स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ बहुउद्देशीय कार्यकरता नीरज कुमार का निलंबन बड़ी मुश्किल से टला था। अगर उस से थोड़ी सी चूक हो गई होती तो उसे निलंबित होने से कोई नहीं रोक सकता था। कुछ उसकी किस्मत ने भी साथ दिया आज जो सी एम ओ डॉ सुमित उससे नर्म लहजे में बात कर रहे हैं कभी उसने उनकी खूब डाँट खाई है। वो जब उनकी चाल उल्टी पड़ गई खुद उनके निलंबित होने की नौबत आ गई तब।
बात दो वर्ष पूर्व की है तब सी एम ओ डॉ सुमित कुमार शहर के जिला अस्पताल में नए नए आए थे। तब वो भी उनका स्वागत करने गया था। लेकिन इसके बाद घटनाएँ कुछ इस तरह घटीं की सी एम ओ साहब उससे खफा होते चले गए। यह तो स्वास्थ्य विभाग का छोटा से छोटा कर्मचारी अच्छी तरह जानता था कि कोई काम बिना लेनदेन के नहीं होता है। सी एम ओ मैदानी कर्मचारियों से सामान मँगाते रहते थे। किसी से पचास किलो शक्कर तो किसी से दो टिन तेल। सी एम ओ साहब के बेटे सौम्य का जन्मदिन था। सी एम ओ साहब ने नीरज से दस किलो मावा मँगवाया था जिसकी व्यवस्था नीरज ने कर दी थी। एक बार बीस लीटर दूध मँगवाया था वो भी उसने दे दिया था। तब तक सब कुछ सही चलता रहा, स्थिति तब बिगड़ी जब उसकी माँ नलिनी की तबियत ज्यादा खराब हो गई और वो उनकी देखभाल में लग गया था। तभी एक दिन सी एम ओ साहब ने खबर भिजवाई की उन्हें एक टिन शुद्ध देशी घी चाहिए इसकी जल्दी व्यवस्था करो साहब मुफ्त के मेल के आदि थे। इसलिए वे इनका पैसा नहीं देते थे। पिछली बार नीरज ने साढ़े तीन हजार रुपये का मावा खरीद कर भिजवाया था। इसके पहले सोलह सौ रुपये दूध में खर्च हो गए थे। घी बारह हज़ार रुपये का आ रहा था। इधर वो माँ की देखभाल में इतना व्यस्त रहा कि घी के लिए धन की व्यवस्था नहीं कर सका न साहब से मिलकर अपनी सफाई दे सका। साहब ने दो बार खबर भिजवाई पर दोनों ही बार वो साहब को देशी घी नहीं भिजवा सका क्योंकि उसके सारे पैसे माँ के इलाज में खर्च हो गए थे। ऊपर की कमाई कुछ हो नहीं रही थी। नीरज की चुप्पी को साहब ने अपना अपमान समझा। अब वे नीरज को परेशान करने का कोई न कोई बहाना ढूँढते रहते थे। बरसात के दिनों में मलेरिया की बीमारी फैली हुई थी। नीरज की ड्यूटी लार्वा की जाँच और सर्वे में लगाई गई थी। नीरज उसी सिलसिले में दयालपुर गाँव में अपनी ड्यूटी कर रहा था। तभी वहाँ सी एम ओ साहब आए, वे गाँव के दूसरे छोर पर ग्रामीणों से बात करने लगे उन्हें पता ही नहीं चला कि नीरज गाँव में ही ड्यूटी कर रहा है। उन्होंने जिन गाँव वालों से नीरज के संबंध में पूछा वे सब नीरज से खुन्नस रखते थे। सभी ने यही कहा कि उसे तीन महीने हो गए वो आए ही नहीं। डॉ सुमित ने पंचनामा बनवाया तथा उन की अनुपस्थित मान कर उन्हें सस्पेण्ड करने का प्रस्ताव डिप्टी डायरेक्टर अनूप सर के पास भिजवा दिया। इसकी भनक नीरज को लग गई और वह वहां पहुँचा तो पता चला कि अनूप जी तो उसके गाँव के प्रमुख रोशनलाल के बेटे हैं। वे भी नीरज को पहचान गए बोले निलंबन से बचना है तो कोई ठोस सबूत प्रस्तुत करो। तभी उसे याद आया कि उन्होंने उस समय एक वीडियो शूट किया था जिसे उन्होंने इंस्टाग्राम पर तभी डाल दिया था। उसमें तारीख और समय भी लिखा हुआ था। यह रील देखकर नीरज कुमार को बड़ी राहत मिली थी। अनूप सर बोले इतना ही काफी है तुम्हें सजा से बचाने के लिए। अब देखना में सी एम ओ साहब
का क्या हाल करता हूँ। वीडियो देखते ही सी एम ओ साहब की हालत बिगड़ गई थी। संचालक महोदय ने सी एम ओ को विडियो दिखाकर कहा इससे तो आपके निलंबन की स्थिति बन रही है। इसके बाद सी एम ओ ने फिर कभी किसी को परेशान नहीं किया था।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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