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व्यंग्य: सुख के साथी

कहते हैं जब किसी का बुरा वक़्त आता है तो उसका साया भी उसका साथ छोढ़ देता है बिगड़े हुए का कोई नहीं होता और अगर कोई अपनी मेहनत और लगन से संघर्ष कर के सफल हो जाए और सुख से रहने लग जाए तो उसके पास मुफ़्त खोरों की भीड़ ऐसे इकठ्ठी होने लगती है जैसे गुढ़ की ढेली पर मक्खियों का झुंड टूट पड़ता है। 
जब कोई जीने के लिए संघर्ष कर रहा होता है और अगर वो स्वाभिमानी तथा खुद्दार हो तब उसके साथ कोई नहीं होता अपने भी कन्नी काटकर निकल जाते हैं वो किसी अपने को रोक कर कुछ बात करना चाहे तोउसकी बात कोई सुनने को तैयार नहीं होता उन्हें ये ही डर लगा रहता है कि कहीं ये हमसे पैसा न माँग ले। हाँलाकि भले इंसानों की भी कोई कमी नहीं है दुनिया में। जरूरतमंद की मदद करने में बहुत लोग आगे रहते हैं। पर उनमें से कोई अपने वावा नहीं होता न कोई रिश्तेदार आगे आता है। इसके बाद अगर जीना है तो उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है। 
दिनेश को दो लाख का लोन चाहिए था इसके लिए उसे जमानतदार की जरूरत थी । दिनेश को अपने पक्के दोस्त केशव की याद आई उसने जब केशव से संपर्क किया तो केशव ने जमानत देने से साफ इंकार कर दिया जबकि दिनेश के केशव पर अनगिनती एहसान थे। वही दिनेश जब अच्छी तरह कमाने खाने लगा तो केशव सारी शर्म को छोड़कर दिनेश से दो लाख उधार लेने आ गया गिड़गिड़ाने लगा मिन्नतें करने लगा दिनेश का मन पसीज गया वो रुपये देने वाला था जब तक उसकी पत्नी वोली रुपये तो वो व्यक्ति ले गया जिसे आपने देने के लिए रखे थे जब केशव को पता चल गया कि दिनेश से फूटी कौडो भो नहीं मिलने वाली तो वो झगड़ा करने पर उतारू सो गया सारी सज्जनता ताक में रखकर निम्न स्तर पर उतर आया। 
ऐसे ही एक अन्य उदाहरण याद आ रहा है रतनपुर गाँव के जगदीश आज शहर में बड़े कारोबारी हैं खूब पैसा है। जब दस साल पहले उनके पिताजी ने उन्हें घर से निकाला था तब उनके पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी न कोई घर गृहस्थी का सामान । कठोर परिश्रम करके वो कामयाब हुए थे उनके कामयाब होते ही उनके घर पिताजी आकर चिकनी चुपड़ी बातें कर उनसे पैसे ले जाने लगे भाई जिन्होंने मुँह फेर लिया था उनका भी आना जाना शुरू हो गया भतीजों के वे अच्छे चाचा और भानजों के अच्छे मामा बन गए । चापलूसी कर काम निकालने वालों की संख्या बढ़ने लगी। ऐसे लोगों में ज़रा सी भी गैरत नहीं होती । डगदीश के आसपास यह भीड़ तब इक्ठ्ठा होना शुर हुई जब धनवान हो गया। खैर जगदीश तो अच्छा और नेक इंसान था जो सारी कड़वाहट भूलकर सबकी मदद कर रहा था। पर कुछ लोग ऐसः भी होते हैं जो गार्ड रखते हैं। जिनको यह सख्त हिदायत होती है मेरे किसी भी रिश्तेदार को मत आने देना। और वो गार्ड अपने मालिक का काम पूरी ईमानदारी से करता है। और किसी रिश्तेदार को आगे नहीं आने देता।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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