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कहानी: बाल मेला

रतनपुर की कन्या माध्यमिक शाला में पहली से आठवीं तक छात्र संख्या कुल पचपन होने के बाद भी बाल मेला का आयोजन सफल रहा था सभी ब्च्चे खुश थे प्रधानाथ्यापक आर के वर्मा भी संतोष का अनुभव कर रहे थे पिछली साल इस शाला में दो सौ छात्र छात्रा अध्ययनरत थे नौ शिक्षक कार्यरत थे तब भी बाल मेला इतना सफल नहीं रहा था जितना सफल,आज का आयोजन हुआ था।
पिछले साल रतनपुर का हायर सेकेणडरी स्कूल सी एम राइज स्कूल बन गया था रतनपुर की बालक माध्यमिक शाला को सी एम राइज में मर्ज कर दिया गया मगर कन्या माध्यमिक शाला को छोड़ दिया गया फिर भी परिणाम उल्टा ही रहा कन्या शाला के बच्चे बड़ी संख्या में टीसी लेकर सी एम राइज स्कूल में प्रवेशित हो गए जिससे छात्र संख्या तेजो से गिरी कक्षा एक में तो मात्र दो ही एडमीशन हुए थे। कई कक्षाओं में तो दस से भी कम छात्र बचे थे इसके कारण दो मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोइयों की नौकरी चली गई थी नौ में से चार शिक्षकों का अतिशेष में तबादला हो गया था सी एम राइज के भवन के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा था भवन बन जाने पर यह स्कूल भी मर्ज होने वाला था। जो शिक्षक कार्यरत थे वे भी यह मानकर चल,रहे थे कि स्कूल बंद होने पर उन्हे भी यहाँ से हटना पड़ेगा ऐसे में कक्षा आठ की तीन छात्राएँ, अंजलि मनीषा और जया एच एम श्री वर्मा जी के पास आईं और उनसे बाल दिवस पर बाल मेला आयोजित कराने का आग्रह किया तब वर्मा जी ने कहा इतने कम छात्रों में मेला कैसे सफल होगा तब जया ने कहा सर आप चिंता मत करिए आयोजन अच्छा होगा आप तो अनुमति दीजिए तब वर्मा जी बोले ठीक है तो फिर आयोजन की तैयारियाँ करते हैं। और फिर सब आयोजन की तैयारियों में जुट गए । जब चौदह नवंबर आया तो विद्यालय प्रांगण में बालकों ने अपनी दुकानें सजा ली थीं मेले में बच्चों के पालक भी आए थे छात्र छात्रा एक दूसरे से सामानों की खरीदारी कर रहे थे मेले के समापन के पूर्व एच एम श्री वर्मा जी ने प्रत्येक स्टॉल पर जाकर हर बाल दुकानदार से उसकी बिक्री के विषय में पूछा उनमें कुछ उदास थे उनकी बिक्री संतोष जनक नहीं हुई थी जबकि कुछ बच्चों का पूरा सामान बिक गया था जिनकी बिल्कुल बिक्री नहीं हुई थी उन से सामान शिक्षकों ने खरीदा तथा सभी बच्चों में बाँट दिया जिससे सभी बाल दुकानदारों के चेहरे ख़ुशी से खिल गए थे । मेले का अवलोकन करने बी आर सी सी बी एल सुमन भी आए थे उन्होंने भी आयोजन की प्रशंसा की थी वे तो इतना तक कह गए थे कि सी एम राईज में तो आठ सौ छात्र हैं फिर भी उनका आयोजन इतना अच्छा नहीं रहा जितना अच्छा आपका रहा है। श्री वर्मा जी बी आर सी सी महोदय की सकारात्मक टिप्पणी बहुत अच्छी लग रही थी। आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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