तकीपुर ग्राम के स्कूल के शाला प्रभारी रामदीन के सारे गिले शिकवे दूर हो गए थे ।आज उन्हें नई मोटर सायकिल मिल गई थी इसके साथ ही पुरानी खटारा मोटर सायकिल से उनका पीछा छूट गया था और ये सब क्षेत्रीय विधायक नवीन चन्द्र की बदौलत हुआ था जिन्हें वे गलत मानकर चल रहे थे।
रामदीन के साथ पिछले एक महीने से जो घटनाएँ घटीं उन्होंने विचलित कर दिया था । लेकिन आज वे बहुत ख़ुश थे उन घटनाओं का उन्हें कोई मलाल नहीं था हुआ ये था कि एक महीने पहले उनका तबादला चालीस किलोमीटर दूर के गाँव बरखेड़ा में कर दिया गया था जबकि यहाँ से उनकी कोई शिकायत नहीं थी वे सबके चहेते शिक्षक थे अच्छा पढ़ाते थे शाला का संचालन भी ठीक से कर रहे थे । उनकी बिटिया के विवाह की भी उन्हें चिंता थी बूढ़े माँ बाप थे तकीपुर से शहर दस किलोमीटर दूर था सड़क पक्की थी गाँव भी बड़ा था यहाँ स्वास्थ्य केन्द्र भी था वे तबादले पर जाना नहीं चाहते थे पर उनके पास ऐसा कोई जरिया नहीं था जिससे वे अपना तबादला रुकवा सकें। वे स्कूल में बैठकर यही सब सोच रहे थे कि स्कूल परिसर की सफाई करने वाला राजू आ गया। राजू को वे पन्द्रह सौ रुपये महीने अपनी जेब से परिसर की सफाई के देते थे शासन से इसके लिए कोई पैसा नहीं आता था पंचायत से भी एक रुपया तक इसके लिए नहीं मिलता था बच्चों से सफाई करा नहीं सकते थे। इसलिए हर माह वे इसका व्यय खुद ही वहन करते थे । राजू ने उन्हें उदास देखा तो इसका कारण पूछा सर के बताने पर राजू बोला सर यदि आपका तबादल रुक जाए तो रामदीन बोले इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है वो बोला मैं विधायक जी से बात कर बताऊँगा राजू पार्टी का कार्यकर्ता भी था। बोला कि कुछ खर्च करना पड़ेगा वे बोले कोई बात नहीं बस तुम मेरा तबादला रुकवा दो। उन्होंने इस संबंध में और भी कई लोगों से बात की थी सब यहो कह रहे थे कि एक लाख रुपये से कम में बात बनेगी नहीं हिस्सा ऊपर तक पहुँचाना पड़ता है वही बात दो दिन बाद राजू ने आकर कही सर आपका काम हो जाएगा पर एक लाख रुपये लगेंगे विधायक जी से मेरी बात हो गई है । सुनकर रामदीन जी को बड़ा धक्का लगा वे विधायक जी को निहायत ही ईमानदार समझते थे पहले तो उन्होंने मना कर दिया पर राजू ने कहा अच्छी तरह विचार कर बताना अभी हमारे पास दो दिन का समय है। रामदीन के सामने इतनी बड़ी रकम जुटाने की समस्या थी तभी उन्हें ख्याल आया कि अपनी खटारा मोटर सायकिल की जगह नई मोटर सायकिल खरीदने के लिए दो साल से वे पाई पाई जोड़कर बैंक में रख रहे थे। अगले माह दिवाली पर वे मोटर सायकिल खरीदने वाले थे मगर ये समस्या उससे बड़ी थी जिसका समाधान करना जरूरी था। उन्होने तय कर लिया कि ये पैसे राजू को दे दूँगा क्योंकि तबादला रुकवाना बहुत जरूरी था राजू की विधायक जी से अच्छी पहचान थी रामदीन ने सोचा तब तक खटारा मोटरसायकिल से ही काम चलाना पड़ेगा सर ने वो पैसे राजू को दे दिए राजू ने अपने वायदे के मुताबिक तीन दिन में उन्हें आर्डर लाकर दे दिया। जिसे पाकर वे गदगद हो गए थे। पैसा तो खर्च हुआ था पर काम हो गया उनके लिए यही बड़ी बात थी चौथे दिन जब राजू स्कूल में आया तो उसके पास नई मोदर सायकिल थी जो उसने कल शाम को शोरुम से खरीदी थी। पूरे एक लाख रुपये में। वे यही बोल सके भाई अपना अपना नसीब है बधाई हो राजू तुम्हे। सुनकर राजू बोला धन्यवाद सर जी । परसों जब सर मोटर सायकिल से स्कूल से घर की ओर जा रहे थे तो गाड़ी खराब हो गई उसको सुधरवाकर जब वो घर पहुँचे तो देखा कि खाना ठंडा हो गया है वे वैसा ही खाना खाकर सो गए उनकी पत्नी पहले ही उनका इंतजार करते हुए सो गई थी। कल भी उन्हें मेकेनिक के पास जाना पड़ा था। आज जब वे स्कूल से घर पहुँचे तो उन्हें उनकी पत्नी ने बताया मोटर सायकिल के शोरुम से कोई आदमी आया था जो आपको लेकर जाना चाहता था अभी वो फिर आने वाला है। वे कुछ समझ न पाए पर शोरूम पर चले गए वहाँ जाते ही मैनेजर सतीश ने उनका उठकर स्वागत किया। फिर कहा कि आप अपनी मोटर सायकिल पसंद कर लीजिए रामदीन बोले मैंने तो मोटर सायकिल आपसे खरीदने की कोई बात ही नहीं की सतीश बोला आपका पेमेन्ट आ चुका है आप तो बस माडल पसंद कीजिए वे बोले पहले ये बताओ ये पैसा किसने दिया है तब सतीश को मजबूरन बताना पड़ा की यह पैसा विधायक जी ने अदा किया है वे कह रहे थे कि ये पैसा आपका ही है जो आपने उनके पास जमा किया था वे समझे कि विधायक जी ने शायद उनके पैसे लौटा दिए हैं। और वे नई मोटर सायकिल लेकर घर आ गए सब बहुत ख़ुश थे शाम को उनका परिचित मोहन उनसे मिलने आया उसने उन्हें नई मोटर सायकिल की बधाई दी फिर सारी बात बताते हुए कहा कि आज सुब्ह विधायक जी ने राजू को बहुत डाँटा तथा चहा कि आइंदा कभी ऐसा किया तो तुझे जेल भिजवाकर ही दम लूँगा मैं तो तेरे लिए बहुत कुछ करना चाहता था। पर अब तू मेरी नजर से उतर गया है। राभदीन सर मेरे बारे में क्या सोच रहे होंगे एक ईमानदार की निगाह में गिरना बडी दुखद बात होती है। वो एक ईमानदार शिक्षक हैं मैने उनकी बहुत चर्चा सुनी है। यही सोचकर विधायक जी को बहुत दुख हुआ जब तक उन्होंने शो रूम पर पैसे जमा नही किए तब तक उन्हे जरा भी चैन नहीं मिला था । इस बात से रामदीन को आज बहुत ख़ुशी हुई थो।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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