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कहानी: चहेते मुख्य नगर पालिका अधिकारी

जागेश्वर पिछले दस वर्षों से सोहनपुर के प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी थे। उनके कार्यकाल में वे तीसरे नगर पालिका अध्यक्ष के साथ काम कर रहे थे। पिछले दो अध्यक्षों के भी वे चहेते रहे और अब तीसरे न॰पा॰अध्यक्ष विवेक प्रधान के भी चहेते हो गए थे। उनके साथ कार्य करते हुए भी उनको साल भर होने जा रहा था। सोहनपुर राजधानी से बाइस किलोमीटर दूर स्थित एक कस्बा था जिसकी आबादी तीस हजार थी। वे चहेते इसलिए थे कि  जिसके साथ वे काम करते उसके साथ पूरी निष्ठा से काम करते थे।
दस वर्ष पहले जब मु॰न॰पा॰अ॰ मनीष वर्मा का तबादला हुआ था। तब न॰पा॰ के सबसे सीनियर कर्मचारी होने के कारण उन्हें प्रभार सौंपा गया था। इसके बाद तो यह पद उन्हें इतना रास आया कि वो दस वर्ष बाद भी ये दायित्व सम्हाल रहे थे। उनके कार्यकाल में पहले न॰पा॰अध्यक्ष देवकरण जी थे। वे चार साल तक उनके साथ रहे। इस बीच देवकरण जी पर खूब भ्रष्टाचार के आरोप लगे और वे सही भी थे। जागेश्वर भी कोई साफ सुथरे ईमानदार अधिकारी तो थे नहीं। हाँ वे रिश्वत खाना खिलाना और उसे पचाना अच्छी तरह जानते थे। चार साल तक देवकरण जी ने जागेश्वर जी के सहयोग से खूब भ्रष्टाचार से पैसा बटोरा। विरोधियों ने खूब हो-हल्ला मचाया पर देवकरण जी का कुछ नहीं बिगाड़ सके। जागेश्वर जी ने ऐसी कोई कमी नहीं छोड़ी जिससे वे लपेटे में आ सकें उस दौर में देवकरण जी को हटाने तथा जागेश्वर जी को सस्पेण्ड करने की जनता ने खूब माँग की मगर ऐसी कोई कमी नहीं आई जिसके आधार पर देवकरण जी एवं जागेश्वर जी के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। चार साल बाद जब चुनाव का दौर आया तब अध्यक्ष पद के प्रत्याशी उमेश गर्ग ने जनता से ये वायदा किया था कि भ्रष्ट न॰पा॰अध्यक्ष को जेल भिजवाया जाएगा तथा जागेश्वर का तबादला कराया जाएगा। चुनाव हुए, देवकरण जी हार गए और उमेश गर्ग चुनाव जीत गए। अब जनता को बेसब्री से इंतजार था कि कब गर्ग जी देवकरण जी को जेल भिजवाते हैं। कब जागेश्वर जी का तबादला कराते हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ न देवकरण जी के खिलाफ कार्रवाई हुई न जागेश्वर जी का तबादला। बल्कि हुआ ये कि जागेश्वर जी अब उमेश गर्ग जी के भी चहेते बन गए थे। उमेश गर्ग जी ने भी खूब पैसा भ्रष्टाचार से अर्जित किया इस बार जागेश्वर जी को हटाने की मुहिम सत्ताधारी पार्टी के बागी जी ने चलाई थी। पर वे भी चुनाव जीतने के बाद अपना वादा भूल गए। जागेश्वर जी जल्दी ही विवेक प्रधान के भी चहेते और विश्वसनीय हो गए थे। पिछले एक वर्ष से जागेश्वर जी विवेक प्रधान जी के चहेते अधिकारी बन कर उन्हें भ्रष्टाचार का मौका मुहैया करा रहे थे। जनता विवश थी कोई कुछ कह नहीं पा रहा था।

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रचनाकार 
प्रदीप कश्यप

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