सतीश नागर लगातार चौथी बार बड़ागाँव नगर पालिका के अध्यक्ष चुने गए थे जबकि इस चुनाव में उनके विरोधी दिनेश बड़कुल ने पानी की तरह पैसा बहाया था फिर भी उसकी करारी हार हुई। दुष्प्रचार, झूठी अफवाह का भी कोई लाभ नहीं हुआ था। श्री नागर फिर भी भारी बहुमत से जीत गए थे। सतीश नागर तीस साल पहले जब बड़ागाँव में ग्राम पंचायत सचिव थे तब उन्हें अपनी ईमानदारी के कारण नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। इसकी लोगों में बड़ी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी जिसने उन्हें जनता में लोकप्रिय बना दिया था। तीस साल पहले बड़ागाँव अंचल का सबसे बड़ा गाँव था जिसकी जनसंख्या आठ हज़ार थी। उस समय सतीश नागर पंचायत के सचिव थे तथा मदनलाल नवनिर्वाचित सरपंच। उस समय मदनलाल को लोगों ने इसलिए वोट दिया था क्योंकि वो जनता को यह विश्वास दिलाने में सफल हो गए थे कि वो ईमानदार हैं और अपने पद पर ईमानदारी से काम करेंगे। पर जीतने के बाद मदनलाल के तेवर बदल गए थे। इससे सतीश नागर जो एक ईमानदार सचिव थे पशोपेश में पड़ गए थे कि वे किसका साथ दें। मदनलाल ने पदभार ग्रहण करने के बाद ही भ्रष्टाचार की शुरूआत कर दी थी। गाँव में नाली का निर्माण हो रहा था उसके ठ...