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व्यंग्य: विषैले कटाक्ष

जो विनोद प्रिय होते हैं वे हास परिहास से माहौल को खुशनुमा बनाए रखते हैं लेकिन कुछ लोग चुभते हुए कटाक्ष से आहत कर देते हैं कुछ कटाक्ष तो इतने विषैले होते हैं जो संबंधों को हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं ये मरे हुए संबंध फिर कभी जीवित नहीं होते।
रमेश और नरेश कभी अच्छे दोस्त थे आज वे एक दूसरे के दुश्मन हैं। उसका कारण भी विषैले कटाक्ष ही हैं ।छोटी सी बात पर उन दोनों में मतभेद हो गए थे जिन्हें खत्म भी किया जा सकता था रमेश जी ने तो अपनी तरफ से खत्म भी कर दिया था पर नरेश जी ने उसे अपने दिल पर ले लिया था और वे जब मौका मिलता रमेश जी को उलाहना देने लगते खूब ताने कसते एक बार तो अति हो गई जब नरेश जी ने रमेश जी खास अपने मित्रों के बीच में तानों कटाक्षों से अपमानित करना शुरू किया नरेश जी ने उन्हें उपहास का केन्द्र बना दिया। रमेश जी उस दिन बहुत आहत हुए इतने आहत कि उसी दिन उनकी दोस्ती का अंत हो गता। आज पूरे चार वर्ष हो गए हैं उनके बीच में बोलचाल पूरी तरह से बंद है परिहास गुदगुदाने वाला हो तो सबके मनोरंजन का हेतु बन जाता है और अगर नौचने खसोटकर आहत करने वाला हो तो संबंधों को खत्म कर देता है। दूसरों को हँसाने के लिए किसी एक की भावनाओं को ठेस पहुँचाना अच्छी बात नहीं है। ऐसी कोई बात नहीं कही जाए जो संबंधों को ही खत्म कर दे। हमें अगर सबको अपना बनाना है तो ऐसी स्थिति को निर्मित नहीं होने देना ही बेहतर है। संबंध खत्म कर के अच्छे दोस्त को खोने से बडी कोई क्षति नही हो सकती हास्य प्रेमी सभी होते हैं हँसाना और हँसाना जीवन को ऊर्जा प्रदान करता है। हँसी मजाक खूब करो खुलकर करो जी भरकर हँसो और हँसाओ माहौल को खुशनुमा बनाओ। लेकिन मतभेद मत पैदा होने दो दोस्ती पर किसी भी कारण से आँच नहीं आने देना चाहिए।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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