आज राजेन्द्र जाने माने अभिनेता गायक कलाकार, गीतकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। अच्छे संगीत की रचना भी उन्होंने की। कमाल की शायरी करते हैं लेकिन वे जब एक सरकारी विभाग में चपरासी थे तब उन्हें अपमान के कड़वे घूँट पीने पड़े थे।
दस वर्ष पूर्व उन्होंने बी म्यूज किया था रंगमंच पर कई नाटकों में अपने किरदार में अपने अभिनय से जान डालकर दर्शकों को प्रभावित भी किया था। तभी उनके पिताजी परसराम जो तहसील में चपरासी थे कैंसर की बीमारी से हारकर मृत्यु को प्राप्त हो गए थे। उनकी मौत पर राजेन्द्र को अनुकंपा नौकरी तो मिली पर पद उनको चपरासी का मिला। सबके समझाने पर की आज के ज़माने में सरकारी नौकरी मिलना बड़ी बात है। राजेन्द्र जी ने वो नौकरी स्वीकार कर ली वह अच्छे कवि तथा शायर भी थे। लेकिन ऑफिस में उनकी कला की कद्र करने वाला कोई नहीं था। सब उन्हें चपरासी ही समझते थे वे भी ये सोचकर नौकरी कर रहे थे कि हर महीने उन्हें वेतन तो मिल जाता है। अभी उनकी बहन अंजू कुँवारी थी भाई नीरज पढ़ रहा था। इसलिए नौकरी करना उनके लिए बहुत जरूरी था। ऑफिस में नए साहब आर पी तिवारी जी की पोस्टिंग हुई थी उनके विषय में जब राजेन्द्र जी को पता चला कि वे कवि हैं तो उन्हें बड़ी ख़ुशी हुई है। छंद मुक्त कविताएँ लिखते थे। तिवारी जी ने भी राजेन्द्र जी नगर की साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। राजेन्द्र उन्हें कंचन साहित्य परिषद की कवि गोष्ठी में ले गए। वहाँ जब परिषद के संस्थापक सुरेश जी को पता चला कि ये सी ई ओ हैं । तो उसने उन्हें विशेष महत्व दिया मंच पर आसीन कराया पुष्पाहार से स्वागत किया संस्थापक नगर निगम में क्लर्क था इस बहाने उसे सी ई ओ साहब से निकटता प्राप्त करने का अवसर मिल गया था। दूसरे दिन राजेन्द्र ने जब अखबार में कविगोष्ठी की खबर पढ़ी तो उसकी हैडिंग में तिवारी जी की पंक्तियाँ दी गई थीं। राजेन्द्र ने बेहतरीन गीत का पाठ किया था मगर उनका नाम ही नहीं छपा था। सुरेष ने तिवारी जी परिषद का संरक्षक बना दिया था। इसका फायदा ये हुआ कि परिषद की अटकी हुई अनुदानी की राशि तिवारी जी की पहल पर प्राप्त हो गई। अगले माह में परिषद ने अपने वार्षिक सम्मान समारोह में तिवारी को परिषद का सर्वोच्च सम्मान प्रदान कर दिया था। राजेन्द्र जो दस वर्ष में हासिल नहीं कर पाए थै वो तिवारी जी को एक माह में मिल गया था। एक दिन तिवारी जी ने राजेन्द्र से कहा तुम मुझसे कई गुना अच्छे कवि शायर लेखक हो छंद पर तुम्हारी अच्छी पकड़ है मैं भी चाहता हूँ कि छंदबद्ध गीत अथवा ग़ज़ल की रचना करूँ। मुझे पता चला है तुम उस्ताद शायर हो। मुझे भी शायरी करना सिखाओ। राजेन्द्र ने पूरे चार महीने उन्हें शायरी सिखाने की कोशिश की पर नाकाम रहे दो टूटी फूटी ग़ज़ल तिवारी जी ने लिख लीं थीं । राजेन्द्र कै लाख मना करने के बाद भी कवि गोष्ठी में तिवारी ने वो ग़ज़लें सुनाई उन्हें खूब वाह वाही मिली किसी में उसमें कमी निकालने का साहस नहीं था। आगामी गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के लालकिले में आयोजित कवि सम्मेलन में तिवारी जी का नाम देखकर राजेन्द्र चौंके बिना नहीं रह सका, उस कवि सम्मेलन में तिवारी जी ने वही दो ग़ज़लें सुनाई थीं पर किसी में हिम्मत नहीं थी उनको घटिया कहने की एक अवसरवादी संगीतकार ने उस ग़ज़ल को संगीतबद्ध भी कर दिया था। तिवारी जी अपनी कुल जमा डेढ दर्जन कविताओं से पूरे देश में छा गए थे और राजेन्द्र बेहिसाब साहित्य सृजन करने के बाद भी अपनी पहचान नहीं बना सके थे। तभी सोशल मीडिया का दौर आ गया राजेन्द्र ने एक कार्यक्रम में खुद का लिखा लोकगीत अपनी संगीत रचना के साथ गाया किसी ने वो सोशल मीडिया पर डाल दिया वो लोकगीत वायरल हो गया। और राजेन्द्र का नाम चारों दिशाओं में फैल गया इसी तरह शिवरात्री तथा नवरात्री पर राजेन्द्र जी के भजनों ने भी चारों तरफ धूम मचा दी। सोशल मीडिया पर ही राजेन्द्र जी द्वारा रचित तथा उन्हीं के द्वारा निर्देशित हास्य नाटक जिसमें राजेन्द्र जी ने मुख्य पात्र का किरदार निभाया था खूब वायरल हो गया। राजेन्द्र देखते देखते चमकता सितारा बन गया था। लेकिन तिवारी जी के कारण उसके अपने शहर में राजेन्द्र उपेक्षित रहा पर हुनर के पारखी लोगों की कमी थोड़ी है। बॉलीबुड के बड़े फिल्म निर्माता शक्ति सामंत शहर में लोकेशन देखने आए तो वे राजेन्द्र जी से विशेष रूप से मिले राजेन्द्र जी की प्रतिभा के वे कायल हो गए। सामंत जी ने राजेन्द्र जी के सहयोग से फिल्म खारा पानी बनाई राजेन्द्र जी ने छः महीने की ऑफिस से छुट्टी ले ली थी। फिल्म रिलीज होने के बाद सुपरहिट हो गई इसके साथ ही राजेन्द्र जी के संगीत, गीत, गायन, संवाद, अभिनय सब हिट हो गया। तिवारी जी इस बात को हजम नहीं कर पा रहे थे कि एक मामूली चपरासी इतना कुछ कैसे हासिल कर सकता है। फरवरी माह में जब आयकर गणना पत्रक भरे जा रहे थे तब राजेन्द्र जी का ढाई करोड़ रुपये का इंकम टेक्स कटा तो हैरत से तिवारी जी की आँखें फटी रह गईं उनका खुद का दो लाख रुपये का इंकम टेक्स कटा था जबकि जलन के कारण तिवारी जी ने राजेन्द्र जी की तनख्वाह आठ महीने से रोक रखी थी। तिवारी जी ने राजेन्द्र जी को बुलवाया तथा वही अपमानजनक लहजे में बात की एक चपरासी होकर तुम जो कर रहे हो वो नहीं चलेगा फिल्म जो तुमने अभिनय किया है वो सरकारी कर्मचारी के आचरण के खिलाफ है इस पर राजेन्द्र ने कहा उससे मेरे फोलोवर की संख्या डेढ़ करोढ़ से ऊपर हो गई है। तथा यूट्यूब से मुझे पच्चीस लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। यस सुनकर तिवारी जी तमतमा गए तदा आपे से बाहर हो गए बोले क्या समझते हो अपने आपको मैं तुम्हारी नौकरी खा जाऊँगा तुम्हें जेल की हवा खिलाकर मानूँगा। राजेन्द्र के चेहरे पर मुस्कान आ गई। इसने तिवारी जी को आपे से बाहर कर दिया। बोले निकल जाओ मेरे चैंबर से। राजेन्द्र बिना कोई जवाब दिए बाहर आ गए थोड़ी देर तक वे गुस्से में बैठे रहे फिर लँच में कॉफी पीने चले गए उन्हें गुस्से में इतना भी ध्यान नहीं रहा कि उनके चैंबर में सी सी टी वी कैमरा लगा है जब उन्हें यह अहसास हुआ कि जो उन्होंने राजेन्द्र जी के साथ किया है वो गलत था और सब सी सी टी वी कैमरे में रिकार्ड हो गया है जो ठीक नहीं वे उसे डिलीट कराने जा ही रहे थे कि पता चला वो सारी घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है और तिवारी जी उसके कारण सबकी घृणा के पात्र बन गए हैं। मुख्यमंत्री जी ने तिवारी के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जो उनकी भ्रष्टाचार की फाइल दबी थी वो खुलवा दी तिवारी जी जो राजेन्द्र को जेल भिजवाना चाहते थे उनके खुद जेल जाने की नौबत आ गई। उधर राजेन्द्र जी को मुख्यमंत्री जी ने संगीत नाटक अकादमी का अध्यक्ष मंत्रीमंडल की बैठक में प्रस्ताव पारित कर बना दिया था। तथा राज्यमंत्री का दर्जा भी दे दिया था। तिवारी जी जब सब जगह से हारकर राजेन्द्र जी से मिलने गए तो देखा कि उनके सीनियर अधिकारी श्रीवास्तव जी राजेन्द्र जी के सेक्रेटरी हैं उन्होंने तिवारी जी को राजेन्द्र जी से मिलने का समय ही नहीं दिया और वे मुँह लटकाए वापस आ गए।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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