आज के इस तनाव भरे जीवन में ख़ुशी बहुत दुर्लभ होती जा रही है लोग इतने तनाव में रहते हैं कि छोटी मोटी ख़ुशी उन पर कुछ असर नहीं डाल पाती है। बड़ी ख़ुशी भी वे ठीक से मना नहीं पाते हैं कोई उनकी ख़ुशी पर बधाई दे तो मुँह बनाकर बोलते हैं काहे की ख़ुशी कैसी ख़ुशी । फिर?बुरा मुँह बनाकर अपनी हज़ार परेशानियाँ गिनाने बैठ जाते हैं। और कुछ इस तरह से चित्रण करते हैं कि सुनने वाला जो बधाई देने आया था तब बड़ा ख़ुश मिजाज था अब गहरे दुख के सागर में डूबा दिखाई देने लगता है। ऐसे लोग हमेशा रोनी सूरत बनाए हुए मिलेंगे। कभी किसी ने उन्हें खुलकर हँसते हुए नहीं देखा होगा यह जब घर में आते हैं। तो इनकी त्यौरी चड़ी होती है कभी बच्चों पर झल्लाते हैं तो कभी पत्नी पर अपनी खीझ निकालते हैं इनके आते ही घर का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे घर में कर्फ्यू लगा हो। जब यह घर से जाते हैं तो पूरे घर का माहौल बदल जाता है। रस्तोगी साहब ने दो लाख में नई इलेक्ट्रिक स्कूटी ली थी। जिसमें डेढ़ लाख रुपये का लोन लिया था। उनके पास जो स्कूटी थी वो ठीक ठाक थी अच्छी चल रही थी मगर दिखावे के फेर मेअं उन्होंने यह इलेक्ट्रिक स्क...
कुछ लोग स्वभाव से बुरे होते हैं इनके मन में ज़रा भी सद्बाव नहीं होता । यह किसी की तरक्की देखकर जल भुन कर खाक हो जाते हैं यह किसी आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहते ये पेड़ों में पानी सींचना अच्छा नहीं मानते इन्हें तो किसी जमे जकड़े पेड़ की जड़े खोदने में बहुत मजा आता है। किसी पेड़ को जड़ से उखाड़कर भी दम नहीं लेते बल्कि बाकी बची जड़ों में भी मठ्ठा डाल देते हैं ताकि वो फिर से हरिया न सके। इनके साथ रहने वालों की भी कमी नहीं है इन्हें विध्न संतोषी भी कहा जाता है। इनका ह्रदय परिवर्तन कोई नहीं कर सकता यह लोग जीवन पर्यंत तक भी अपना स्वभाव नहीं बदल पाते। मरते मरते भी ये किसी न किसी का बुरा करने में सफल हो ही जाते हैं। उमेश और महेश दोनों सगे भाई थे उमेश कुटिल स्वभाव का था महेश सीधे सरल स्वभाव का उमेश कामचोर भी था जबकि महेश मेहनती होने के साथ बुद्धिमान भी था तथा व्यावहारिक भी। दोनों को जायदाद में बराबर का हिस्सा मिला था। दोंनों के हिस्से में दस दस एकड़ जमीन आई थी साथ ही एक एक मकान भी। लेकिन आठ साल में उमेश अपने कुटिल स्वभाव के कारण कंगाल हो गया था मारपीट चोरी और लूटमार के जुर्म...