गाँव रतनपुर के पटेल ग॔गाराम जी का निधन हुए दस वर्ष बीत गए थे पर आज भी गाँव के लोग उन्हूँ भूले नहीं थे उनकी नेकी भलाई के काम आज भी याद किए जाते थे। आसपास के चालीस गाँवो में जब भी कोई विवाद झगड़ा या समस्या आती तो उसे सुलझाने में पटेल बा की मुख्य भूमिका रहती थी जिससे जो वे कह देते वो उसे मानना ही पड़ता था पटेल बा के पास सौ एकड़ जमीन थी दस हाली थे पच्चीस बैल थे एक घोड़ा था दस भैंस वा बीस गाएँ थीं पटेल बा के यहाँ लगभग पच्चीस नौकर काम करते थे। उनमें एक नौकर बृजलाल भी था जिसे वे बिरजू कहते थे।
बृजलाल जब बारह वर्ष का था तब उसके पिता हरलाल मरते समय पटेल बा के हवाले कर गए थे। पटेल बा ने बिरजू को आठवीं तक पढ़ाया था। वो पटेल बा के छोटे मोटे काम कर देता था तथा दोनों समय वहीं खाना खाता पटलन माँ सुरती देवी नेकदिल दयालु महिला थीं वे बिरजू से पुत्रवत स्नेह करती थीं। बिरजू जब बाइस साल का हुआ था पटेल बा ने उसकी शादी ललिता से करा दी थी तथा रहने को मकान दिया था और घर गृहस्थी का सारा सामान भी ललता और बिरजू पटेल बा के खेतों में काम करते और खुश रहते। बिरजू ने कभी पटेल बा से बँधा बँधाया वेतन नहीं लिया था। जब कभी बिरजू के पैसे की जरूरत पढ़ती तो पटेल बा मुनीम जी से दिला देते थे बिरजू की उम्र सत्ताइस साल की हो गई थी बिरजू के एक लड़का कैलाश तथा लड़की कमला थी। गाँव में पशु औषधालय खुला तो पटेल बा ने जगह दी तथा उसमें बिरजू को चपरासी के पद पर रखवा दिया। अब बिरजू खेत पर काम कम करता ललिता जरूर अभी भी पटेल बा के खेत पर काम करती थी। पटेल बा की उम्र अस्सी वर्ष की होने जा रही थी एक दिन उन्होने बिरजू तथा ललिता को अपने पास बुलाया तथा कहा मैं अब बूढ़ा हो चला हूँ तुमने निस्वार्थ भाव से मेरी खूब सेवा की है कल मैंने मुनीम जी से तुम्हारा हिसाब निकलवाया उस से पता चला कि तुम्हारे पास इतने रुपये जमा हो गए हैं जिससे तुम पाँच एकड़ जमीन खरीद सको। मैं भी तुम्हें मजदूर से भूमिस्वामी के रूप मे देखना चाहता हूँ। तुम्हारे सामने दो शर्ते हैं या तो मेरी नदी किनारे वाली पाँच एकड़ जमीन तुम खरीद लो या सारा पैसा नगद लेकर अपना हिसाब बराबर कर लो बिरजू हाथ जोड़कर खड़ा हो गया बोला आपका हर फैसला मंजूर है। पटेल बा बोले तो फिर ठीक है दूसरे दिन पटेल बा ने पाँच एकड़ जमीन बिरजू के नाम करा दी तथा मकान की रजिस्ट्री भी करा दी। फिर बोले आज बहुत बड़ा बोझ सिर से उतर गया। बिरजू तुम तो जानते ही हो मेरे दोनों बेटे रविराम तधा रतिराम अवारा निकम्मे और बदमाश हैं मेरे मरने के बाद तुम उनसे अपने हक का रूपया भी नहीं ले पाओगे। बिरजू चुप रहा पर जमीन मिलने की उसे बहुत खुशी थी। दो दिन बाद पटेल बा का दुखद निधन हो गया। उनके निधन के बाद उनकी जायदाद में हिस्सेदारी हो गई पटेल बा के दोनों लड़कों ने आधी आधी जमीन बाँट ली। वो तो बिरजू की जमीन भी छीनना चाहते थे पर बिरजू के पास पक्के कागज थे जिससे वे बिरजू की जमीन पर कब्जा नहीं कर सके। उस पाँच एकड़ जमीन ने बिरजू की किस्मत बदल दी थी। उधर पटेल बा बा के दोनों लड़के रतिराम एवं रविराम ने दस साल में पूरी जमीन बेच दी छोटे लड़के रतिराम के पास आठ एक जमीन बची थी। उसी के सहारे वो छी रहा था। रविराम ने शराफत की सारी हदें पार करदीं शराब जुएँ की लत ने उसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया था। एक महिला को बुरी नीयत से देखा तथा उसके साथ अनुचित हरकत की जिससे क्रोधित होकर उसके दबंग परिवार वालों ने रलिराम का एक पैर तथा एक हाथ काट दिया रविराम के पाप फूट गए थे। और वो घोर कष्ट से अपना जीवन बिता रहा था। जबकि बिरजू खुशहाल जिंदगी जी रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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