गजल
सामना डटकर करेंगे
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तुम्हारा सामना डटकर करेंगे।
कभी डरकर नहीं पीछे हटेंगे।
लुटाएंगे जिन्हें हम प्यार ज्यादा।
वही बेकार में हमसे लड़ेंगे।
जहां पे दोस्ती में घात होगी।
वहीं मौजूद ये धोखे मिलेंगे।
हमें दुनिया भली सुंदर बनाना।
जुटा के प्यार हर दिल में भरेंगे।
जरा सी चोट पीड़ा खूब देती।
तुम्हारे ये सितम कैसे सहेंगे।
तुम्हें चाहे खुशी बेहद मिलेगी।
हमारे दुख नहीं ऐसे घटेंगे।
नहीं ये सिलसिला कश्यप रुकेगा।
नए साथी कई आगे जुड़ेंगे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
भोपाल मध्यप्रदेश
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