पागलखाने में दो साल से रह रही तमसा की हालत देखकर डॉक्टर भी तरस खाते थे उसके मन को कभी चेन नहीं मिलता था कभी बड़बड़ाती रहती कभी जोर जोर से चीखती चिल्लाती कभी फूटफूटकर रोने लगती सोने के लिए उसे रोज ही नींद के इंजेक्शन दिए जाते थे वरना उसे नींद ही नहीं आती थी। जो उसे पागलखाने लेकर आए थे वे कभी कभार उसकी खबर लेने आ जाते थे। जिनमें एक दिनेश अंकल भी थे वे उसके फुफेरे भाई थे आज भी वे उसकी खोज ख़बर लेने आए थे। लेकिन वे उसकी दशा देखकर दुखी तो होते पर उन्हें तमसा पर गुस्सा भी बहुत आता कहते इसकी इस हालत की ये खुद जिम्मेदार है यह अपने पति आशुतोष और बेटे प्रखर की हत्यारिन है कानून के शिकंजे से तो यह बच गई पर ऊपरवाले की सजा से नहीं बच सकी। तमसा पर डॉक्टरों के इलाज का भी असर नहीं होता था।
दिनेश अंकल जब तमसा को पागलखाने लाए थे तब डॉक्टरों ने परीक्षण कर कहा था कि ये छः महीने से ज़यादा नहीं जी पाएगी लेकिन अब तो दो साल हो गए थे न तमसा के दःख कम हुए थे न उसे मौत आई थी। दिनेश अंकल बता रहे थे कि तमसा कि दस वर्ष पूर्व अभिषेक से जब शादी हुई थी तब दोनों बड़ा खुशहाल जीवन जी रहे थे शादी के दो साल बाद उनके प्रखर का जन्म हुआ था प्रखर ने उनके जीवन में खुशियाँ भर दीं थीं। प्रखर के जन्म के साथ ही अभिषेक का प्रमोशन हो गया उसकी जिम्मेदारियाँ बढ़ गईं फिर उसे रुपया कमाने की धुन सवार हो गई वो प्रखर के भविष्य के आधार को मजबूत करना चाहता था। अभिषैक की ये व्यस्तता तमसा को अच्छी नहीं लगती थी वो चाहती थी अभिषेक पहले की तरह सुबह साढ़े नौ बजे ऑफिस जाए और साढ़े पाँच बजे घर आए वे पहले की तरह घूमें फिरें इन्जॉय करें। पर अभिषेक ऐसा नहीं कर पाता था। जिससे तमसा चिड़चिड़ी हो गई थी तमसा के व्यवहार से परेशान अभिषेक अब घर में कम समय रुकता था। तमसा ने भी अब घर के बाहर पाँव निकाल दिए थे। उसकी दोस्ती अनुराग से हो गई थी अनुराग चंचल चपल और बातुनी था। उसने तमसा की स्थिति भाँपकर उससे निकटता बढ़ाई अनुराग हर समय तमसा को उसके पति अभिषेक के खिलाफ भड़काता रहता था उसने तमसा के मन में अभिषेक के प्रति खूब नफ़रत भर दी थी। वो तमसा के पैसों पर मौज उड़ाता वो पैसे जो दिन रात एक कर अभिषेक कमाता था। एक दिन अभिषेक जब हिसाब चैक कर रहा था तो यह देखकर चौंक गया कि तमसा ने साढे पाँच लाख रुपयै ऐसे ही उड़ा दिए हैं उसने सिर्फ उससे इतना ही कहा कि तमसा तुमने इस महीने ये साढ़े पाँच लाख रुपये खर्च किए कोई खास बात थी क्या इस पर तमसा बिफर गई बोली तुम जैसा चीपड़ इंसान मैंने आज तक नहीं देखा तुम्हारा बस चले तो रोटी भी मुझे गिनकर दो उस दिन दोनों के बीच खूब कहा-सुनी हुई तमसा रोते हुए बोली मेरे तो भाग्य फूटे थे जो तुम जैसे घटिया इंसान से शादी हुई। अभिषेक का मूड खराब हो गया था वो भूखा ही ऑफिस चला गया शाम को जल्दी ही घर आ गया तो देखा कि तमसा अनुराग के साथ फाइव स्टार होटल से मँगाया शानदार भोजन कर रही है उनके बीच बियर की बोतल भी रखी थी। अनुराग अभिषेक को देख अचकचा गया पर तमसा को कोई फर्क नहीं पड़ा बल्कि वो उसे और जली कटी सुनाने लगी अभिषेक खून का घूँट पीकर रह गया उस रात वो भूखा ही सोया तमसा ने एक बार भी उससे नहीं पूछा कि तुमने खाना खाया या नहीं सुबह जब अभिषेक की नींद खुली तो उसने देखा कि तमसा अपने छः माह के बेटे को बुरी तरह मार रही है और कह रही है कि तेरे मैं भी तेरे बाप का गंदा खून है मुझे तुम दोनों बाप बेटों से बहुत नफरत है दोनों मरते भी नहीं मरें तो मुझे छुटकारा मिले मैं तो तंग आ गई हूँ तुम दोनों से। अभिषेक सोने का दिखावा करता हुआ चुपचाप तमसा की बातें सुनता रहा बोला कुछ नहीं सोचा बोलकर कौन झगड़ा बढ़ाए। अभिषेक अपने आप को संयत करते हुए ऑफिस चला गया दोपहर को अभिषेक ने तमसा को फोन किया तमसा ने रूखी आवाज में कहा क्या है क्यों फोन किया? अभिषेक ने कहा कि मैं दस दिन के लिए ऑफिस के कार्य से बाहर जा रहा हूँ। तमसा बोली तो मैं क्या करूँ अभिषेक बोला अपना ख्याल रखना तमसा बोली बकवास बंद कर फोन रखो तुम्हें जहाँ जाना है जाओ मुझे इससे कोई मतलब नहीं तमसा समझी अभिषेक ने फोन काट दिया है तो खुशी से चहकते हुए बोली अनुराग दस दिन के लिए बला टल रही है अब हम खूब इन्जॉय करेंगे। सुनकर अभिषेक की आँखों में आँसू आ गए। उसने फोन काट दिया दस दिन वो काफी व्यस्त रहा दस दिन बाद घर आया तो उसे घर का माहौल बड़ा विचित्र लगा तमसा चुपचाप बैठी थी अभिषेक ने कहा प्रखर कहाँ है मैं उसके लिए दुकान से सबसे मँहगा खिलौना लाया हूं। इस पर चिल्लाते हुए बोली प्रखर नहीं है अब इस दुनिया में वो मर गया इसके जिम्मेदार तुम हो घटिया आदमी मैं अब तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती। अभिषेक को काटो तो खून नहीं ऐसा लगा जैसे उस पर बिजली गिर पड़ी हो। वो दुखी मन से बाहर निकला तो पड़ोस की सरला भाभी और दीपक भाई साहब ने उसे घर में बुला लिया सरला भाभी बोली भाई साहब हम बहुत पहले आपको बताना चाहते थे पर बता नहीं रहे थे परंतु अब तो हद पार हो गई है आपके जाने के बाद तमसा भाभी एक लड़के अनुराग के साथ आजादी से घूमती रहती हैं जब दस दिन पहले आप गए तो अनुराग एक बाई को ले आया उसकी देखरेख में ये प्रखर को छोड़कर दिन भर घूमते रहते और देर रात को नशे में चूर होकर घर आते इस बीच प्रखर की तबियत खराब हो गई बाई ने तमसा से कहा भी कि बच्चे की तबियत खराब है तो तमसा बोली तो मैं क्या करूँ मैं कोई डॉक्टर हूँ क्या। मैं जा रही हूँ प्रखर को तू ही डॉक्टर को दिखा देना। और तमसा प्रखर को देखे बिना ही अनुराग के साथ चली गई इधर बाई को फोन पर खबर मिली की उसके भाई का एक्सीडेन्ट हो गया है तो वो घबराकर प्रखर को घर में बंद कर चली गई प्रखर को डबल निमोनिया हो गया था उसने दिन में ही इलाज के अभाव में तड़प तड़प कर अपनी जान दे दी थी बाई रात को भी नहीं आई थी रात को साढ़े बारह बजे नशे में चूर अनुराग और तमसा आए वे खुद ही होश में नहीं थे तो प्रखर की क्या खबर लेते दिन के ग्यारह बजे बाई आई और प्रखर के कमरे में गई तो देखा कि प्रखर तो कब का मर चुका है वो चिल्लाई तो तमसा तमतमाती हुई आई क्यों चिल्ला रही है हमारी सारी नींद खराब कर दी बाई रो रही थी तमसा ने प्रखर को मरा देखा तो उसके चेहरे पर थोड़ी घबराहट आई अनुराग और तमसा उसे लेकर अस्पताल पहुँचे तो डॉक्टर ने प्रखर की जाँच कर कहा कि इसकी मौत तो अठारह घंटे पहले हो चुकी है आप कौन हो मुझे तो यह मामला संदिग्ध लग रहा है पुलिस को सूचना देना पड़ेगी पुलिस का नाम सुन तमसा और अनुराग के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं तमसा ने कहा मैं इसकी माँ हूँ मुझे कोई पुलिस नहीं बुलानी ना ही इसका पोस्टमार्टम कराना है लेकिन जब डॉक्टर जिद पर अड़ा तब तमसा ने अभिषेक की गाढ़ी कमाई से चार लाख रुपये देकर मामला रफा दफा कर दिया वे प्रखर के शव को भी घर पर नहीं लाए वहीं किसी को पैसे देकर उसका अंतिम संस्कार करा दिया। सरला भाभी की बात सुनकर अभिषेक की हालत सोचनीय हो गई वो बच्चों की तरह फूटफूटकर रोने लगा। दीपक जी ने उसे जैसे तैसे चुप कराया घर आया तो देखा तमसा होटल से मँगाया हुआ नाश्ता कर रही थी प्रखर की मौत का उसे कोई दुख नहीं था। वो सोच रहा था ये कलियुग है वो माँ जो अपने नवजात बच्चे को घूरे पर फैंक आती है उसकी तो शायद कोई मजबूरी रही होगी पर तमसा की ऐसी क्या मजबूरी थी जो उसने अपने ग्यारह माह के मासूम बच्चे को अत्यंत कष्टदायक मौत से मरने के लिए छोड़ दिया। क्षोभ में उसने मोटर सायकिल निकाली और निरूद्देश्य ही राइडिंग पर निकल पड़ा वो ख्यालों में इतना खोया था कि उसे ट्रेन आती न दिखी न ही आवाज सुनाई दी खुली रेल्वे क्रासिंग को पार करते हुए वो आती ट्रेन की चपेट में आ गया उसके प्राण पखेरू वहीं उड़ गए तमसा को जब ये खबर मिली तो उसने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की जिसे अपने सगे बेटे के मरने का दुख नहीं हुआ वो अपने उस पति के मरने का क्या दुख करती जिससे वो सबसे ज्यादा नफरत करती थी। अभिषेक के मरने के बाद तमसा को फंड और बीमे के पाँच करोड़ रुपये मिले तमसा कि खुशी का ठिकाना नहीं था उसकी राह के दोनों काँटे हट गए थे उसने अनुराग से शादी कर ली और आराम से जिंदगी जीने लगी। दो साल में वे पाँच करोड़ रुपये चौपट कर चुके थे एक दिन अनुराग ने तमसा से कहा सारे पैसे खत्म हो गए तुम्हारी ज्वेलरी भी बिक गई अब घर में बेचने लायक कुछ भी नहीं बचा है तो तमसा बोली आप कमाओ इस पर अनुराग बोला मुझे कमाने का शौक होता तो तुझे क्यों फँसाता शाम को अनुराग उसे सजाकर एक नाइट क्लब में ले गया और कहा इसमें डाँस कर लोगों का मनोरंजन करो मुफ्त की शराब पियो और दस हजार रुपये अलग से कमाओ हारकर तमसा को यह सब करना पड़ा अनुराग अब भी तमसा के रुपयों पर मौज कर रहा था छः महीने तक यह सब चलता रहा पर एक दिन क्लब के मालिक ने उसे क्लब से हटा दिया अनुराग ने दूसरे क्लब में तमसा को रखवाने की कोशिश की पर सफलता नहीं मिली छः महीने से मकान का किराया चढ़ा था एक दिन अनुराग तमसा को छोड़कर जो गया तो फिर कभी वापस नहीं आया मकान मालिक ने तमसा को घर से बाहर निकाल दिया तमसा बदहवास हो गई थी अब उसके पास दुख बेचैनी और पछतावे के सिवा कुछ नहीं था। उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था वो पूरी तरह पागल हो गई थी। किसी ने दिनेश अंकल को तमसा के विषय में बताया तब वे तमसा को ढूंढते यहाँ आए तमसा उनकी फुफेरी बहन थी उन्हें तमसा की सारी करतूतें पता थीं उन्होंने इतना ही कहा कि ऐसे खोटे कामों का यही अंजाम होना था। उन्होंने अपना फर्ज समझकर तमसा को पागलखाने में भर्ती करा दिया था। जहाँ वो दो साल से तड़प तड़प कर अपनी मौत का इंतजार कर रही थी।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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