सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कहानी: बेवफ़ाई

सुरेश जी की आयु पैंसठ वर्ष की हो चुकी थी  वे अपने बेटे बहू और पोती के साथ  सुखपूर्वक रह रहे थे उनकी ऑटोमोबाइल की एजेंसी एवं शोरूम तथा वर्कशॉप का काम उनका बेटा गौरव देख रहा था। वे तो अब कभी कभी ही शोरूप एवं एजेन्सी पर जाते थे। आज वे जब शाम को घर आए तो उनकी इच्छा थी बहू रुपाली से खिचडी बनवाकर खाने की लेकिन वे कह,नहीं पाए पर  जब,वे खाने बैठे तो खिचड़ी देखकर उन्हें सुखद आश्चर्य हुआ। बहू से इतना ही बोले बेटी  तूने मेरे मन की बात कैसे जान ली रूपाली जो कॉलेज में म्यूजिक की प्रोफेसर थी बोली पापा बचपन में मेरे पिता का निधन हो गया था भाँ ने  बड़े कष्ट उठाकर मुझे पाला था ।आपके बेटे गौरव से शादी के बाद आपने मेरे पिता की कमी पूरी कर दी  तबसे मैंने इस घर को मायके की तरह ही समझा कभी मुझे लगा ही नहीं की मैं ससुराल में हूँ। विगत सात वर्षों से यहाँ रह रही हूँ इसलिए यह समझने लगी हूँ कि आपको कब कैसा खाना पसंद है। सुनकर सुरेश जी भावुक हो गए बोले बेटी सदा सुहागन रहो और जुग जुग जियो।  रूपाली बोली  जीवन में  आपका वरद हस्त हमेशा हमारे सिर पर रहे।
सुरेश जी पच्चीस साल पहले पत्नी कमली की बेवफ़ाई के कारण मौत के मुँह में जाने से बचे थे । कमली से तलाक होने के बाद उन्होंने कभी शादी नहीं की थी अपना  सारा जीवन  गौरव की परवरिश में लगा दिया था।
सतीश जी पुरानी यादों में खो गए थे। कमली से जब उनका विवाह हुआ तब वे  कंपनी में सहायक लेखापाल की नौकरी करते थे वेतन  तो  कम था पर उनका गुजारा चल जाता था कमली के पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। कमली का बचपन  अभावों में बीता था। सुरेश जी के साथ रहकर वो काफी खुश थी  पर धीरे धीरे उसकी महत्वाकांक्षा बढ़ती गई  वो कहती कब तक किराये के मकान में रहेंगे अपना भी मकान होता तो सुख से रहते। सुरेश कमली को दिल षे चाहते थे  उन्होंने उससे कहा रये सब दस से पाँच तक की नौकरी से संभव थोड़ी होगा इसके लिए मुझे दिन रात मेहनत करना पड़ेगी तब कमली ने कहा तो करो न दिन रात मेहनत घर पर कौन से पहाड तोड़ते हो  तब गौरव दो साल का था । सुरेश जी ने दो साल दिन रात मेहनत की अपनी सी ए की परीक्षा फिर से दी और उसे पास किया अपनी कंपनी खोली और कमाई मैं जुट गया न दिन का चैन देखा न रातों की नींद आखिर शादी की  छठी साल गिरह पर सुरेश जी ने कमली के नाम शानदार एच आई जी डुप्लेक्स खरीद  कर  उपहार में दिया और उसके जन्मदिन पर चमचमाती नई कार गिफ्ट की। अब सुरेश के पास सब कुछ था बस वक्त ही नहीं था वे रात को भी देर रात तक घर पर काम करते रहते थे। दूसरी ओर कमली के पास वक्त ही वक्त था उसका दिन काटे नहीं कटता था घर में चार नौकर थे। इसलिए उसके पास काम भी नहीं था इसलिए वो अब किटी पार्टी में जाने लगी थी। वहीं उसकी भेंट रोहन से हुई। रोहन ऐसा युवक था जो अपनी बोली से सबको प्रभावित कर लेता था । उसने कमली को मालदार देख उससे निकटता बढ़ाई कमली उसकी बातों में आ गई पहले वो सुरेश जी की शिकायत दबे स्वर में करती थी पर रोहन के साथ वो खुलकर सुरेश जी की बुराई करने लगी थी । सुरेश को कमली के चाल चलन देख पड़ोसी दीपक ने  सुरेश जी को जानकारी देकर आगाह किया।सुरेश जी 
को कमली पर शक पहले ही था। उसने यह बात अपने मित्र महेश को बताई।  महेश ने एक गुप्त  सी सी  कैमरा उसे देकर कहा जब तक पुख्ता सबूत न मिले कमली से कुछ  कहना मत। दो दिन बाद जो सी सी टी वी के फुटेज उन्होंने देखा तो  उनके होश फा गख्ता हो गए। कैमरे में कमली अपने बेटे गौरव की कई बार बेरहमी से पिटाई करती नजर आई  दूसरे फुटेजा में देखा कि कमली और रोहन सुरेश को राह से हमेशा के लिए हटाने की बात कर रहे थे।। गौरव को अनाथालय में छोड़कर वे आपस में  शादी करने की बात कर रहे  थे।  एकाएक उसे लगा कि आज उसकी और उसके बेटे की जान को खतरा है। वह फौरन घर पहुँचे तो देखा कि कमली गौरव को लेकर निकल ही रही थी। तो  सबसे पहले सुरेश जी ने  गौरव को  अपनी   गोद में लिया तथा कहा  गौरव कहीं  नहीं जाएगा। इस विषय पर उनकी काफी बहस हुई पर  सुरेश जी ने गौरव को कभी अपने से अलग नहीं किया। इससे वो सुरेश पर झल्ला गई  और बोली मैं पुलिस थाना जा रही हूँ मुझे तुम्हारे साथ नहीं  रहना है ।  कमली के पीछे सुरेश जी भी आ गए। थाने में जब उन्होंने  सी सी फुटेज दिखाए तो  पुलिस ने फरियादी कमली के खिलाफ  एफ आइ आर दर्ज कर ली थी। कमली खिसिया कर जाना चाह रही थी पर  पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया ।वो पाँच दिन हवालात में बँद रही।  तब सुरेश जी ने ही उसे छुड़वाया गौरव को सुरेश के साथ रखने की ऊनुमति जज ने दे दी फिर कमली और सुरेश जी  का तलाक हो गया।  डूप्लेक्स नगदी और जेवर कमली ने अपने पास रख लिए सुरेश जी किराए के मकान में रहने पहुँच गए। कमली से अलग होकर सुरेश जी अपने  बेटे को सम्हाला  तथा तीन साल में अपना घर पहले बाले  घर से अच्छा बना लिया। उधर तीन सालों में   कमली और रोहन ने वो मकान बेच दिया।  सारे जेवर बेच दिए।  जो लाखों रुपये सुरेश ने कमाकर दिए  थे वे भी  खर्च कर दिए थे।कमली थोड़ी पढ़ी लिखी  थी इस लिए उसने  नौकरी  कर ली  थी। कहाँ तो  सुरेश कमली को घर बिठाकर कमाई दे रहा था  और कहाँ  अब वो  खुद नौकरी कर रही थी तथा रोहन  का पेट भर रही थी।
*****
रचनाकार
प्रदीप कश्यप


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

व्यंग्य : जीते जी रोटी को तरसाया मरने के बाद श्राद्ध

आज कल सोलह श्राद्ध का समय चल रहा है कई जगह पर श्राद्ध के आयोजन हो रहे हैं बहुत सारे लोगों को भोजन कराया जा रहा है अपने पितरों के श्राद्ध में लोग हज़ारों रुपये भी खर्च कर रहे हैं उनमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने जीते जी अपने बूढ़े माँ बाप की खबर तक नहीं ली और अब उनके मरने पर उनके श्राद्ध पर बड़ा आयोजन कर रहे हैं उनकी तस्वोर पर माला चढ़ा रहे हैं। ऐसे लोगों में शहर के रविकांत जी भी हैं उन्होंने अपने स्वर्गीय माता पिता की तिथि पर भव्य आयोजन किया था खूब पकवान खिलाए गए थे खूब दान किया गया था पर उन्होंने अपने माता पिता को जीते जी बहुत दुख दिए थे। उनके पिताजी सत्तासी वर्ष के थे माँ पिच्यासी वर्ष की दोनों अपने पुराने घर में रहते थे उनका बेटा रविकांत उनकी कभी खोज खबर नहीं लेता था बेटी विदेश में दामाद के साथ रह रही थी। वे दोनों ही एक दूसरे का ख्याल रख रहे थे एक दिन रविकांत जी के पिताजी का दुखद निधन हो गया तब रविकाँत घर?आया पिताजी की उत्तर क्रिया करने के बाद चला गया रविकाँत की माँ अकेली रह गई थीं वे सीधी सरल थी जबकि बेटा बहू चपल चालाक बेटे बहू ने बातों में लेकर उनकी सारे सोने चाँदी के जे...

व्यंग्य: चापलूसी से मिली उपलब्धियाँ।

चापलूसी से मिली उपल्बिधियों का जब लोग बड़े गर्व से बखान कर के फूले नहीं समाते । तब खुद्दार टाइप के लोग उन पर अधिक ध्यान नहीं देते पर कुछ चापलूस टाइप के लोग उन्हें बड़ी हसरत से देखते हैं वे उनके जैसा बनकर वे सब उलब्धियाँ हासिल करने के ख्वाब देखने लगते हैं। ऐसे ही एक सेवानिवृत कर्मी अपनी उपलब्धियों का बखान कर रहे थे कुछ गौर से सुन रहे थे कुछ ऊब रहे थे वहीं सुरेश जी उनकी बात सुनकर मन ही मन मुस्का रहे थे क्योंकि उन्हें उनकी असलियत पता थी। किसी ने उन से पूछ लिया आप भी सतीश जी के विभाग में कार्यरत थे आपकी और इनकी नौकरी की शुरूआत एक ही पद से हुई थी फिर ये इतनी तरक्की क्यों कर गए जरा इस विषय में कुछ बताएँगे वे बोले अगर हम बताएँगे तो ये नाराज हो जाएँगे लोगों ने कहा कुछ भी हो आप तो बताइए वे बोले तो सुनो। नौकरी से पहले हम मित्र थे तब हमें मालूम नहीं था कि ये खुदगर्ज टाइप के चापलूस इंसान हैं। हम दोनों की पोस्टिंग फील्ड में हुई थी। हम किसी की चापलूसी नहीं करते थे और अपने काम से मतलब रखते थे। जबकि इन्होंने मुख्य कार्यालय में अपनी चापलूसी से घुसफैठ कर ली थी कहीं जातिवाद कहीं क्षेत्रवाद कही भाषाव...

व्यंग्य: समझदारी या मूर्खता

सामान्य ध्यमवर्गीय परिवार में नौकरी को प्राथमिकता दी जाती है । उस परिवार में अगर कोई युवक पढ़ लिखकर सरकारी नौकरी हासिल करने में सफल हो जाए तो उसे उसकी बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाता है उसके पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है । विवाह योग्य कन्याओं के पिताओं का आना उनके यहाँ शुरू हो जाता है लाखों रुपये दहेज के ऑफर मिलते हैं। धूमधाम से शादी होती है लडके के हर नाज नखरे ससुराल वालों द्वारा उठाए जाते हैं ऐसे में अगर लड़के को रिश्वत की कमाई हो रही हो तो उसे अच्छा मान लिया जाता है उसका रुतबा ऐसे लोगों के बीच बढ़ जाता है। इस तरह के परिवारों में अगर कोई लड़का मेधावी हो अच्छे अंकों से उच्च शिक्षित हो और वो नौकरी नहीं करना चाहे तो उसके परिजनों को यह नागवार लगता है।  रोहित ने हमेशा कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उसने बि ई में यूनिवर्सिटी में टॉप किया था। नौकरी करने की उसकी इच्छा नहीं थी इससे उसके पिता दुखी रहा करते थे। एक बार एक सरकारी विभाग में क्लर्क की नौकरी निकली तो उसके पिता ने जोर देकर उसका आवेदन जमा करा दिया चयन मैरिट बेस पर होना था। उसका स्कोर अच्छा था । इसलिए उसका चयन ह...