सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कहानी: हरफनमौला

प्राथमिक शाला रामाखेड़ी के सहायक शिक्षक  रामदीन आज सेवानिवृत्त हो गए थे सेवानिवृति के बाद वे अपने आपको बहुत हल्का फुल्का महसूस कर रहे थे। घर जब वे आए तो उनकी पत्नी भगवती ने कहा कि अब कम से कम घर में तो रहोगे। नहीं तो छुट्टी में भी आपको फुर्सत नहीं मिलती थी।रामदीन ने कहा सो तो है।
रामदीन ने गणित में एम एस सी प्रथम श्रेणी में किया था इसके बाद भी आखिरी तक वे प्राथमिक शिक्षक ही रहे कभी उन्हें प्रमोशन का लाभ नहीं मिला था।
रिटायरमेंट के एक दिन पहले तक वे काम में व्यस्त  रहे थे उस दिन सुब्ह छः बजे वे घर से निकल गए थे दो घंटे गाँव में घूमकर बी एल ओ का काम किया आठ बजे स्कूल आ गए यहाँ आकर स्कूल की झाड़ू लगाई पौंछा लगाया पानी भरा शौचालय साफ किया पेड पौधों को पानी दिया माँ की बगिया को पानी दिया फिर मध्यान्ह भोजन के लिए सब्जी लाकर रखी। इसके बाद बच्चे आ गए उन्हें पढाया।  स्कूल चैक करने जन शिक्षक आए उन्हें चाय बनाकर पिलाई झूठे बर्तन साफ किए स्कूल में कोई चपरासी नहीं था गाँव का सफाई कर्मी थोडे से काम के ज्यादा पैसे लेता था। सरकार से इसका पैसा मिलता नहीं था वे अपनी जेब से कब तक पैसे दें इसलिए वे खुद ये सब काम करते थे बच्चों से कोई काम नहीं करा सकते थे वरना गाँव वाले रील बनाकर उन्हें सस्पेणाड कराने में देर नहीं करें। तीन बजे बजे डी इ ओ ऑफिस से फोन आया कि तुरंत ऑफिस आओ वे सायकिल से ऑफिस पहुँचे पता चला कि एकाउण्टेट की गलती से बजट रुका है अगर जानकारी सही नहीं हुई तो कर्मचारियों को  समय पर वेतन का भुगतान नहीं होगा। रामदीन के अलावा कोई भी वो काम नहीं कर सकता था।  वे रात के साढ़े बारह बजे तक अकेले काम करते रहे एकाउण्टेंट आठ बजे तक रुका साहब के जाने के बाद उसने शराब का पौआ मँगवाया चपरासी ने और उसने वहीं शराब का सेवन किया नमकीन खाया। रामदीन को तो चपरासी ने एक गिलास पानी पिलाने लायक भी नहीं समझा वो दोनों चले गए पूरे ऑफिस में अकेले रामदीन काम करते रहे। रात को साढ़े बारह बजे काम खत्म करपे के बाद आठ किलोमीटर सायकिल चलाकर रात को डेढ़ बजे घर पहुँचे दो बजे  रात को खाना खाया। और सो गए दूसरे दिन उनका रिटायरमेन्ट होना था। वे रिटायर हुए तो कहीं कोई कार्यक्रभ नहीं हुआ किसी ने उन्हें एक हार तक नहीं पहनाया। आप सोच रहे होंगे कि उन्हें तो राष्ट्रपति पुरुस्कार मिला होगा तो ऐसा कुछ नहीं हुआ जिनको सम्मान मिले उनमें अधिकाँश चापलूस और नकारा लोग थे रामदीन की दो वेतन वृद्धि रुकी हुई थीं वो  बड़ी मुश्किल से बहाल हुईं  इसके लिए उन्होंने कलेक्रटर के बच्चों को घर जाकर महीनों  मुफ्त टयूशन से पढाया फिर भी उन्होने उनकी वेतन वृद्धि बहाल नहीं कराई आखिर उन्हें बीस हजार रिश्वत देना पड़ी तब काम हुआ रिटायरमेन्ट का सारा काम  उन्होंने खुद किया तब भी उन्हें अस्सी हजार रिश्वत देना पड़ी थी।  रामदीन को पिछली गर्मी की छुट्टी की घटना याद आई छुट्टी होते ही रामदीन को एस डी एम के कार्यालय में अटेच कर दिया गया था वहाँ अकेले  रामदीन दस बजे से आठ बजे तक काम करते थे बाकी कर्मचारी काम कम और समय अधिक बर्बाद करते थे बिना पैसे लिए वहाँ का चपरासी भी हिलता तक नही था। सारी बेगार रामदीन के हवाले कर दी जाती थी। एक दिन एस डी एम ने रामदीन से कहा कल रविवार की छुट्टी है कल आ जाना ऑफिस की साफ सफाई कर देना चपरासी यहीं रहेगा रामदीन   दिनभर नौकरों की तरफ ऑफिस की सफाई करते रहे और चपरासी कमर पर हाथ रख अधिकारी की तरह उनसे काम कराता रहा वो अपने आपको  सिपाही कहता था उसकी निगाह में प्राइमरी स्कूल के शिक्षक की कोई कीमत नहीं थी। भारी टेबल सरकाने में उन्होंने चपरासी की मदद चाही तो उसने साफ इंकार कर दिया साथ ही चेतावनी दे दी कि अगली बार साहब के साथ में जब स्कूल चेक करने आऊँगा तो तुम्हारी दो वेतन वृद्धि फिर रुकवा सकता हूँ रामदीन उसकी बात सुनकर सहम गए और उन्होंने अकेले ही चार लोगों का काम किया और थक कर चूर होकर घर पहुँचे पत्नी बोली छुट्टी के दिन तो चैन ले लिया करो पिछले इतवार को बी ई ओ साहब के बच्चे की जन्मदिन पार्टी में दाल बाफले लड्डू बनाने चले गए थे बी इ ओ साहब का दस हजार रुपये का हलवाई का खर्च बचाया था और खुद भूखे आ गए थे  रात को घर का खाना खाकर दिन भर भूख मिटाई थी । रामदीन ने जवाब दिया था कि वे अधिकारी हैं उन्हें नाराज कैसे कर सकते हैं।सुनकर पत्नी चुप हो गई थी। रामदीन की चालीस बाल की नौकरी में सबने उनका भरपूर लाभ लिया वे हरफनमौला थे उनकी योग्यता का पूरा दोहन किया पर बदले उन्हें अपमान और हिकारत के सिवा कुछ नहीं मिला था इसलिए आज वो रिटायर होने पर बढ़े खुश थे कम सेकम अब अहसानफरामोशों के काम तो नहीं करना पड़ेंगे।
****
रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

व्यंग्य : जीते जी रोटी को तरसाया मरने के बाद श्राद्ध

आज कल सोलह श्राद्ध का समय चल रहा है कई जगह पर श्राद्ध के आयोजन हो रहे हैं बहुत सारे लोगों को भोजन कराया जा रहा है अपने पितरों के श्राद्ध में लोग हज़ारों रुपये भी खर्च कर रहे हैं उनमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने जीते जी अपने बूढ़े माँ बाप की खबर तक नहीं ली और अब उनके मरने पर उनके श्राद्ध पर बड़ा आयोजन कर रहे हैं उनकी तस्वोर पर माला चढ़ा रहे हैं। ऐसे लोगों में शहर के रविकांत जी भी हैं उन्होंने अपने स्वर्गीय माता पिता की तिथि पर भव्य आयोजन किया था खूब पकवान खिलाए गए थे खूब दान किया गया था पर उन्होंने अपने माता पिता को जीते जी बहुत दुख दिए थे। उनके पिताजी सत्तासी वर्ष के थे माँ पिच्यासी वर्ष की दोनों अपने पुराने घर में रहते थे उनका बेटा रविकांत उनकी कभी खोज खबर नहीं लेता था बेटी विदेश में दामाद के साथ रह रही थी। वे दोनों ही एक दूसरे का ख्याल रख रहे थे एक दिन रविकांत जी के पिताजी का दुखद निधन हो गया तब रविकाँत घर?आया पिताजी की उत्तर क्रिया करने के बाद चला गया रविकाँत की माँ अकेली रह गई थीं वे सीधी सरल थी जबकि बेटा बहू चपल चालाक बेटे बहू ने बातों में लेकर उनकी सारे सोने चाँदी के जे...

व्यंग्य: चापलूसी से मिली उपलब्धियाँ।

चापलूसी से मिली उपल्बिधियों का जब लोग बड़े गर्व से बखान कर के फूले नहीं समाते । तब खुद्दार टाइप के लोग उन पर अधिक ध्यान नहीं देते पर कुछ चापलूस टाइप के लोग उन्हें बड़ी हसरत से देखते हैं वे उनके जैसा बनकर वे सब उलब्धियाँ हासिल करने के ख्वाब देखने लगते हैं। ऐसे ही एक सेवानिवृत कर्मी अपनी उपलब्धियों का बखान कर रहे थे कुछ गौर से सुन रहे थे कुछ ऊब रहे थे वहीं सुरेश जी उनकी बात सुनकर मन ही मन मुस्का रहे थे क्योंकि उन्हें उनकी असलियत पता थी। किसी ने उन से पूछ लिया आप भी सतीश जी के विभाग में कार्यरत थे आपकी और इनकी नौकरी की शुरूआत एक ही पद से हुई थी फिर ये इतनी तरक्की क्यों कर गए जरा इस विषय में कुछ बताएँगे वे बोले अगर हम बताएँगे तो ये नाराज हो जाएँगे लोगों ने कहा कुछ भी हो आप तो बताइए वे बोले तो सुनो। नौकरी से पहले हम मित्र थे तब हमें मालूम नहीं था कि ये खुदगर्ज टाइप के चापलूस इंसान हैं। हम दोनों की पोस्टिंग फील्ड में हुई थी। हम किसी की चापलूसी नहीं करते थे और अपने काम से मतलब रखते थे। जबकि इन्होंने मुख्य कार्यालय में अपनी चापलूसी से घुसफैठ कर ली थी कहीं जातिवाद कहीं क्षेत्रवाद कही भाषाव...

व्यंग्य: समझदारी या मूर्खता

सामान्य ध्यमवर्गीय परिवार में नौकरी को प्राथमिकता दी जाती है । उस परिवार में अगर कोई युवक पढ़ लिखकर सरकारी नौकरी हासिल करने में सफल हो जाए तो उसे उसकी बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाता है उसके पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है । विवाह योग्य कन्याओं के पिताओं का आना उनके यहाँ शुरू हो जाता है लाखों रुपये दहेज के ऑफर मिलते हैं। धूमधाम से शादी होती है लडके के हर नाज नखरे ससुराल वालों द्वारा उठाए जाते हैं ऐसे में अगर लड़के को रिश्वत की कमाई हो रही हो तो उसे अच्छा मान लिया जाता है उसका रुतबा ऐसे लोगों के बीच बढ़ जाता है। इस तरह के परिवारों में अगर कोई लड़का मेधावी हो अच्छे अंकों से उच्च शिक्षित हो और वो नौकरी नहीं करना चाहे तो उसके परिजनों को यह नागवार लगता है।  रोहित ने हमेशा कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उसने बि ई में यूनिवर्सिटी में टॉप किया था। नौकरी करने की उसकी इच्छा नहीं थी इससे उसके पिता दुखी रहा करते थे। एक बार एक सरकारी विभाग में क्लर्क की नौकरी निकली तो उसके पिता ने जोर देकर उसका आवेदन जमा करा दिया चयन मैरिट बेस पर होना था। उसका स्कोर अच्छा था । इसलिए उसका चयन ह...