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कहानी: शिक्षा मंत्री का साला

प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामस्वरूप के साले किशन कुमार  का तीसरी बार निलंबन हुआ था। क्योंकि  शिक्षा मंत्री खुद नहीं चाहते थे कि उनके रहते वो पद पर बहाल हो। ये निलंबन का तरीका भी उन्होंने अपने साले की हरकतों से परेशान होकर निकाला था।तीसरी बार निलंबित होने के बाद किशन कुमार अपने जीजा जी से  कहकर आया था कि मुझे बहाल करा दो मैं अब कोई ऐसा काम  नहीं करूँगा जिससे आपकी छवि धूमिल हो। पर मंत्री जी को उसकी फितरत देख उसकी बातों पर भरोसा तो नहीं हो रहा था । लेकिन विधानसभा चुनाव आने वाले थे यह सोचकर उन्होंने अधिकारियों  को किशन कुमार को बहाल करने के निर्देश दे दिए थे। तथा हिदायत देते हुए कहा था कि इसकी पदस्थापना ऐसी जगह करना जहाँ से ये ऐसा कोई कारनामा नहीं कर पाए जिससे मेरी छवि धूमिल हो।
साढ़े चार साल पहले जब रामस्वरूप जी चुनाव जीतकर विधान सभा में पहुँचे थे तब उनकी बेदाग  छवि देखकर मुख्यमंत्री ने उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया था। उनके शिक्षा मंत्री बनने के बाद उनके साले किशन कुमार का दिमाग सातवें आसमान पर पहुँच गया था। वैसे किशन कुमार प्राइमरी स्कूल में सहायक शिक्षक था मगर अब  उसका रुतबा बढ़ गया था विभाग के बड़े अधिकारी उससे सर कहकर बात करते स्कूल जाना उसने बंद कर दिया था ज्यादातर समय वो मंत्री जी के बँग्ले पर रहता वहीं से फोन कर अधिकारियों को हडकाता रहता दिनोंदिन  उसकी हरकतें बढ़ती जा रही थीं मंत्री जी के साथ वो दौरे पर भी जाता अधिकारी उसकी खूब आव भगत करते  किशन कुमार अब मंत्री जी के नाम का उपयोग कर भ्रष्टाचार करने लगा था इस बार ट्रान्सफर एवं पोस्टिंग में उसने तीस लाख रुपये हड़पे थे । इसके बाद भी  उसने पन्द्रह लाख रुपये के फर्जी मेडिकल बिल लगाकर उन्हें पास कराने के लिए अधिकारियों पर दवाब बनाया था उधर विपक्षी दल के कुछ नेताओं ने मन बनाया था  कि अगर किशन कुमार यह बिल पास करा लेता है तो हम इसके  खिलाफ कोर्ट जाएँगे। जब यह बात संबंधित अधिकारी को मालूम पड़ी तो उसके हाथ पैर फूल गए उसे अपनी नौकरी खतरे में नजर आने लगी  बिल पास करने के पहले उसने मंत्री जी से मिलने का निश्चय किया डरते बुए वो मंत्री जी के पास पहुँचा और उन्हें सारी बात से अवगत करा दिया। रामस्वरूप जी सीधे सरल ईमानदार और बेदाग  नेता के रूप में  जाने जाते थे मुख्यमंत्री जी उन्हें खूब आदर देते थे। उन्हें अपने साले से ऐसी उम्मीद नहीं थी  रामस्वरूप जी ने तुरंत अधिकारी से कहा बिल फर्जी है आप उसे पास न करें तथा किशन कुमार के खिलाफ आप कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं भ्रष्ट व्यक्ति के लिए मेरे दिल में कोई जगह नहीं है। अधिकारी के जाने के बाद रामस्वरूप चुप नहीं बैठे उन्होंने किशन कुमार के कारनामों की जाकारी हासिल करना शुरू की तो वे बैरत में पढ़ गए उन्हें किशन कुमार पर खूब क्रोध आ रहा था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फौरन किशन कुमार को निलंबित करें बँग्ले पर किशन कुमार का आना प्रतिबँधित कर दिया गया। किशन कुमार को बिल पास  नहीं होने का गुस्सा था दूसरे इस निलंबन के आदेश को देखकर वो तमतमा गया। तुरंत  अधिकारी के ऑफिस गया वहाँ अधिकारी ने उससे मिलने से इंकार कर  दिया मंत्री जी ने किशन कुमार से  सीधे बात तो नहीं की कि पर ये चेतावनी उस तक पहुँचा दी कि अगर ज्यादा पँख फड़फड़ाए तो जेल की हवा खिलवा दूँगा।  किशन कुमार फिर भी चुप नहीं बैठा जो पैसे कमाए थे वो सब फूँक डाले पर वो रामस्वरूप जी की छवि बिगाड़ने में सफल नहीं हो सका  उसने मंत्री जी के खिलाफ आंदोलन करने का प्रयास भी किया पर किसी ने उसका साथ नहीं दिया। राम स्वरूप जी ने भी तय कर लिया था कि जब तक वे शिक्षा मंत्री रहेंगे  तब तक किशन कुमार को बहाल नहीं होने देंगे यही कारण था कि वो साढ़े तीन साल से निलंबित चल रहा था। उसका सारा जोश ठंडा पड़ गया था उसे अब अपनी नौकरी बचाने की चिंता थी इसिलिए वो रामस्वरूप के  सामने  गिड़गिड़ाकर रहम की भीख माँगकर आया था।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप  


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