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व्यंग्य: काम बिगाड़ने वाले लोग

दूसरों का बनता हुआ काम बिगाड़ने वाले लोगों की दुनिया में कोई कमी नहीं है ऐसे लोगों में कुई बार अपने खास सगे संबंधी यहाँ तक की दोस्त भी शामिल होते हैं यह जब आमने सामने होते हैं तो एक दूसरे से बडी गर्मजोशी से मिलते हैं उन्हें देखकर कोई यह अंदाज नहीं लगा सकता कि यह एक दूसरे के घोर?दुश्मन है तथा नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ते पुराने ज़माने का भाईचारा खत्म होता जा रहा है उसके स्थान पर स्वार्थ के रिश्ते बनने लगे हैं जिसमें सच्चे प्रेम की कमी होती है।
शहर की एक कॉलोनी में प्रेम नारायण जी ने एक मकान खरीदा जिसकी भनक उन्होंने किसी को भी नहीं लगने दी उसी कॉलोनी में उनके निकटतम संबंधी ओम प्रकाश जी भी रहते थे । प्रेम नारायण जी जब गृह प्रवेश की तैयारियाँ कर रहे थे तब ओम प्रकाश को पता चला कि यह घर उन्होंने खरीद लिया है तो उनके कलेजे पर साँप लोट गया उन्हें इसी बात का दुख था कि इसकी खबर उन्हें पहले क्यों नहीं लगी अगर लग जाती तो वो यह घर प्रेम जी को कभी खरीदने नहीं देते जिस भाव में प्रेम जी ने ये घर खरीदा था उस भाव को सुनकर तो उनकी बेचैनी ओर अधिक बढ़ गई वो घर उनके घर से काफी बड़ा और अच्छा था । रात भर उन्हें नींद नहीं आई सुब्ह होते ही वे सीधे उसके पास पहुँचे जिसने ये घर बेचा था उससे बोले बहुत सस्ते में बेच दिया यार तुमने ये घर?अरे हमसे मिले होते तो हम इसे और अच्छी कीमत में बिकवाते वो आदमी ये अच्छी तरह जानता था कि उसका घर ये नहीं बिकने दे रहे थे फिर भी वे यह बात छिपाकर बोले अब तो उसकी रजिस्ट्री ही हो गई अब कुछ नहीं हो सकता यह सुनकर वे अपना मन मसोस कर घर आ गए और कर भी क्या सकते थे ऐसे लोगों से आजकल भुक्त भोगी सतर्क रहने लगे हैं फिर भी ये दंश चुभाने का मौका ढूँढ ही लेते हैं पहले लोगों के पड़ोसियों से अच्छे संबंध होते थे आजकल एक दूसरे के वे जानते पहचानते ही नहीं हैं । ऐसी एक घटना याद आ रही हैं जिसमें चोर दिन दहाड़े ट्रक लेकर आए एक घर का ताला खोला सारा सामान उस ट्रक में लादा और चलते बने पड़ोसी यह सब होते देखता रहा उसने उन चोरों से किसी प्रकार की बात करना बभी उचित नहीं समजा दूसरे दिन जब उस घर के मालिक आए तो घर का पूरा सामान गायब देखकर माथा पकड़ कर बैठ गए इसे देखकर ऐसा लग रहा है कि हमारा समाज संवेदना शून्य होता जा रहा यह ठीक नहीं है इस पर विचार करने की जरूरत है।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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