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कहानी: बुढ़ापे में कविता

शहर के चर्चित कवि राज वर्मा जी की उम्र सत्तर साल हो गई थी लेकिन कविता लिखते हुए अभी उन्हें दस साल हो गए थे इन दस सालों में उन्होंने बहुत कुछ हासिल कर लिया था ।बहुत कुछ हासिल कर नहीं पाए थे। उन्हें इसी बात का दुख था कि अगर उन्होंने तीस वर्ष पहले कविता लिखना शुरू किया होता तो आज हालात कुछ और होते।पर अब भी उनके पास बहुत कुछ था । 
दस वर्ष पहले जब वे रिटायर हुए थे। तो कुछ दिनों तक तो उन्हें बिल्कुल भो अच्छी नहीं लगा, । एक दिन शाम को जब अपने कुछ रिटायर्ड दोस्तों के साथ वे टहलने गए तब बातों के दौरान पता चला कि उनके साथ जो अभय तिवारी चल रहे हैं वे कवि भी हैं तथा कल वे टहलने नहीं जा सकेंगे कल वे कवि गोष्ठी में शामिल होगे।तब राज वर्मा ने कहा कि क्या मैं भी आपके साथ आयोजन में शामिल हो सकता हूँ। तो तिवारी जी बोले शौक से चलिए।
राज वर्मा पूरे साढ़े चार घंटे कवि गोष्ठी में रुके सभी कवियों की कवितादए सुनी बड़े प्रभावित हुए। घर आकर उन्हें भी कविताएँ लिखने की प्रेरणा मिली । फिर क्य था वे भी कलम उठाकर लिखने बैठ गए अगली मासिक कवि गोष्टी के लिए उनके पास चार कविता हो गई थीं इस  
गोष्टी में उन्होंने अपना रंग जमा लिया था। और आज तो वे शहर के एक अच्छे कवि के रूप जाने जाते थे।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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