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कहानी: आरक्षण

रामाखेड़ी एक बड़ा गाँव था उसमें दलित तबके के दो मोहल्ले थे दोनों की स्थिति में जमीन आसमान का अंतर था एक तबके के लोग जहाँ सभी सरकारी नौकरी में थे तथा बडे बड़े पदों पर थे वहीं दूसरे तबके के लोग आज भी घोर गरीबी के बीच रह रहे थे ।जो उन्नत तबके वाला मोहल्ला था उस में क्षेत्रीय विधायक राधाकिशन मालवीय का परिवार भी रहता था विथायक जी के बड़े भाई राम किशन आज उस खबर को सुनकर बहुत दुखी थे जिसमें यह कहा गया था कि एस सी एस टी में भी क्रीमीलेयर को हटाकर आरक्षण दिया जाना चाहिए इससे वे सब असहमत थे।
जो पिछड़ा दलित मोहल्ला था उसमें क्रीमी लेयर वाला कोई नहीं था जबकि उनमें,भी बहुत पढ़े लिखे युवक थे पर उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिला था उसी तबके के एक वृद्ध घीसूलाल कह रहे थे हम तो पीढ़ियों से साफ सफाई का काम करते आए हैं सबसे दलित हम ही हैं आरक्षण के बाद भी हमें उसका लाभ नहीं मिला है दूसरी और जो बुनकर काम करते थे जो शिल्पकार थे मिस्त्री थे उनमें से अधिकाँश सरकारी नौकरियों में ऊँचे पद पे हैं पहले भी उनकी आर्थिक स्थिति हमसे अच्छी थी जब वो अपने बच्चों को पढ़ा रहे थे तब हम जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे थे हमें तो अगर पंचायत या नगर पालिका में सफाई कर्मी की नौकरी मिल जाती थी तो हमारे लिए यही बहुत बढ़ी बात थी आज जब हमारे बच्चे पढ़ लिख गए तो उनके लिए नौकरी नहीं है सफाई कर्मी किशोरीलाल बोले मेरा लड़का पढ़ लिखा होने के बाद भी सफाई का कार्य कर रहा है सारी नौकरी क्रीमीलेयर वाले तबके के बच्चों को मिल रही हैं क्योंकि उनके पास पैसे हैं वे अपने बच्चों को बड़े स्कूलों में पढ़ा रहे हैं मँहगी कोचिंग दिलवा रहे हैं जबकि हमारे बच्चों के पास तो इतने पैसे भी नहीं हैं कि वह किताबें खरीद सकें परीक्षा देने के लिए बड़े शहर में जाने का किराया ही बहुत मुष्किल से जुटा पाते हैं । घीसी लाल की बात सुनकर उम्मेदसिंह बोला हमारे तबके का भी यही हाल है कहने को तो हम अनुसूचित जन जाति वर्ग में आते हैं पर हमारे यहाँ भी बहुत से पढ़े लिखे युवक हैं जो बेकार हैं और मजदूरी कर के जीवन यापन कर रहेंहैं हमारे अलावा उन्नत समूह वाले सब ऊँचे पदों पर हैं। वे सब के सब क्रीमी लेयर में हैं आरक्षित वर्ग की सारी नौकरियों पर उनका कब्जा है। घीसीलाल बोले अब सरकार का इस तरफ ध्यान गया है इससे हो सकता है आगे चलकर हमारे बच्चों को इसका लाभ मिल जाए अभी तो हमारे साथ वे ही भेदभाव कर रहे हैं जो क्रीमीलेयर वाले हैं । तभी बेरोजगार युवक घनश्याम बोला कुछ नहीं होने वाला वो हमसे ज्यादा पावरफुल हैं सारी बड़े पद उनके पास हैं उनमें कई सांसद विधायक और मंत्री तक हैं वो इसे कभी लागू नहीं होने देगे वे ही मलाई खाते रहेंगे जो अब तक मलाई खाते रहे हैं घनश्याम की बातों ने सबको निराश कर दिया था घीसीलाल बोले बेटा हमारी उम्र तो पूरी हो गई इस लंबी उम्र में हमने तो कुछ भी बदलते नहीं देखा हमारे तबके के लोग तो आज भी वही काम कर रहे हैं जो पीढ़ियों से हमारे बुजुर्ग करते रहे हैं।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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