कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद शिक्षक मणिकाँत को प्रमोशन मिला था और वे वापस रामनगर के हायर सेकेण्डरी स्कूल में व्याख्याता बनकर आए थे। इसके साथ ही जो उनसे खुन्नस रखते थे, किशोर नेता जी वे कमर की हड्डी टूट जाने के कारण पिछले छः महीने से बिस्तर से उठ नहीं सके थे। बिस्तर पर पड़े पड़े अपने गुनाहों को याद कर दुखी होते रहते थे। मणिकाँत दो बार उनसे मिलने गए थे दोनों बार किशोर नेताजी ने उनसे रोते हुए माफी माँगी थी।
यह घटना पँद्रह वर्ष पूर्व की है जब किशोर नेता जी ने मणिकाँत जी को बिना किसी कसूर के निलंबित करा दिया था। हुआ यह था कि उस समय किशोर जी सत्ताधारी पार्टी के जिला संगठन मंत्री थे साथ ही विधायक प्रतिनिधी भी। क्षेत्रीय विधायक रामकिशन की चापलूसी करने पर उन्हें यह पद मिला था। बड़े नेताओं से निकटता के कारण वे बड़ी ठसक से रहते थे। अधिकारी कर्मचारी सब उनसे दबकर रहते थे। केवल मणिकाँत ही ऐसे थे जो किशोर नेताजी को ज्यादा महत्व नहीं देते थे। एक बार उनकी किशोर जी से इस बात पर तीखी बहस हो गई थी। वे उनके खेत में काम करने वाले हाली की आठवीं पास की मार्कशीट उनसे बनवाना चाहते थे। मणिकाँत जी ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। बोले जब वो इस स्कूल में कभी पढ़ा ही नहीं उसका कोई रिकाॅर्ड स्कूल में नहीं है तो मैं कैसे ये गलत काम कर सकता हूँ। इस बात पर किशोर नेताजी खासे नाराज हो गए धमकाते हुए मणिकाँत जी से कह के गए बहुत रह लिए रामनगर में अब अपना बोरिया बिस्तर बाँध लो मैं तुम्हें अब यहाँ नहीं रहने दूँगा। तुम्हारा तबादला कराए बिना चैन नहीं लूँगा मणिकाँत जी एक लोकप्रिय तथा आदर्श शिक्षक थे उनका रामनगर में काफी मान सम्मान था। ट्रांसफर लिस्ट निकलने वाली थी। किशोर नेताजी ने उस लिस्ट में मणिकाँत जी का नाम जुड़वा दिया था। लेकिन दो दिन बाद जब लिस्ट में मणिकाँत जी का नाम नहीं आया तो किशोर जी तिलमिला गए उन्होंने उच्च अधिकारी उमेश जी से तीखे लहजे में बात की तो उमेश जी बोले जनपद पंचायत उपाध्यक्ष दिनेश मोहन जी ने मणिकाँत जी का नाम लिस्ट से हटवा दिया था। यह बात सुनकर किशोर जी कसमसाकर रह गए क्योंकि दिनेशमोहन जी पार्टी के सीनियर वरिष्ठ नेता थे तथा किशोर जी के मुखर विरोधी भी। लेकिन किशोर नेताजी ने ठान ली थी मणिकाँत जी को स्कूल से हटवाने की। उन्होंने अधिकारियों को कई बार स्कूल निरीक्षण के लिए भेजा उन्हें पूरे समय मणिकाँत जी विद्यालय में उपस्थित मिले। जब बात नहीं बनी तो किशोर जी ने दूसरा तरीका निकाला उन्होंने एक पेरेन्टस को स्कूल आठवीं की अंकसूची लेने भेजा। वो बालक दो साल पहले स्कूल छोड़ चुका था। मणिकाँत बोले वो अपनी अंक सूची तो दो साल पहले ही ले जा चुका है। पर मणिकाँत जी ने कहा दूसरी अंक सूची बन तो जाएगी पर उस पर डुप्लीकेट लिखना पड़ेगा। इस बात से वो पेरेण्टस उन पर भड़क गए और ओरिजनल मार्कशीट देने की बात करने लगे। अन्यथा आगे शिकायत करने की चेतावनी भी वो पेरेण्ट दे गया था। इस का लाभ किशोर नेताजी ने उठाया उन्होंने उस पेरेण्ट से मणिकाँत की शिकायत दर्ज करा दी जिस पर फौरन कार्यवाही हुई। परिणाम स्वरूप मणिकाँत जी को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के कारण उनको वहाँ से हटाकर दूसरे स्कूल में भिजवा दिया गया। छः महीने के बाद जब उनको चार्ज शीट नहीं मिली, इस पर वे बहाल तो हो गए किन्तु उन्हें रामनगर से हटा दिया गया था। यही तो किशोर नेताजी चाहते थे। मणिकांत जी को अकारण निलंबित होने की यह सजा मिली की उनको प्रमोशन की सूची से हटा दिया गया। हारकर मणिकाँत जी ने अदालत में याचिका दायर कर दी। जाँच के बाद सब झूठ निकला। अदालत ने मणिकाँत जी को उनकी योग्यता तथा वरिष्ठता के आधार पर प्रमोट करने के आदेश विभाग को दिए। इस आदेश के पारित होने के बाद विभाग को मणिकाँत जी को पदोन्नति देना पड़ी। उनको वापस रामनगर पदोन्नत कर भैज दिया गया। यह आर्डर देखकर किशोर तमतमा उठे और उन्हें हटाने की साजिशें रचने लगे। इसी काम से फुर्सत होकर किशोर जी जब मोटरसायकिल से रामनगर लौट रहे थे तब उनकी मोटरसायकिल एक कार से टकरा गई। जिसके कारण किशोर जी की ये हालत हुई थी। और अब वो पछतावा प्रगट कर रहे थे और लोगों से माफी माँग रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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