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व्यंग्य: कायदा तोड़कर ख़ुश होने वाले

नियम कानून कायदे का पालन करना अच्छी बात है पर कुछ लोग ऐसे भी मिल जाएँगे जो कायदा तोड़कर ख़ुश होते हैं ऐसा करने से उन्हें अद्भुत आनूद की प्राप्ति होती है फिर यह सब पर झूठा रौब दिखाते हैं। यह टू व्हीलर भी ऐसे चलाते हैं जैसे हवाई जहाज उड़ा रहे हो वो भी बिना हेलमेट पहने यह लोग अपने जीवन से खिलवाड़ करते हैं। और असमय ही काल के गाल में समाकर अपने परिजनों को जीवन भर का दुख दे जाते हैं।
हमें हमारे मोहल्ले के विनोद बाबू घबराए हुए आते दिखे हमने उनकी घबराहट का कारण पूछा तो वे बोले मौत का सामना करके आ रहा हूँ । हमने कहा कैसे वे बोले अजय जी के लड़के अनिकेत की बाइच पर बैठने की गलती कर दी । हमारे बैठते ही उसने बाइक की गति अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दी हमारी एक न सुनी ट्रेफिक सिग्नल भी तोड़कर निकल गया हमारी तो घिग्घी बँध गई हमें ऐसा लगा जैसे हमारा आखिरी समय आ गया हो गंतव्य पर पहुँचने के बाद जान में जान आई। हम से वो यह कहकर गया कि कहीं जाना हो अंकल तो बता दिया करो। हमने तो तय कर लिया था कि हम इसकी बाइक पर पहली और आखिरी बार बैठ रहे हैं अगर बच गए तो फिर कभी इसकी बाइक पर नहीं बैठेंगे। विनोद जी बताने लगे सुरेश जी का लड़का सौरभ जब अठारह वर्ष का हुआ तब उन्होंने उसे चौदह लाख रुपये की कीमत वाली बाइक दिलाई और दूसरे ही दिन वो हाई स्पीड से बाइक चला रहा था डिवाइडर से बुरी तरह टकराया और मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया। सुरेश जी क तभी से मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया है ।उनकी पत्नी की हालत भी पागलों जैसी हो गई है। यह दुस्साहसी लोग अक्सर जान जोखिम में डालकर खतरों से खेलते हैं और अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं कुठ लोग ऐसे होते हैं जिनका हेलमेट बाइक पर टँगा रहता है और वे बिना हेलूमेट के ही गाड़ी चलाते हैं।
मजे के लिए साँप की बाँबी में हाथ डालने वालों को जान के लाले पढ जाते हैं फिर मान प्रतिष्ठा पद धन संपत्ति कुछ काम नहीं आते ऐसे लोगों की जान धन का अंबार भी नहीं बचा सकता। ऐसी कितनी ही घटनाएँ घट चुकी हैं फिर भी लोग इनसे सीख नहीं लेते और आए दिन हादसों का शिकार होते रहते हैं।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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