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व्यंग्य: बातों की कमाई खाने वाले

भैयालाल जी ने दसवीं में तीन बार फेल होने तथा पिताजी द्वारा नकारा निकम्मा और धरती का बोझ बनने वाला प्रमाण पत्र लेने के बाद अपने केरियर की शुरूआत की थी आज भैयालाल शहर के  संपन्न एवं दमदार लोगों में गिने जाते थे।  जबकि भैयालाल जी के पिताजी अपनी पेंशन से  अपने बड़े  होनहार एम बी ए पास बेटे  हरिलाल का परिवार भी पाल रहे थे हरिलाल को होनहार बेटे का प्रमाण पत्र भैयालालजी के पिताजी ने ही प्रदान किया था।  हरिलाल एम बी ए करने के बाद भी पन्द्रह हजार रुपये महीने की नौकरी कर रहा था । वो नौकरी भी भैयालाल जी के रहमो करम पर उसे मिली थी जबकि भैयालालजी लाखों रूपया महीना कमा रहे थे।
भैयालाल जी को आठ साल पहले पिताजी ने  नकारा कहकर घर से निकाल दिया था तथा उससे अपने सारे संबंध तोड़ लिए थे क्योंकि जब भैयालाल जी ने तीसरी बार भी  दसवीं फेल की थी तब हरिलाल ने  अस्सी प्रतिशत अंकों से हायर सेकेण्डरी परीक्षा पास की थी।  ऐसे में भैयालाल जी उन्हें कुल का कलंच नजर?आ रहे थे। घर से निकाले जाने पर भी भैयालाल जी को जरा भी दुख एवं अफ़सोस नहीं था। भैयालाल जी हद दर्जे के  चालाक चपल और बातुनी इंसान थे   उन्होंने दलाली कमीशन   और लोगों के अनुचित तरीके से काम कराने के क्षेत्र में कदम रखा इससे उनके पास धन की बारिश होने लगी और वे देखते ही देखते खूब पैसे वाले बन गए साथ ही प्रभाव शाली  भी।
अपने पिताजी का तबादला उनके प्रयास से रुका भाई को नौकरी उन्होंने लगबाई।  आज  पिताजी उन्हें देखकर शर्मिंदा होते हैं भैयालाल जी ने लव मैरिज  कॉलेज में कार्यरत  प्रोफेसर लडकी से की थी।  यह देखकर तो उनके पिताजी हैरत से भर गए थे ।
भैयालाल जी जैसे बतौले बाज चालाक चपल लोग  आज समाज के महत्व पूर्ण इंसान बने हुए हैं ।कम पढ़े लिखे हुए होने के बाद भी ये पढ़े लिखों को मूर्ख बनाने में सफल हो जाते हैं इनकी राजनीती में भी तगड़ी पैठ होती है । जिससे ये  कुछ अधिकारियों पर भी  रौब जमाने में सफल हो जाते हैं।  ऐसे ही एक चालू चपल आदमी ने  बिना कुछ किए ही पाँच लाख रुपये तबादले में कमा लिए  सिर्फ आठ गंटे पहले लिस्ट हासिल कर लेने पर।
इस से अधिक फायदा और कौन से धंधे में हो सकता है । जब तक समाज में भ्रष्टाचार रहेगा तब तक भैयालाल जी जैसे लोग खूब मौज करेंगे।  और लोगों को मूर्ख बनाकर अपनी जेबें भरते रहेंगे।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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