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कहानी: अमर प्रीत

रोहित  और रजनी की शादी को  बीस वर्ष हो गए थे जबकि  रोहित साठ वर्ष के हो गए थे और रजनी अठ्ठावन  वर्ष की हालात अकर साथ देते तो  उनकी  शादी अड़तीस  वर्ष पूर्ण  हो चुके होते लेकिन   बेबसी के कारण  उनकी शादी में अठारह वर्ष का  विलंब हुआ उनके एक बेटी मोनिका तथा बेटा मनीष थे ।  दोनों की उम्र अठारह वर्ष थी दोनों जुड़वा थे और इस साल  कॉलेज के प्रथम वर्ष में थे।
रोहित और रजनी के बीच चालीस वर्ष पूर्व प्रेम पनपा था दो साल तक उनके प्रेम का सिल सिला चलता रहा  दोनों के माता पिता उनकी शादी के लिए राजी भी थे  रोहित ने बी टेक किया था उसकी नौकरी भी अच्छी सैलरी वाली थी  रजनी  ने बी ए पास कर लिया था।  शादी की तिथि भी तय हो चुकी थी लेकिन एक दिन में रोहित की सुख भरी दुनिया उजड़ गई थी  रजनी को उस इलाके का नामी गुंडा  जगन जबरन शादी कर के ले गया था बिना बताए वो बारात लेकर रजनी के घर आया रजनी के माता पिता को बाँध दिया भाई के भी हाथ पैर बाँध दिए  पंडित वो  अपने साथ ही लाया था  उसने वहीं पर रजनी से शादी की और और जबरदस्ती उसे उठाकर ले गया  रोहित उस समय शहर से बाहर था  जब आया तो सीधे रजनी के घर पहुँचा  वहाँ पर मातम छाया हुआ था रजनी के माता पिता खामोश थे रजनी के भाई ने सारी बातें रोहित को बताईं। रोहित बोला कोई ऐसा कैसे कर सकता है  कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज है कि नहीं है  पुलिस की सहायता क्यों नही ली  तब रजनी का भाई बोला जब  पुलिस आई  तब तक जगन शादी कर के रजनी को ले जा चुका था  रोहित बोला पुलिस ने उसे पकड़ा नहीं भाई बोला पुलिस यह कहकर चली गऍई की दोनों बालिग हैं दोनों ने शादी की वो अपने पति के साथ गई है हम तुम्हारी कुछ मद्द नहीं कर सकते  जगन से पुलिस इसलिए बच रही थी  क्योंकि जगन  स्थानीय विधायक  रघुपति राव का खास आदमी था   उनका  जगन के सिर पर  हाथ था। पुलिस   कुछ नहीं कर सकती थी।  चुनाव आने वाले थे  रघुपति राव को  जगन की बहुत  जरूरत थी।  इसलिए उन्होंने   जगन पर पुलिस कार्रवाई  नहीं होने दी थी। इधर जगन  ने उजनी को पत्नी तो बन लिया था पर उसका व्यवहार रजनी के प्रति ठीक नहीं था  जब भी रजनी गर्भवती होती वो उसका गर्भपात करा देता था ऐसा अनेकों बार हो चुका था कहते हैं समय सबका एक सा नहीं रहता  इस बार रघुपति राव चुनाव हार गए थे उनकी विरोधी पार्टी चा  प्रत्याशी सतेन्द्र मोहन  चुनाव जीत गया था ।  चुनाव जीतने के बाद सतेन्ट्र मोहन  ने अपने विरोथियों  से कसर निकालना शुरू की  जगन छिप गया था पुलिस उसकी सर गर्मी से तलाश कर रही थी  एक दिन मुखबिर ने पुलिस को उसका सुराग दिया  पुलिस उसे घेर लिया जगन ने भागने की कोशिश की पुलिस  ने उसका एनकाउण्टर कर उसे वहीं पर  ढेर  कर दिया  जगन के मरने  के बाद रजनी अकेली रह गई थी उसकी कोई औलाद नहीं थी।  उस शहर में उसका कोई अपना भी तो नहीं था इसलिए वो अपने होम  टाउन में आ गई  यहाँ उसने  एक स्कूल में शिक्षक की नौकरी कर ली थी  स्कूल की बिल्डिंग बन रही थी रोहित   बिल्डर सूर्यकांत की  कंपनी का मैनेजर था  स्कूल का ठेका  रोहित की कंपनी ने लिया था इसी सिसिलें  में वो  साइट पर,आया था वहीं उसे  रजनी मिल गई थी।  रजनी को इस हालत में देखकर बहुत दुखी हुआ  रजनी ने उसे आपबीती सुनाई सुनकर रोहित की आँखों से आँसू  बहने लगे। उसने रजनी से शादी का प्रस्तव रखा  रजनी तो रोहित को  शुरू से ही प्रेम करती थी बोली मेरी उम्र अड़तीस साल की होने जा रही है क्या आप मुझ से शादी करोगे।  रोहित बोला क्यों नहीं  और फिर दोनों ने एक सादे समारोह  में शादी कर ली थी  तबसे   रोहित की जिदगी  आनंद के बीत रही   
थी  अब तो उन पर बच्चों की जिम्मेदारी थी  जिसे वे बखूबी निभा रहे थे।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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