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व्यंग्य : संबंधों का निर्वाह

कहते हैं कि अगर अच्छे रिश्तेदार से ज्यादा कोई सुख प्रदान नहीं कर सकता । तो वहीं बुरे रिश्तेदारों से अधिक दुखदायी कोई भी नहीं हो सकता। इन रिश्तों में अपने खून के रिश्ते भी शामिल होते हैं।
सबसे निकट का रिश्ता पति पत्नी का माना जाता है पर उनमें भी अगर अहं की लड़ाई हो या किसी एक का स्वभाव खराब हो तो दूसरे की ज़िंदगी नर्क से भी अधिक बदतर हो जाती है एक रिश्ता जीजा साले का भी होता है जिसमें सबसे ज्यादा विवादास्पद रिश्ता साले का समझा जाता है तभी तो किसी को साला कहना गाली समझी जाती है। अगर किसी की तरक्की देखकर सबसे अधिक जलने वालों की सूची बनाई जाए तो उसमें अधिकांश रिश्तेदार ही शामिल होते हुए नज़र आएँगे। हाँलाकि इसमें मतभेद हो सकते हैं पर ज्यादातर लोगों का यही कहना होता है।
अनिल ने एक आवासीय भूखण्ड का सौदा किया था पास में ही उसके साले दीपक का भी मकान था। अनिल से इतनी गलती हो गई कि उसने भूखण्ड की रजिस्ट्री होने के पहले यह बात अपने साले को बता दी। साले ने ऊपरी तौर पर तो ख़ुशी जताई पर भीतर ही भीतर?जल भुनकर खाक हो गया। उसने भूखण्ड के मालिक से मिलकर उसे इतना भड़काया कि उसने भूखण्ड बेचने से इंकार कर दिया अनिल ने खूब समझाया दो लाख रुपये अधिक देने की बात भी कही। पर वो भूखण्ड बेचने को तैयार नहीं हुआ। अनिल को तो उससे अच्छा भूखण्ड मिल गया। लेकिन उस भूखण्ड मालिक के भूखण्ड पर एक दबंग ने कब्जा कर लिया और वो भूखण्ड उसे ओने पौने दाम में बेचना पड़ा बाद में वो भूखण्ड मालिक अनिल से मिलकर बहुत दुखी हुआ तब उसने अनिल के साले की करतूत बताई जिसे सुनकर अनिल को पहले तो विश्वास नहीं फिर उसने जब सारी कड़ी जोड़ी तब भरोसा हुआ तबसे अनिल अपने साले से सतर्क रहने लगा है।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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