जब समाज का नैतिक रूप से पतन होने लगे तो भलाई किसी को अच्छी नहीं लगती यहाँ तक कि भला करने वाला लोगों को बुरा लगने लगता है। जबकि लोभी लालची मतलबी मुनाफाखोर किसी की मज़बूरी का फायदा उठाने वाले खूब फलते फूलते हैं और किसी को उन पर ऐतराज भी नहीं होता पर जो भला करता है वो सभी को खटकने लगता है। शिक्षच राधेश्याम जी को छात्रों के पासपोर्ट साइज के फोटो की आवश्यकता थी कोई फोटोग्राफर नहीं था सो उहह उन्होॅने अपने केमरे से फोटो खींचे और प्रिंट कराकर उनका उपयोग कर,लिया इसके उन्होंने बच्चों से कोई पैसे नहीं लिए। प्रिन्ट में तीस रुपये का खर्च आया था वो उन्होंने स्वयं वहन कर,लिया जबचि एक निजी स्कूल ने एक फोटो के पिचहत्तर रुपये लिए जो लोगों ने बिना ना नुकर के दे दिए। उनसे कुछ गरीब लोग फोटो बनवाने आते और वो दो रुपये में पासपोर्ट फोटो निकाल कर,दे देते थे। एक दिन एक स्थानीय फोटो ग्राफर उनके पास आया बोला सर,यह रेट गिराकर काम करना बंद करो नहीं तो ठीक नहीं होगा हमारे धंधे पर,असर पड़ रहा है। सर को बाद में पता चला कि अगर,उन्होंने काम बंद नहीं किया तो उन्हें पॉक्सो एक्ट के केस में फँसाने की तैयारी ...
व्यवस्था की खामियों का लाभ उठाकर मुफ्त खोरी करने वालों की संख्या कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। ये दूसरों की कमाई पर मौज करते हैं । निर्माण कार्य,में लगे मज़दूर को दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद ढाइ सौ रुपये मिल रहे थे।पता चला कि उसके मजदूरी चार सौ रुपये थी ।उसके डेढ़ सौ रुपये कोई और हड़प रहा था। उसके पास ऐसे चालीस मजदूर थे जिनसे उसे रोज के छः हजार रुपये मिल रहे थे। बाकी चार,लाख रुपये उसने पन्द्रह प्रति शत मासिक की दर से कर्जे पर भी बाँट रखे थे जिनका प्रतिमाह ब्याज साठ हजार रुपये मिल रहा था। वो कोई काम नहीं करता था दिन भर स्क्रापियो में घूमता रहता था मजदूरों की निगाह मेः वो बड़ा आदमी था । इस तरह के मुफ्तखोर आपको हर,क्षेत् में मिल जाएँगे एक ने अपने परिचित से कहा कि मुझे प्लॉट खरीदना है। उसने एक प्रापर्टी डीलर के पास भेज दिया । प्लॉट बाइस लाख का था इसके उसे चवालीस हजार रुपये बिना कुछ किए धरे ही मिल गए। कुछ लोग सामान खरीदवाने के लिए दुकान पर ले जाते हैं बाद में दुकानदार से मोटी रकम वसूल लेते हैं। एक स्थान पर किसी ने कार खड़ी की सिर्फ जरा सी देर के लिए। जबकि वो कोई पार्किंग वाली जगह ...