोबार है उन्होंने आपस में मिलकर रेट फिक्स कर लिए हैं आम आदमी के पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया है। ऐसे ही पेनल्टी के नाम से सर्विस चार्ज के नाम से अनाप शनाप रुपये की वसंली भी आम आदमी का कचूमर निकाल रही है। उसके...