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कहानी: दूषित लड्डू

सरकारी स्कूल के शाला प्रभारी राधेश्याम आठ दिन तक बहुत हैरान परेशान रहने के बाद आज कुछ राहत महसूस कर रहे थे। क्योंकि आज उनकी नौकरी पर आया संकट टल गया था वहीं कलंक लगने से भी बच गया। जाँच में साबित हो गया था कि स्कूल के बच्चे मध्यान्ह भोजन खाने से नहीं बल्कि दूषित लड्डू के सेवन से बीमार हुए थे।  तब कहीं जाकर लोगों का आक्रोश शाँत हुआ था। और वास्तविक आरोपी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज हुई थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी कर लिया था।
घटना आठ दिन पहले की है। राधेश्याम जी लखनपुर के प्राइमरी स्कूल के शाला प्रभारी थे। दूसरे शिक्षक दिनेश कलेक्ट्रेट में अटेच थे। रोज की तरह इस बार भी विद्यालय में मध्यान्ह भोजन बना था। उस दिन अठारह बच्चों ने मध्यान्ह भोजन किया था। राधेश्याम जी ने वही भोजन खाया था। चार बजे की छुट्टी के बाद जब बच्चे घर की ओर जा रहे थे तब रामप्रसाद की होटल से थाली में भरकर एक वेटर राजू लड्डू लेकर आया। उसने सभी बच्चों को वे लड्डू बाँट दिए सभी बच्चों ने वे लड्डू खा भी लिए। उनमें से कक्षा पाँच की छात्रा रोशनी ने किसी तरह दो लड्डू ले लिए एक तो उसने वहीं खा लिया और दूसरा अपने भाई विनीत के लिए रख लिया। घर पहुँचने के बाद सभी बच्चों की तबियत बिगड़ने लगी। सभी को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। सभी को अस्पताल ले जाया गया अस्पताल में सबको भर्ती कर लिया गया। इधर गाँव में यह खबर फैल गई की बच्चे मध्यान्ह भोजन करने से बीमार हुए हैं। इस बात से लोगों में तीव्र आक्रोश हो गया वे गुस्से में मध्यान्ह भोजन बनाने वाली रसोइया कल्पना के पास आए तो कल्पना ने कहा कि सब्जी और सामान तो सर ने लाकर दिया था, मैंने तो भोजन तैयार किया था इसमें मेरी क्या गलती है। यह सुनकर सबने कल्पना को तो छोड़ दिया लेकिन राधेश्याम जी को वे कतई छोड़ने को तैयार नहीं थे। खबर सुनकर पुलिस सिविल अस्पताल में पहुँच गई थी जहाँ बच्चों का इलाज चल रहा था। अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ जमा हो रही थी वे नारेबाजी कर रहे थे। सभी ने शिक्षक राधेश्याम जी के घर जाकर उनका घेराव कर उन्हें सबक सिखाने का विचार किया। लोगों के इरादे भाँपकर पुलिस उनसे पहले ही राधेश्याम जी के पास पहुँच गई और उनसे कहा कि लोग बहुत आक्रोशित हैं आपकी जान को खतरा है। कुछ ही देर में वे यहाँ आ जाएँगे वे सब आपके साथ बहुत बुरा सलूक करेंगे। इससे यही बेहतर रहेगा कि हम आपको हिरासत में लेकर हवालात में बंद कर दें। राधेश्याम जी ने पुलिस की बात मान ली इस के अलावा और कोई चारा भी तो नहीं था। इधर पुलिस राधेश्याम जी को थाने ले गई। उधर जनता का एक बड़ा हुजूम राधेश्याम जी के घर पहुँच गया। सबकी एक ही माँग थी कि राधेश्याम को उनके हवाले कर दिया जाए। तब पुलिस के दो जवान जो वहाँ ड्यूटी कर रहे थे उन्होंने कहा कि उन्हें तो पुलिस गिर्फतार करके ले गई। तब लोग थाने की ओर रवाना हो गए जहाँ पुलिस ने आँसू गेस छोड़कर भीड़ को तितर बितर किया। भीड़ में उस होटल का मालिक रामप्रसाद भी था जो राधेश्याम जी को फाँसी की सजा देने की माँग कर रहा था। इधर पुलिस राधेश्याम जी से पूछताछ करने लगी। राधेश्याम जी ने कहा वही भोजन मैंने भी किया था मुझे तो कुछ हुआ नहीं। पुलिस को भी लग रहा था कि इस बीच कहीं कोई गड़बड़ हुई है। पुलिस ने सबसे पहले स्कूल जाकर वो टिफिन जब्त किया जिसमें वो भोजन सेम्पल के तौर पर रखा गया था। पुलिस ने उस भोजन को जाँच के लिए लेब में भेज दिया था। पुलिस ने जाँच तेज कर दी थी क्योंकि क्षेत्री विधायक दीपक वर्मा शिक्षक को बर्खास्त करने की माँग कर रहे थे। अब पुलिस अस्पताल की ओर बढ़ी वहाँ पहुँच कर पुलिस ने उन बच्चों से पूछा जो होश में आ गए थे। उन्होंने ही बताया कि मध्यान्ह भोजन तो हमने दो बजे कर लिया था तब कोई बीमार नहीं पड़ा था। इसके बाद चार बजे बच्चों की छुट्टी हो गई तब तक हम एकदम ठीक थे। रामप्रसाद जी ने हमें रुकवाकर लड्डू बँटवाए थे। जिन्हें सभी ने खा लिया था जिससे वे बीमार पड़े थे। इस बात से पुलिस भी सहमत हुई लेकिन उसके पास सबूत नहीं थे। बिना सबूत के पुलिस कैसे किसी के खिलाफ कार्यवाही कर सकती थी।अस्पताल में रोशनी को होश आ गया था। उसी ने बताया कि एक लड्डे अभी है जो उसके बैग में रखा है। पुलिस ने बैग से उसे जब्त किया। उसे भी जाँच के लिए भेज दिया गया था। कुछ दिनों बाद में जब रिपोर्ट आई तब पता चला कि बच्चे लड्डू खाकर ही बीमार हुए थे। अब पुलिस ने सेठ रामप्रसाद पर कार्यवाही करना शुरू कर दिया था।
शिक्षक राधेश्याम जी पूरे सात दिन बाद खुली हवा में स़ाँस ले पाए थे।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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