एक तरफ जहाँ कई ऐसे उच्च शिक्षित हैं जो अत्यंत कम वेतन में नौकरी कर के मुश्किल से अपना जीवन यापन कर रहे हैं । दूसरी तरफ कुछ ऐसे चपल चालाक भी हैं जो कहीं पर भी नौकरी नहीं करने के बाद भी मजे से रह रहे हैं इनके पास रुपये पैसों की कमी भी नहीं है इनके पास आपको गरीबी रेखा वाला राशन कार्ड भी मिलेगा और एक नहीं कम से कम आठ दस इनके मुफ्त की बिजली से ऐ सी चल रहा होगा शासन की हर योजना का लाभ उठाने में वे सबसे आगे रहेंगे।
ऐसे ही एक सोहनलाल हैं जिन्हें सब लोग नेताजी के नाम से जानते हैं उनके पास अपना कोई काम नहीं है। दो एकड़ जमीन का पट्टा फर्जी नाम से बनवा रखा जिसमें आज तक उन्होंने खेती नहीं की फिर भी उनके पास के सी सी है शासन की सारी सब्सिडी एवं सुविधाओं का लाभ वे लेते रहते हैं शहर का ऐसा कोई सरकारी दफ्तर नहीं है जहाँ उन्हें कोई नहीं जानता हो वे अपनी जेब से कभी एक रुपया तक खर्च नहीं करते फिर भी चकाचक रहते हैं। रोज कोई न कोई उन्हें अक्ल का अंधा और गाँठ का पूरा भिल ही जाता है । जो कपन में भी दलाली खा लें उसमें के हैं वो फिर भी बस्ती के लोगों का उनके बिना कोई काम नहीं चलता है किसी को अस्पताल ले जाना हो या बैंक या सरकारी दफ्तर का काम कराना हो ते लोग उनके पास जाकर दोगुना पैसा खर्च कर काम कराकर खुश होते हैं। दवाओं में कमीशन खा जाएँ। कोर्ट कचहरी में भी वे किसी न किसी के साथ मिल ही जाते हैं। और उससे मोटी रकम खेकर ऊपने खर्च निकाल लेते हैं। वे रिश्वत लेकर आगे तक पहुँचाने की ट्रिक जानते हैं ऐसमें भी वे अच्छी रकम वसूल कर ही लेते हैं। सबको मालूम है कि वे पैसा खाए बिना काम नहीं कराते है फिर भी लोग उनकी मदद लेने से परहेज नहीं करते थे।
। लोग ये सोचकर खुश हो जाते की अपना समय पर काम तो हो गया चाहे पैसा भले दोगुना खर्च होना हो। ऐसे लोगों को चुनाव लडने की भी जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि वैसे ही उनकी अच्छी खासी कमाई हो रही है तो कौन बेकार के झंझट में पड़े।
*****
रचनाकार
प्रदीप कश्यप
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें