दुनिया में ऐसे लोगों की भी अच्छी खासी संख्या है जो मुँह पर तो मीठी चिकनी चिपड़ी बातें करते हैं पर भीतर इनके कपट कषाय भरा रहता है इनके लिए एक कहावत बड़ी प्रचलित है गुड़ भरा हँसिया यह लोग जो अपने दिल में दुश्मनी को छिपाकर रखते हैं उसका किसी को अहसास तक नहीं होने देते जब इन्हें अपनी कसर निकालने का मौका मिलता है तब पता चलता है। तब तक बड़ी देर हो चुकी होती है। है और वे अपने मक़सद में कामयाब हो जाते हैं।
ऐसे ही एक रिश्तेदार से पीडित हमारे परिचित विनोद कुमार जी से बात हुई । वे बड़े दुखी दिखाई दे रहे थे। हमने उन्हें जरा सा कुरेदा तो कहने लगा जीवन में इतना अपमान कभी नहीं सहा जितना पिछले पाँच दिनों में सहन करना पड़ा। वो तो अपने आपको काबू में रख रखा था अन्यथा कुछ भी हो सकता था। फिर उन्होंने विस्तार से अपनी बात कहते हौए कहा कि हमारे साढ़ू भाई की लड़की का सगाई समारोह था उसमें शामिल होने के लिए उनकी ओर से बहुत आग्रह किया गया था। उनकी लड़की बार बार फोन कर के कह रही थी मौसाजी आपका आना जरूरी सै आप नहीं आओगे तो मैं भी कार्यक्रम नहीं होने दूँगी इसी तरह की बात उनका लड़का भी कर रहा था बड़ सास बी आग्रह कर रही थी। हमें पता नहीं था कि यह हमें अपमानित करनू के लिए बुला रहे हैं। हम अपने आवश्यक काम छोड़कर उनके आयोजन में शामिल हुए
वहाँ आने के थोड़ी देर बाद ही हमें अहसास हो गया कि हमसे बहुत बड़ी भूल हो गई । वहाँ हमारा अपना कोई नहीं था सब मिलकर हमारा अपमान कर रहे थे और हम कड़वा घूँट पीकर हँस रहे थे हमें लड़ाई के लिए उकसाया जा रहा था। वो सब एक थे और हमसे आर पार की लड़ाई के मूड में थे । हम तीन दिन तक यह सब बर्दाश्त करते रहे चौथे दिन हमने सुना कि हमारा साढ़ू भाई अपने लड़के से कह रहा था कल मौका देख के अपने मौसा को धक्का देकर छत से गिरा देना जब इसके साथ पैर टूटेंगे तब कलेजे को ठंडक मिलेगी। हमने यह बात सुनते ही समय गँवाए बिना रेल्वे स्टेशन की राह पकड ली ओर अपने घर आ गए दूसरे दिन हमारा साढ़ू भाई फोन पर हमसे फिर चिकनी चिपडी बात करने लगा। हमने चुपचाप फोन रख दिया हम उनसे हमेशा के लिए रिश्ता खत्म करने का मन बना चुके थे। उनकी बात सुनकर हम भी सोचने को मजबूर हो गए कि जो खुल के दुश्मनी करे उससे तो निपटा जा सकता है पर जो दुश्मनी को छिपाकर दोस्ती का दिखावा करे उनके दंश से कैसे बचोगे ।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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