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व्यंग्य : बेईमानी

जो ईमानदार होते हैं वे अनुचित तरीके से धन नहीं कमाते उनकी कमाई गाढ़ी होती है भले ही थोड़ी हो यह लोग फिजूल खर्ची नहीं करते किफायत से खर्च करते हैं और ख़ुश रहते हैं इनको अपने धन का अभिमान नही होता न ही ये अनाप शनाप खर्च कर किसी पर रौब जमाते हैं। ठीक इसके विपरीत बेईमानी से धन कमाने वाले होते हैं झूठ से छल कपट छिद्र से किसी की मज़बूरी का अनुचित लाभ उठाकर धन कमाते हैं। अपने पट का दुरूपयोग करते हैं फिर उस धन को अनाप शनाप तरीके से खर्च करते हैं।अहंकार इनमें कूट कूट कर भरा रहता पद के नशे में चूर होते हैं और किसी का भी अपमान कर बैठते हैं।
नितिन एक कमाऊ विभाग में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत था। बिना रिश्वत लिए किसी का कोई काम नहीं करता था। बड़ी बेरहमी से रिश्वत के पैसे वसंल करता था वेतन से कई गुना अधिक उसकी रिश्वत की कमाई थी। गरीब फटेहाल लोगों से भी वो रिश्वत वसूल कर लेता था उसमें इन्सानियत नाम की चीज नहीं थी न जाने कितने गरीब बेबस असहाय मज़बूरी के मारे लोगों की हाय उसे लगी हुई थी। लेकिन समय सदा एक सा नहीं होता वक्त ने पल्टी खाई । लोकायुक्त द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ाया घर में छापा पड़ा सब कुछ जब्त हो गया बैंक खाते सील हो गए। अदालत में केस चला सात साल की सजा हुई नौकरी चली गई ठाट बाट खत्म हो गए जेल की रोटियाँ खानी पड़ी दस हजार रुपये किलो की मिठाई खाने वाले को जेल की रोटियाँ तोड़नी पड़ रहीं थीं सात साल बाद घर आया तो घर ख॔डहर हो चुका था पत्नी ने दूसरी शादी चर ली थी तथा दूसरे पति के एक बच्चे की माँ बन गई थी। उसने नितिन से मिलने से इंकार कर दिया था । 
एक बार ऐसे ही चिंतित होकर कहीं जा रहा था अचानक एक तेज गति कार की चपेट में आ गया। ठीक से इलाज न होने से स्थाई रूप से दिव्यांग हो गया आजकल शहर के चौराहे पर भीख माँगते दिखाई देता है।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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