शुरू से ही प्रतिभाओं का गला घोंटने की नाकाम कोशिश होती रही है फिर भी प्रतिभाएँ उभर कर सामने आई हैं और उन्होंने अपना लोहा मनवाया है। चलाक लोगों ने प्रतिभाओं का अवसर खत्म करने की कोशिशें की मनोबल तोड़ा गया साधन सुविधाओं में कमी कर दी गई प्रशिक्षण देने वाला कोई नहीं मिला तब भी प्रतिभाओं ने अपना लोहा मनवाया प्रतिभा उभर कर सामने आई और लोगों को उसे मान्यता देना पडी।
दंसरों के खेतों में काम करने वाले मजदूर माखनलाल के तीन बेटे और एक बेटी थी उसमें एक बेटा आइ ए एस बना दूसरा बेटा आइ आइ टी से पास आउप होकर एक बड़ी कंपनी में जॉब कर रहा है जिसका मासिक वेतन पाँट लाख रुपये महीना है। तीसरा बेटा वरिष्ठ वैज्ञानिक है और बेटी डॉक्टर होते हुए सफल और प्रसिद्ध सर्जन है। दूसरी और गाँव के सबसे संपन्न और प्रभाव शाली किशनलाल के बेटे अवसर की बाहुल्यता होने के बाद भी बारहवीं से आगे की पढ़ाई तक नहीं कर सके कोई छोटी मोटी नौकरी तक उन्हें हासिल नहीं हो सकी आज एक साधारण जीवन जी रहे हैं। किशनलाल का रुतबा भी खत्म हो गया और जो खेतिहर मजदूर था वो माखनलाल आज गाँव का सबसे प्रभावशाली व्यक्ति है । चालीस एकड जमीन तो उसने किशनलाल से खरीदी है और इस समय पैसठ एकड़ जमीन का मालिक है।
माखनलाल ने घोर गरीबी के दिन देखे हैं। उसके बड़े बेटे को उसने सरकारी स्कूल में जब प्रवेश दिलाया तब किशनलाल जैसे लोगों ने उसकी खूब खिल्ली उड़ाई । पर लड़का होनहार था। हर क्लास टॉप करता था किशनलाल के बच्चे सबसे मँहगे प्राइवेप स्चूल में पढ़ रहे थे। पाँचवी पास करने के बाद माखनलाल के बेटे का चयन नवोदय में हो गया वहाँ से उसने बारहवीं टॉप की और कॉलेज से स्नातक परीक्षा भी टॉप की। फिर आइ ए एस की तैयारी और उसमे सिलेक्शन के बाद तो तहलका मच गया। वो एक गरीब मजदूर का बेटा था। उसे किसी ने आगे नहीं बढ़ाया उसके साथ चाल चली गई उसका मनोबल तोड़ा गया उसके पास ट्यंशन कोचिंज के पैसे नहीं थे। किताबें नहीं थीं फिर भी उसकी प्रतिभा ने उसे आगे बढ़ाया था। माखनलाल के चारों बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़े थे चारों साधन सुविधा हीन होने के बाद भी टॉपर रहे थे। ।उनकी प्रतिभा ने उन्हें आगे बढाया था माखनलाल के लिए यह बड़ी गौरव की बात थी उसकी चारों संताने उसका नाम रोशन कर रही थी उसकी गरीबी उससे कोसों दूर भाग गई थी।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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