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व्यंग्य: बने बनाए काम बिगाड़ने वाले

आज के इस दौर में जहाँ सच्चे हितैषी दोस्त बहुत कम मिलते हैं दुशूमनी को गहराई में छिपाकर दोस्ती का दिखावा करने वाले बहुत ज्यादा मात्रा में मिल जाते हैं यह हमारा इस तरह से नुक्सान पसुँचाते हैं जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर पाते। इनमें बने बनाए काम बिगाडने वालों की संख्या भी कम नहीं है।
वर्मा जी की बेटी निशा विवाह योग्य थी । उसको देखने के लिए लड़के वाले आ रहे थे। उन्होंने इसका जिक्र अपने मित्र अशोक से किया और कहा कि कल आप और भाभीजी हमारे साथ रहेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा रिश्ता तो लगभग पक्का ही है बस औपचारिकता शेष है। 
लडके वाले आए लड़की उन्हें पसंद थी। थोड़े समय के लिए वर्मा जी की पत्नी ने वर्मा जी को परामर्श के लिए बुला लिया मात्र पाँच मिनट का अवसर अशोक दंपत्ति को मिला जिसमें उन्होंने अपना कमाल दिखा दिया और होता हुआ रिश्ता टूट गया। उनकी पत्नी ने लडके की माँ से कहा लडकी की अपने माँ से बिल्कुल नहीं बनती और लड़की को कोई काम भी नहीं आता। अशोक जी ने लडके के पिता से कहा वर्मा जी के पास खूब पैसा है मुँह माँगा दहेज लेना नहीं दें तो रिश्ता तोड़ देना हमारे पास इससे कई गुना अच्छी लड़की विवाह योग्य है वे बहुत दहेज भी देंगे। इतने में वर्मा जी आ गए। तब तक अशोक जी अपना काम पूरा कर चुके। थे अब लडके वालों ने पच्चीस लाख रुपये और बीस तौला सोने की माँग रख दी वर्मा जी ने उन्हें समझाने की खूब कोशिश की मगर नाकाम रहे। यह देखकर अशोच दंपत्ति मन ही मन बहुत खुश हो रहे थे वे अपने मकसद में कामयाब जो हो चुके थे। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने दोस्तों के साथ होने पर बैठे ठाले किसी से भी झगड़ा मौल ले लेते हैं और सबको परेशानी में डाल देते हैं। ऐसे विध्न संतोषी लोगों से दुनिया भरी पड़ी है। आए दिन हमारा इनसे सामना होता रहता है।



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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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