जब रात गहरी अंधेरी होती है तब दीपक सबसे महत्वपूर्ण हो जाते हैं उजाले के लिए उनको जलाया जाता है तेज हवा से बुझने से बचाने के लिए कई प्रकार के उपाय करना पड़ते हैं। उनका विशेष ख्याल रखा जाता है । वही दीपक सुब्ह होने पर बुझाकर किसी कोने में रख दिए जाते हैं फिर पूरे दिन उनकी कोई खोज खबर नहीं ली जाती यही बात इंसानों पर भी लागू होती है।
जब कोई आदमी जवान होता है मजबूत होता है ख़ूब पैसा कमाता है पूरे परिवार का खर्च चलाता है तब उसकी बड़ी पूछ परख होती है तब उजाला देते हुए दीपक के समान होता है। वही आदमी बूढ़ा हो जाता है कमाने योग्य नहीं रहता पुत्रों पर आश्रित हो जाता है तब उसकी दशा बुझे हुए दीपक के समान हो जाती है उपेक्षा का शिकार हो जाता है। यह बुझे हुए दीपक जैसे लोग जब आपस में बातचीत करते हैं तब अपने पुराने सुहाने समय में खो जाते हैं जिससे वो कभी उबरना नहीं चाहते इनकी बातों पर बाकी लोग ध्यान नहीं देते किसी के पास इनकी बातों को सुनने की फुरसत नही होती। यही हाल काका धनीराम का था। वे भी बुझे हुए दीपक की तरह हो गए थे। दो लड़के थे जिन्होंने उनकी दोनों दुकानों पर?अधिकार कर लिया था वे खर्च के लिए पैसे भी नहीं देते थे उनकी पत्नी भी बेटों के पक्ष में रहती थी। वे परिवार की तरफ से टूट चुके थे इस लिए नीम के नीचे बने चबूतरे पर बैठकर अपना समय गुजारते थे। वहाँ उनके कई हम उम्र मिल जाते थे सबकी एक सी दशा थी इसलिए आपसे में बात कर अपना मन हल्का कर लेते थे देर शाम तक घर आते थे और फिर बिस्तर पर सोने टले जाते थे।
यह उनकी रोज की दिनचर्या थी। जिसके सहारे वे ठिंदगो जी रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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