कहते हैं कि बुरे काम होने में देर नहीं लगती पर अच्छा करने जाओ तो हज़ार रुकावटें सामने आते हैं नित?नई परेशानियाँ उत्पन्न होती हैं ।मन भी डगमगा जाता है। हतोत्साहित करने वाले भी बहुत?मिल जाते हैं। इनसे सबसे ज्यादा बुरे वे लोग होते हैं जो अड़ंगा लगाते हैं किसी के बने हुए काम बिगाड़ने में इन्हें अपार सुख की प्राप्ति होती है। इनके सामने कोई अपनी परेशानी बताए तो इन्हें अच्छा लगता है और कोई इनसे अपनी खुशखबरी शेयर करे तो इनके तन बदन में आग लग जाती है इन्हें कीसो की ख़ुशी अच्छी नहीं लगती। राधेश्याम जी किराये के मकान में रहते थे ऐसे रहते हुए इन्हें दस साल हो गए थे। राधेश्याम जी ने एक आवासीय भूखण्ड देखा था जो बिकाऊ था। उसकी कीमत पन्द्रह लाख रुपये थी। उन्होंने दस लाख रुपये की व्यवस्था तो कर ली थी लेकिन पाँच लाख रुपये कम पड़ रहे थे। वे इसी उधेड़बुन में थे चि कहीं से पाँच लाख रुपये का बंदोबस्त कैसे हो। उन्होंने एक से बात की थी वो डेढ़ परसेन्प मासिक ब्याज दर पर पैसे देने को तैयार हो गया था। भूखण्ड का सौदा शीघ्र होने वाला था। तभी उनसे एक चूक हो गई उनके परिचित चतुर सिंह से जब उनकी बात हुई तो चतरसिं...
अपने वाले अगर अच्छे न हों हों तो उनसे अधिक दुख देने वाला कोई ओर नहीं होता अपनों का दिया दंश बहुत?पीड़ा जनक होता है खासकर अपने करीबी रिश्तेदार हों। अब तो यह भी देखा जा रहा है कि पति पत्नी के बीच अगर प्रेम खत्म हो गया हो तो वो एक दूसरे का सताने के अवसर तलाशते रहते हैं। कई परिवारों में कोई बेटा माँ बाप का ज्यादा चहेता होता है और कोई उपेक्षित जो चहेता होता है वो उपेक्षित को परेशान करता है। और माता पिता भी इसे नजर?अंदाज कर?जाते हैं चहेता अगर उपेक्षित की झूठी शिकायत भी कर दे तो उसे सही मान लिया जाता है । और उपेक्षित को बिना किसी कसूर के कड़ी सजा मिल जाती है जिसे देखकर चहेते को पैशाचिक आनंद की अनुभूति होती है। दूसरी ओर यदि उपेक्षित चहेते की सही शिकायत भी कर दे तो उसे झूठी मानकर?उसे ही प्रताड़ित किया जाता है। इनसा दुखी और कोई नहीं होता क्योंकि ये अपनों के अत्याचार कै शिकार होते हैं। ये अगर घंटों आँसू भी बहाएँ तब भी इनके सगे अपनों का ह्रदय नहीं पसीजता। जबकि चहेता अगर जरा भी उदास हो तो पूरा घर दुखी हो जाता हैं और?उसको खुश करने का प्रयास करता है अगर वो इसका कारण उपेक्षित के द्वारा...