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कहानी: पलायन

राकेश को बड़नगर में आए हुए अभी दो महीने ही हुए थे अभी एक महीने पहले  ही उसने अपनी बच्ची मोनिका का स्कूल में कक्षा 6 में एडमीशन कराया था और आज वो उसकी टी सी लेने स्कूल आ गया था स्कूल के प्रधान सोमेश जी ने कहा कि ऐसी क्या बात हो गई जो अभी एडमीशन कराया और टी सी लेने आ गए राकेश बोला सेठ से विवाद हो गया  और उन्होंने मेरा पूरा हिसाब कर नौकरी से निकाल दिया  और कहा कि अब देखता हूँ यहाँ कौन तुझे नौकरी पर रखता है। ऐसी स्थिति में अब  मेरे पास इस कस्बे को छोड़ने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा है। 
राकेश ने सोमेश जी  को सारी बात बताते हुए कहा कि  वो  अपने गाँव भेरूगढ़ में  किसान शिवप्रसाद के यहाँ ट्रेक्टर चलाता था मेरे पिताजी रामप्रसाद जी के पास चार एकड़ जमीन थी। उनके निधन के बाद जब मैं अपनी जमीन पर गया तो पता चला कि वो जमीन तो पिता  जी ने शिवप्रसाद जी को बेच दी है  शिवप्रशाद ने जमीन पर कब्जा भी कर लिया था।  राकेश को पता चला कि पिताजी  घीसी लाल जी ने दो साल पहले उसकी बहन रजनी की शादी में शिवप्रसाद जी से रुपये उधार लिए थे तथा अपनी जमीन गिरवी रख दी थी आर्थिक  स्थिति ऐसी बिगड़ी की उन्हें सँभलने का मौका नहीं मिला जमीन बेचते समय उन्होंने खेत गिरवी रख दिया था  दो साल का मूल और ब्याज इतना अधिक हो गया  जिसकी कीमत में घीसीलाल  को  जमीन की रजिस्ट्री शिवप्रसाद के नाम करना पड़ी यह बात उन्होंने  किसी को नहीं बताई थी वो तो उनके बाद जब जमीन पर बौनी करने  का समय आया तब राकेश ने सही बात का पता उसने  किसी को नहीं लगने दिया।  शिवप्रसाद से राकेश  की गर्मागरम बहस  भी हो गई थी  जिससे क्रोध में आकर  राकेश को  भी नौकरी से निकाल दिया था  इसी कारण  से वो अपना गाँव  छोड़कर आ गया था अब यहाँ भी सेठ से झगड़ा होने पर  राकेश को यह कस्बा छोड़ना पड़ रहा था।



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रचनाकार 
प्रदीप कश्यप 

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