कमला ने दस वर्ष पहले आगरा मुंबई राजमार्ग पर जो छोटा सा देशी अंदाज नाम से जो ढाबा खोला था आज वो दस एकड़ में फैला विशाल होटल बन गया था होटल का अंदाज वही देशी था उसमें काम करने वाले सब देशी अंदाज में रहते थे महिला कर्मचारी लँहगा लुगड़ा पहनती थीं तथा पुरूष धोती बंडी और सिर पर पगड़ी रहने के लिए जो कमरे थे वे भी देशी अंदाज में बने थे चूल्हे पर खाना मिट्टी के बर्तन में बनता था मिठाइयाँ भी देशी ही मिलती थी उनके यहाँ के गुड़ की चाशनी में पगे बेसन के सेव बड़े प्रसिद्ध थे। देशी विदेशी लोगों की उनके यहाँ भीड़ लगी रहती थी। एक छोटे से गाँव हर्रा खेड़ा से आई कमला आज एक सफल उद्यमी बन चुकी थी।
कमला ठेठ ग्रामीण महिला थी उसकी शादी जब हरिसिंह से हुई तब वो अठारह वर्ष की थी और हरिसिंह इक्कीस वर्ष का हरिसिंह शहर में रहकर पढ़ाई कर रहा था बी बी ए का उसका अंतिम वर्ष था वो अभी शादी नहीं करना चाहता था पर माँ बाप की जिद के आगे उसकी एक न चली शादी के बाद जब वो कमला से मिला तो उदास हो गया कमला का देहाती रूप उसे बिल्कुल पसंद नहीं आया था उसकी गाँव की बोली भी उसे अखर रही थी उसने तय कर लिया था कि कमला को मैं कभी शहर में अपने साथ नहीं रखूँगा जबकि कमला बिल्कुल अनपढ़ नहीं थी गाँव के सरकारी स्कूल से उसने आठवीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की थी पर हरिसिंह के लिए इसके कोई मायने नहीं थे। बी बी ए करने के बाद उसके माता पिता ने उसे आगे पढ़ाने से इंकार कर दिया जबकि वो होटल मेनेजमेंट में एम बी ए करना चाहता था उसे अच्छे संस्थान में प्रवेश भी मिल रहा था पर पैसे की समस्या थी ऐसे में कमला आगे आई उसने अपने पूरे जेवर बेचकर हरिसिंह की फीस भरी तथा एडमीशन कराया। इसके बाद उसने खेतों में मजदूरी की कपड़े सिले छोटी सी किराने की दुकान चलाई पर हरिसिंह को पैसे की कमी नहीं आने दी। पर हरिसिंह ने उसका अहसान नहीं माना एम बी ए करने के बाद उसे होटल मेनेजर की नौकरी भी मिल गई पर वो कमला को अपने साथ शहर नहीं ले गया था। कमला के जिद करने पर वो उसे शहर तो लाया पर किसी से उसने उसे अपनी पत्नी के रूप में नहीं मिलाया उसकी एक परिचित शहरी महिला से उसने कमला परिचय कराते हुए कहा कि ये हमारी नौकरानी है जो गाँव से शहर घूमने आई है कमला ने यह बात सुन तो ली पर कुछ बोली नहीं दूसरे दिन जब कमला तैयार होकर आधुनिक परिधान में हरिसिंह के सामने आई तो उसे देखकर वो चकित रह गया कमला ने इंग्लिश में उससे बात की इस बार हरिसिंह उससे बहुत प्रभावित हुआ लेकिन इस बार कमला उस से दूरी बनाकर रही हरिसिंह अपनी महिला मित्रों के साथ घूम रहा था अचानक उसका पैर फिसला और वह गहरे पानी में गिर गया न उसे तैरना आता था न उसकी महिला मित्रों को, उसके गिरते ही वे शोर मचाने लगीं पर उधर उनके अलावा और कोई नहीं था थोड़ी दूर पर कमला अकेली बैठी हुई थी शोर सुनते ही वह चंद सेकंड में सारी बात समझ गई उसने एक पल गँवाए बिना पानी में छलाँग लगा दी उसे अच्छी तरह तैरना आता था हरिसिंह की उसने जान बचा ली थी उसकी महिला मित्र शर्मिंदा थीं उनके कारण ही ये दुर्घटना घटी थी वो ही अपनी जिद से हरिसिंह को यहाँ तक लाई थीं वो जब जाने के लिए अपनी टेक्सी पर आए तो देखा कि ड्राइवर शराब के नशे में धुत पड़ा हुआ था उसे खुद का ही होश नहीं था और कह रहा था बैठो साहब कुछ नहीं होगा मैं अच्छे से ड्राइविंग करूँगा पर किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी इधर दिन डूबता जा रहा था किसी को इतनी अच्छी ड्राइविंग नहीं आती थी कि वे बड़ी टेक्सी चला सकें तब कमला ने मोर्चा सँभाला और सबको बिठाकर इतनी अच्छी ड्राइविंग की कि सभी चकित रह गए हरिसिंह को तो विश्वास ही नहीं हुआ जबकि कमला ने गाँव में खूब ट्रेक्टर चलाया था पटेल साब की जीप भी वो चलाती रही थी इसलिए उसे ड्राइविंग का अभ्यास था फिर उसमें आत्मविश्वास कूट कूट कर भरा था। मुकाम पर आने के बाद सब अपने अपने घर चले गए थे हरिसिंह अब कुछ झेंप रहा था जबकि कमला सहज होकर बात कर रही थी कमला मजबूत मनोबल वाली सशक्त महिला थी। अगले दिन फिर वह अपने वही देशी परिधान में थी जो हरिसिंह को बुरा लग रहा था क्योंकि वो सूट बूट में था। कमला ने कहा कि अब मैं गाँव जाने वाली नहीं हूँ यहीं तुम्हारे साथ रहूँगी उसकी बात सुनकर हरिसिंह का दिमाग चकरा गया फिर कुछ विचारकर बोला ठीक है उसने शहर की पिछड़ी बस्ती में एक मकान किराये से लेकर उसे वहाँ ले आया कमला को उसने उस मकान में रख तो दिया पर वो उससे मिलने बहुत कम आता था वो कहीं और रहता था कमला हार मानने वालों मे से नहीं थी उसने हाईवे पर एक जगह किराये पर लेकर देशी अंदाज होटल खोल ली उसके पास जो जमा पूँजी थी वो उसने उसमें खर्च कर दी थी उधर से अनेक विदेशी टूरिस्ट गुजरते थे उन्हें देशी खाना अच्छा लगता था चूल्हे की आँच पर सिकी बाजरे की रोटी बथुआ का साग मक्का की राबड़ी उनको अपूठे स्वाद वालोमी लगती वो गाँव से देशी घी मँगाती थी उसमें रोटी चिपड़ कर देती कंडे की आँच में बाटी सेंकती मालवा के दाल बाफले लड्डू तो उसके कमाल के स्वाद वाले थे उसकी देशी अंदाज वाली होटल चल निकली कमला ने अपना पहनावा नहीं बदला था वही लँहगा लुगड़ा चाँदी के जेवरी पाँवों में चाँदी के कड़े चाँदी के बाजूबंद चाँदी की कर धनी और माथे पर सोने का बोर गवे में हँसली और बोली मीठी मालवी इस अनोखे होटल ने शीघ्र ही अपनी पहचान बना ली थी कमला ने इस होटल का विस्तार दस एकड़ में कर दिया था रहने के लिए देशी अंदाज के देशी खपरेल वाले कमरे थे नौकर चाकर सब देशी परिधान में रहते थे कमला की होटल पर शहर के अमीर लोग भी आते थे कमला ने इन दस सालों में विभिन्न शहरों में चौबीस ऐसी होटल खोल ली थीं। कमला अब करोड़ों रुपये का व्यापार कर रही थी एक आठवीं पास महिला इतनी आगे बढ़ गई थी जबकि हरिसिंह अब भी डेढ़ लाख रुपये महीने की सैलरी में एक औसत दर्जे के होटल का मैनेजर था उसने भी देशी अंदाज वाले होटल का नाम सुना था पर उसकी मालकिन कमला होगी इसका उसे अंदाजा भी नहीं था पिछले आठ वर्षों से उसने कमला की खोज खबर भी नहीं ली थी वो अपने कुछ विदेशी मेहमानों को उनके आग्रह पर देशी अंदाज वाले होटल में लंच कराने आया था वहाँ उसने भी दाल बाफले लड्डू खाए थे जिसके स्वाद की वो भी तारीफ किए बिना नहीं रह सका था। उसने जब होटल मालिक के चैंबर से कमला को निकलते देखा तो असमंजस में पढ़ गया कोई कह रहा था यही हैं इस होटल की मालकिन वो कमला के पास गया और बोला क्या ये सच है कि आप ही इस होटल चैन की मालिक हैं कमला बोली इसमें कोई शक है क्या मेरे होटल के शेफ की तनख्वाह चार लाख से कम नहीं है हरिसिंह हकलाते हुए बोला मैं तो मात्र डेढ़ लाख रुपये महीने में अभी भी एक साधारण से होटल का मैनेजर हूँ कमला बोली अपने अपने भाग्य की बात है मेरा घर नहीं देखोगे हरिसिंह बोला एक दिन मैं वहाँ गया था पर पता चला कि तुम वर्षों पहले उसे छोड़ चुकी हो फिर एकाएक उसे याद आया इस शहर का जो सबसे मँहगा घर है कहीं वो तुम्हारा तो नहीं मैने सुना है वो इस होटल ग्रुप की मालकिन का घर है कहीं वो आप ही तो नहीं हैं कमला बोली तुमने ठीक सुना है वो घर मेरा ही है क्या ख्याल तुम कहो तो कल ही तुम्हारा होटल खरीद लूँ फिर तुम भी मेरे कर्मचारी बन जाओगे हरिसिंह को अपनी औकात अच्छी तरह पता चल गई थी वो बोला सॉरी मेडम अगर कोई गलती हो गई हो तो माफ कर देना मेरे मालिक से मेरी शिकायत मत करना वरना वो मुझे नौकरी से निकाल देंगे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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