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संदेश

गजल****सामने सबके भले बनते रहे हैं।पीठ पीछे वो बुरा करते रहे हैं।सामना कैसे करेंगे शेर का वे । गीदड़ों को देख जो डरते रहे हैं।दोस्तों से हार बैठे मानकर जो।दुश्मनों से खूब वो लड़ते रहे हैं।बिल्डिंगे बनने लगी हैं खूब ऊंची।पेड़ कितने ही हरे कटते रहे हैं।खूब था कश्यप हमें जिन पर भरोसा।दोस्त वे ही उम्र भर ठगते रहे हैं।****रचनाकारप्रदीप कश्यप

गजल **** सर सब्ज नजारे जन्नत के ******** बारिश में सर सब्ज नजारे जन्नत के। दिन आए हैं यार तुम्हारी उल्फत के। काश्मीर की अब तस्वीर बदलना है। खत्म कर दिए मौके सारे दहशत के। जीवन की इस दौ...
गजल सिर क्यों झुकाए हैं। ******************** आप उनके सामने सिर क्यों झुकाए हैं। लादकर जो पाप अपने साथ लाए हैं। है हमें मालूम आगे क्या करेंगे वो। चाल उनकी देखकर ये जान पाए हैं। सामने सबके भल...
गजल तपता रहा ************ जेठ में जो खूब ही तपता रहा। बादलों की ओट ले छिपता रहा। रौब अपना जो दिखाता खूब था। आज क्यों हर ऐक से डरता रहा। चोट खा बैठा नहीं चुपचाप वो। दोगुना ले जोश फिर लड़त...
गजल मेघ तुम कब आओगे ******************** दे रही संदेश धरती मेघ तुम कव आओगे। ढा रहा सूरज कहर जल आप कब बरसाओगे। सूखकर धरती फटी ऐड़ी के जैसी लग रही। कब जखम इसके भरोगे कब मलम मलवाओगे। खेत सब सूखे न...
गजल सामना डटकर करेंगे ***************** तुम्हारा सामना डटकर करेंगे। कभी डरकर नहीं पीछे हटेंगे। लुटाएंगे जिन्हें हम प्यार ज्यादा। वही बेकार में हमसे लड़ेंगे। जहां पे दोस्ती में घात ह...
गजल बात कुछ कहना नहीं ********************* हमको सफाई में हमारी बात कुछ कहना नहीं। लेकिन तुम्हारी बात सुन खामोश भी रहना नहीं। सब छोड़ दें हमको भले परवाह इसकी क्यों करें। रहके वहां उनके सितम ...