भावना भावुक मन की पहचान होती हैं जो भावुक होते हैं वे दिल के भी नर्म होते हैं ऐसे लोग दिल से चलते हैं दिमाग का उपयोग कम करते हैं ज्यादातर भावुक लोग भले और नेक इंसान होते हैं।
इनकी नर्मदिली से लोग लाभ उठाने में सफल हो जाते हैं ये लोग भावुक इंसान के सामने अपने आपकी सबसे दुखी बताकर घड़ियाली आँसू बहाकर इनके दिल को पिघलाने में सफल हो जाकी और शराफत का फायदा चतुर चालाक तथा मतलबी उठा लेते हैं । यह भावुक इंसान इस तरह की ठगी के अक्सर शिकार होते हैं। फिर भी इनकी भावुकता कम नहीं होती न ही इनका दिल कभी कठोर होता है। रमेश इसी तरह के भले इंसान थे एक बार वे अपने पूरे माह का वेतन किसी बेटी की शादी के लिए दान कर के आ गए थे और यह भी कह आए थे ये बेटी की शादी के लिए हैं इसे लौटाने की जरूरत नहीं है। उनकी पत्नी सरला को जब यह बात पता लगी तब सिर पकड़कर बैठ गई सरला जानती थी उनकी भावुकता का फायदा उठाया गया है लड़की वाला कोई गरीब फटेहाल नहीं है बल्कि हद दर्जे का चालाक इंसान हैं । उसने रमेश के बड़े भाई राकेश को फोन कर के यह बात बताई राकेश भी उस आदमी की फितरत को अच्छी तरह जानते थे वे अपने कुछ साथियों के साथ आए उसे जब उन्होंने अपने तरीके से समझाया तब वो आधे पैसे लौटाने पर तैयार हुआ वो महीना सरला ने बड़ी तंगी में बिताया इसके बाद जब उन्हें पूरी तनख्वाह मिली तब कहीं उनकी आर्थिक तंगी दूर हो सकी। । जबकि कुछ चालाक टाइप के लोग दूसरों की जेब ढीली कराकर मजे लूटने में कुशल होते हैं। ऐसे लोग अपनी जेब से धेला भर भी खर्च नहीं करते पर बात बनाने में बड़े माहिर होते हैं।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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