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व्यंग्य: झूठे सपने दिखाने वाले

झूठे सपने दिखाकर अपना मतलब हल करने वाले बहुत लोग हैं इनमें न कोई गुण है न हुनर बस बात बनाने में ये माहिर हैं। ये लोग झूठे प्रलोभन दिखाते हैं झूठे दावे करते हैं और लोग इनकी बातों में आकर अपना समय और पैसा गँवा बैठते हैं किसी को ग्रहों की महादशा का भय दिखाकर तो किसी को भविष्य की दुर्घटनाओं का झूठा डर दिखाकर उनकी शांति के उपाय के नाम पर भारी रेंकम ऐंठने में इन्हें जरा भी संकोच नहीं होता। इन पर नकेल कसने वाला कोई नहीं होता और ये बेलगाम होकर अपनी भनमानी करते रहते हैं।
ऐसा ही एक उदाहरण याद आ रहा है निकट के एक शह से हर शनिवार को कुछ लोग ट्रेन से भोपाल आकर दिन भर भविष्य बताने ग्रहदशा सुधारने के नाम पर खूब पैसा कमाकर रात की ग्यारह बजे की ट्रेन से वापस अपने नगर को लौट जाते थे इनमें से ज्यादातर लोग कम पढ़े लिखे छोटे मोटे काम करके अपना जीवन यापन करने वाले होते थे शनिवार को ये अपना स्वरूप बदल देते थे कोई उन्हें देखकर यह अंदाजा ही नहीं लगा सकता था कि पढ़े लिखों को मूर्ख बनाने वाले ये लोग खुद लगभग अनपढ़ हैं । इसमें से एक ने शहर के बड़े अधिकारी की पत्नी को अपनी बातों के जाल में उलझाकर पच्चीस हजार रुपये तथा ढाई तौले सोने की चैन ऐंठ ली और चलता बना रात को दस बजे जब वो घर आए तब पत्नी ने सारी बात यह कह के बताई कि अब अपनी सारी परेशानी दूर हो जाएँगी मैंने इसके लिए अनुष्ठान कराया है अधिकारी को सारी बात समझते देर नहीं लगी उन्होंने फौरन अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ट्रेन आने से पहले सबको थाने बुला लिया सब उसे कोस रहे थे जिसने अधिकारी जी की पत्नी को ठगा था उसे उन्होंने पुविस के सवाले किया तब कहीं उनका पीछा छूटा । इसके बाद भी उनका हर शनिवार का आना बदस्तूर जारी है और इस से वो खूब रुपया भी काम रहे हैं कुछ लोग देशी इलाज के नाम पर लूट रहे हैं इनमें ज्यादातर लोग पाँचवी पास भी नहीं होते कोई सी भी पत्ती जडी को ये असाध्य?बीभारी का राम बाण इलाज बताकर धन ऐंठ लेते हैं कुख जादू टोना के नाम पर रकम ऐंठ रहे हैं किसी ने खूब कहा है कि जब तक रोगी भोगी दुनिया में रहेंगे तब तक इन जैसे लोग खूब फलते फूलते रहेंगे।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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