जो लोग अनुचित रूप से धन कमाते हैं वे अभिमान में चूर होकर यह भी भूल जाते हैं कि कभी अगर वक्त ने पल्टी खाई तो उनका अंजाम क्या होगा वे तो यह मानकर चलते हैं कि वो सही हैं बाकी सभी गलत और?ऐसे ही वे सब पर भारी पड़ते रहेंगे और लोग उनसे इसी तरह दबकर रहते रहेंगे । लेकिन जब इनका समय विपरीत होता है तब इनकी हालत आसमान से गिरकर खजूर में लटके रहने वाले की तरह होती है।
ऐसे लोगों को किसी की हमदर्दी भी नहीं मिलती क्योंकि इनके आसपास के लोग सभी इनसे तंग रहते हैं ऐसा कोई नहीं बचता जिनको इन्होंने परेशान न किया हो इसलिए जब इनके बुरे दिन आते हैं तो इनसे पीड़ित लोग बड़े खुश होते हैं । सोचते हैं इन्हें अपनी करनी का फल मिला भले ही देर से मिला हो।
निखिल एक कमाऊ विभाग में सरकारी अधिकारी था उसके विभाग में धन बरसता था लोग वेतन से कई गुना ज्यादा रिश्वत से कमाते थे जिस से उनका परिवार विलासिता का जीवन जी रहा था वे रिश्वत के पैसे बड़ी बेरहमी से वसूलते किसी को फटेहाल देखकर भी उनका मन नहीं बदलता था जब तक रिश्वत के पैसे पूरे नहीं मिल जाते थे तब तक काम को अटकाए रहते थे। सुरेश की बेपी की शादी थी जिसमें खर्च के लिए बीस लाख रुपये जी पी एफ से निकालने के लिए उन्होदने निखिल को आवेदन दिया था। निखिल ने तीस हजार रुपये रिश्वत के माँगे थे। पहले रिश्वत इसके बाद काम सुरेश ने पच्चीस हज़ार की व्यवस्था तो कर ली थी शेष पाँच हजार रुपये मिलने के बाद देने की बात हुई थी। पर निखिल ने पाँच हजार रुपये के पीछे पैसा रोक लिया था। फिर भी सुरेश की बेटी की शादी जैसे तैसे हो ही गई थी। पर सौरेश ने निखिल को सबक सिखाने का निर्मय ले लिया था। उसने निखिल को पाँच हडार रुपये की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त से रंगे हाथों पकड़वा दिया था। निखिल की नौकरी चली गई थी रिश्वत की कमाई तो बंद हुई थी वेतन के ही लाले पड़ गए थे। तीन साल का कारावास हुआ जिसने निखिल की सारी अकड़ ढीली कर दी थी। नाखिल आसमान से गिरकर खजूर में अटका हुआ था जहाँ काँटे चुभकर उसे भारी पीड़ा दे रहे थे।।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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