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व्यंग्य : हाँ में हाँ मिलाने वाले

जो मतलबी इंसान होते हैं वे सिर्फ अपने मतलब से वास्ता रखते हैं ।इसलिए वे हाँ में हाँ मिलाना बुरा नही॔ समझते और झूठी तारीफों के पुल बाँधते हैं जिससे सामने वाले को अपनी गलतियाँ भी सही लगने लगती हैं जो उससे गहरे नुक्सान में धकेल देती हैं। फिर भी यह उसके चहेते बने रहते सैं जैसे कुछ लोगों की ख़ुशामद करने की आदत होती है वेसे ही कुछ लोग अपनी खुशामद से खुश होते हैं और?अपने आपको श्रेष्ठ और सही मानने का भ्रम पाल लेते हैं।
यह चापलूसी करने वाले आपको हर क्षेत् में मिल जाएँगे सरकारी दफ्तर में बड़े साहब की चापलूसी करने वाला सबसे ख़ास होता है क्योंकि बड़े साहब उसकी हर बात मानते हैं। जो खरीऔर कड़वी बात करता है वो किसी को अच्छा नहीं लगता। एक ऑफिस में एक हितग्राही से बड़े साहब की तीखी तकरार हो गई थी बड़े साहब ने भी कसम खा ली थी चाहे कुछ भी हो जाए इसका काम नहीं करूँगा । उनके इस इरादे को मज़बूती दी उनके चापलूस राकेश ने वो ऑफिस के चक्कर लगा लगा कर थक गया लेकिन उसका काम नहीं हुआ। खैर वक्त ने करवट बदली कोई उसे कलेक्टर साहब के पास ले गया उसकी बात सुनकर साहब पसीज गए उन्होने संबंधित अधिकारी के खिलाफ जाँच कराई तो सारे सबूत सामने आ गए। बड़े साहब की सारी हेकड़ी निकल चुकी थी नौकरी बचाना मुश्किल हो रहा था। आखिर बड़े साहब सस्पेण्ड हो गए जब वे शहर छोड़कर जा रहे थे तब उनको विदा करने कोई नहीं आया वो चापलूस तो नए साहब की चापलूसीं में दिन रात एक कर रहा था। लेकिन नए साहब पर?उसका कोई असर नहीं पड़ रहा था उन्होंने सबसे पहले उस हितगाही के काम कर उसकी दुआएँ ली। और उस चापलूस का ऑफिस से पत्ता साफ ही करा दिया। तथा उससे सलाह लेना शुरू कर दिया जो खरी सही पर कड़वी बात कहता था।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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