शहर से लगे ग्राम बमूलिया के नेता रामभरोसे का दलित शिक्षक गोकुल दास से विवाद बहुत मँहगा पढ़ा था। उनकी पूरी राजनीति खत्म हो गई थी। तीन महीने तक तो उन्हें जमानत ही नहीं मिली थी। केस इतना मजबूत था कि जिसमें उनको सज़ा मिलना निश्चित था।
घटना आज से एक वर्ष पूर्व की है रत्नाखेड़ी गाँव के रहने वाले शिक्षक गोकुल दास जो दूसरे गाँव में पदस्थ थे उन्होंने अपना तबादला बमूलिया के सरकारी स्कूल में करा लिया था। उनके आने से राभभरोसे बिल्कुल खुश नहीं थे वे सामान्य वर्ग से थे एक दलित शिक्षक की पदस्थापना को वे सहन नहीं कर पा रहे थे। जबकि रामभरोसे सत्ताधारी पार्टी के नेता थे। जिले की राजनीति में उनका काफी नाम था। लेकिन गोकुलदास से उन्हें शुरू से चिढ़ थी। एक दिन जब रामभरोसे स्कूल में आए तो प्रधानाध्यापक जी ने तो कुर्सी से उठकर उनका स्वागत किया अभिवादन किया पर गोकुलदास ने उन्हें नजर अंदाज कर दिया। जिससे रामभरोसे उनसे मन ही मन में नाराज हो गए उस दिन गोकुल दास स्कूल में कुर्ता पजामा तथा जाॅकेट पहनकर स्कूल आए थे। इसी को मुद्दा बनाकर रामभरोसे जी ने गोकुल दास की अच्छी खिंचाई कर दी। कहा ऐसे कपड़े पहनकर मत आया करो ये नहीं चलेंगे यहाँ नेतागिरी करने आए हो या पढ़ाने गोकुल दास ने नरम लहजे में कहा- इन कपड़ों में ऐसा क्या है जिन्हें पहनने का मुझे अधिकार नहीं है। इस पर रामभरोसे बोले मैं कुछ नहीं जानता कल से आप कुर्ता पजामा पहनकर स्कूल नहीं आओगे। लेकिन हुआ उल्टा गोकुलदास दूसरे दिन भी कुर्ता पजामा जाॅकेट पहनकर आए इस पर फिर उनकी रामभरोसे नेताजी से बहस हो गई। इस बार गोकुल दास छिपा हुआ केमरा लाए थे। रामभरोसे ने गोकुल की जाति का उल्लेख अपमान जनक तरीके से किया था। उनकी जाति को लेकर अपमान भी किया था। रामभरोसे तो चले गए इधर गोकुलदास जी ने आधे दिन की छुट्टी ले ली और वे कद्दावर दलित नेता रामनाथ से मिले। रामनाथ दलित महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष थे। उन्होंने गोकुल दास जी को जिला इकाई का अध्यक्ष मनोनीत कर दिया था। गोकुलदास जी से रामनाथ जी बोले अब आप रोज कुर्ता पजामा पहनकर स्कूल जाओ, देखता हूँ आपको कौन रोकता है। गोकुलदास जी का रोज कुर्ता पजामा पहनकर स्कूल आना नागवार गुजर रहा था। उनकी हिदायत का जब गोकुल दास पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा तो रामभरोसे एक दिन बी ई ओ सोलंकी सर को लेकर आए। सोलंकी सर ने गोकुल दास जी को कुर्ता पजामा पहनने पर खूब लताड़ लगाई तथा एक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश जारी कर दिया। इस पर गोकुलदास बड़े दलित नेता रामनाथ के पास आए और सारी वीडियो रिकार्डिंग उन्हें दिखाई। इसे देखकर रामनाथ का चेहरा गुस्से से तमतमा गया। उन्होंने जिले के सबसे वरिष्ठ अधिकारी को ज्ञापन देकर गोकुल जी की रुकी हुई वेतन वृद्धि बहाल करने की माँग की तथा जातिगत अपमान करने के कारण संबंधित पर एफ आई आर दर्ज करने की माँग की अन्यथा तीन बाद आंदोलन करने की चेतावनी दी। जब ज्ञापन का असर नहीं हुआ तो शहर में दलितों की भीड़ एकाएक बढ़ गई। पंद्रह हजार लोगों ने एकत्रित होकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया भीड़ देखकर प्रशासन भी सक्रिय हो गया। बी ई ओ को सस्पेण्ड किया गया तथा रामभरोसे पर एफ आई आर दर्ज कराई गई। पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से वंचित कर दिया। तथा उन्हें थाने में बंद कर दिया गया। इस संबंध में कोर्ट में याचिका भी दे दी गयी थी। कोर्ट ने माना था कि कुर्ता पजामा पहनने में कोई बुराई नहीं है। गोकुल दास जी तबसे ही कुर्ता पजामा पहनकर स्कूल आ रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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