आज के युग भी लाठी की अहमियत से कोई इंकार नहीं कर सकता। यह निर्विवाद सत्य है कि लाठी मनुष्य का सबसे प्राचीन हथियार हैं लाठी को लेकर कई कहावतें प्रचलित है। जिसकी लाठी उसकी भैंस । अंधे की लाठी बुढ़ापे की लाठी आदि। पहले दबंग लोग लठैत लेकर चलते थे आज के दौर में लाठी का रूप थोड़ा बहुत बदल गया है पर?आज भी साधारण लाठी की उपयोगिता बनी हुई है ।
चार मित्र सुबह की सैर को जा रहे थे रास्ते में उन्हें एक बिगड़ैल साँड मिल गया उसने सुखलाल जी को छोडकर सब पर हमला कर दिया सुखलाल जी ने उनको जैसे तैसे बचाया। आगे चलकर एक गली का कुत्ता उन्हें देखकर गुर्राने लगा वो सुखलाल को छोड़कर तीनों पर भौंक रहा था वे तीनों सुखलाल के पीछे छिपकर बचे । सुखलाल जी ने उस कुत्ते को डराकर भगा दिया। सुखलाल जी में ऐसा क्या था ?
आप सही समझे उनके पास लाठी थी जिसका सहारा वे अक्सर चलने में लेते थे । आप किसी पुलिस के जवान की बिना लाठी के ड्युटी करने की कल्पना तक नहीं कर सकते आज भी पुलिस आक्रामक भीड़ को लाठी से ही काबू में करती है। बंदूक और कई घातक हथियारों के बाद भी लाठी का महत्व कम नहीं हुआ है।पशुपालकों का काम तो आज भी लाठी के बिना नहीं चलता। लाठी का लघुरूप छड़ी होता है जो प्राचीन काल से लेकर अब तक शिक्षकों के हाथ की शोभा बढ़ा रही है । सरकार ने जबसे बच्चों की पिटाई पर रोक लगाई है तबसे शिक्षक छड़ी का प्रयोग पढ़ाई को सुगम बनाने में करने लगे हैं। लाठी की चर्चा करें और कवि गिरधर की याद न आए ऐसा कैसे हो सकता है। गिरधर जी ने अपने कुंडलिया छंद में लाठी के विषय में क्या खूब लिखा है लाठी में है गुण बहुत सदा राखिए संग ।
लाठी वो है जो आखिरी दम तक साथ निभाती है । पतवार के रूप में नाव खेने में काम आती है लाठी को झुकाकर उसके दोनों सिरों पर डोरी चढ़ाकर धनुष बनाया जाता है वो भी लाठी का ही कमाल कहा जाएग। अर्जुन धनुष की सहायता से ही तो महाभारत का युद्ध जीत सके था पुराने ज़माने में कलम भी लाठी की सहोदर हुआ करती थी।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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