नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ आंदोलन चल रहा था आंदोलन का नेतृत्व करने वाले भैयालाल जी जुझारू नेता के रूप में प्रसिद्ध हो चुके थे आंदोलन के पाँचवे दिन नपाध्यक्ष जी ने भैयालाल जी को बुलाया और कहा तुम्हारी छवि बन गई वे बोले हाँ बन तो गई तो खत्म करो आंदोलन भैयालाल जी ने कहा दो दिन और रुक जाइए इसके बाद आंदोलन खत्म हो जाएग उसमें आपका और?हमारा दोनों का लाभ होगा। दर असल जो आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे वे कथित जुझारू नेता नपाध्यक्ष के ही आदमी थे उन्हीं के इशारे पर आंदोलन हो रहा था दो दिन बाद लोगो की सारी माँगे मान ली गईं और आंदोलन खत्म हो गया।
भैयालाल जो को इसका लाभ यह मिला कि वे पार्षद का चुनाव भारी मत से जीत गए और नपाध्यक्ष के सहयोग वे नपा के उपाध्यक्ष बन गए अब दोनों मिलकर जनता को चूना लगा रहे हैं और?जनता अपने आपको लुटी ठगी समझ रही है।
शहर में इस तरह के आंदोलन वीर बहुत से नेता हैं जो इसकी आड़ में अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं यही लोग फिर दलाल बनकर रिश्वत खोरों की दलाली करते हैं तथा मौज उड़ाते है ये कथित जो जन हितैषी लोग हैं उनका जनता के हितों से कोई लेना देना नहीं बस उनका काम बनता रहे बाकी सब तो चलता ही रहता है। ऐसे लोगों की बढ़ती संख्या के कारण जनता अपने को नेतृत्व विहीन भहसूस करने लगी है पुराने आदर्श और मूल्य गुजरे जमाने की बात हो गए है। अब तो सेटिंग से काम चलाया जा रहा है भीड़ जुटाने वाले का बड़ा बोलबाला है। भीड कैसे जुटाई जा रसी है इस पर किसी का भी ध्यान नहीं है । भीड अपने आप नहीं हो रही है इसको जुटाने के हथकण्डे अपनाए जा रहे हैं।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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