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कहानी: पुनर्मिलन

शीला ने रवि से तलाक के दस वर्ष बाद आज फिर उसी से शादी कर ली थी। इस बीच उसने रोहित से शादी की थी पर उसका दुखद निधन होने के बाद वो तीन साल से होस्टल में रह रही थी। शादी के बाद वो बहुत खुश दिखाई दे रही थी। जब वो रवि के साथ घर आई तो रवि के दोनों बच्चे अंकुर और अंकिता ने अपनी नई माँ के रूप में उसका स्वागत किया था। 
शीला ने रवि से तलाक के पाँच वर्ष बाद रोहित से शादी की थी लेकिन रोहित से उसका साथ अधिक दिन नहीं रहा। शादी के दो साल बाद रोहित की ब्रेन हेमरेज से मृत्यु हो गई थी। फिर तीन साल तक वो महिला होस्टल में रही। शहर के एक शॉपिंग मॉल में केशियर का काम करती रही। उसके कोई संतान नहीं हुई थी। वहीं उसकी पहले पति रवि से मुलाकात हुई तो पता चला कि उससे तलाक के बाद रवि ने निशा से शादी की थी। निशा से उसके दो बच्चे अंकुर और अंकिता हुए और वो एक दिन उसे और उसके दोनों बच्चों को छोड़कर चली गई। उसने रवि के दोस्त दिनेश से शादी कर ली थी। इससे रवि टूट गया था, उसे अपने दोस्त और पत्नी से ऐसी उम्मीद नहीं थी। उसका भरोसा टूट गया था। अब उसके कंधे पर दोनों बच्चों की जिम्मेदारी थी। फिर खुद की भी नौकरी थी। किसी और लड़की से शादी करने की अब उसकी इच्छा नहीं थी। उसे अपनी पहली पत्नी शीला की बहुत याद आती थी। शीला तलाक नहीं लेना चाहती थी पर अपनी मम्मी सुषमा और बहन रवीना के कहे में आकर उसने शीला को तलाक दिया था। निशा से उसकी शादी मम्मी ने   कराई थी। और निशा ने घर का माहौल ऐसा बिगाड़ा की मम्मी और उसकी बहन रवीना को घर छोड़ कर जाना पड़ा। आखिर शीला जैसी सुशील बहू से तलाक दिलवाने की कुछ तो सजा मिलनी थी। अब निशा आजाद हो गई थी। रवि को उसकी गतिविधि पसंद नहीं थी पर वो अपने बच्चों को देखकर चुप रहता था। वो किटी पार्टी की शौकीन थी। वहाँ वो जुआ खेलती थी जिसमें रवि की तनख्वाह से हर महीने बीस पच्चीस हज़ार का नुक्सान होता था। फिर भी रवि बर्दाश्त कर रहा था मगर अपने ही खास दोस्त से निशा की शादी को वो सहन नहीं कर पा रहा था। वो धीरे धीरे डिप्रेशन की तरफ जा रहा था। लेकिन मॉल में शीला को देखकर उसे सुखद आश्चर्य हुआ था। इसके बाद उनका मेलजोल बढ़ता चला गया। एक दिन बहुत आग्रह करके वो शीला को अपने घर ले गया। वहाँ शीला को दो छोटे और मासूम बच्चों को देखकर तरस आ गया और उसकी ममता जाग उठी। उसकी दोनों बच्चों से खूब अच्छी दोस्ती हो गई थी। यही कारण था कि जब शीला रवि से शादी कर घर आई तो दोनों बच्चों ने उसका अच्छा स्वागत किया था। शीला भी खुश थी, रवि को अपनी गलती का अहसास हो गया था। शीला ने रवि के दोनों बच्चों की अच्छी परवरिश करने के लिए खुद अपने बच्चे पैदा करने का विचार त्याग दिया था।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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