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कहानी: माँ या नौकरानी

शारदा दो साल अपने बेटे बहू के घर में रहकर पाँच साल पहले अपने घर वापस आ गईं थी उनके पति  दीनानाथ  के साथ वे सुखपूर्वक रह रहीं थीं दीनानथ जी को जो पेंशन मिलती थी उसमें दोनों का गुजारा आराम  से चल रहा था इसके अलावा उनके  पास एक बड़ा मकान भी था जिसमे चार किरायेदार रहते थे । उनसे उन्हें बीस हजार रुपया  हर महीने किराये के रूप में मिलते थे। कुल मिलाकर वे दोनों खुश थे और एक दूसरे का ख्याल रख रहे थे। दीनानाथ जी की उम्र पिचहत्तर वर्ष की थी  तथा शारदा की उम्र बहत्तर वर्ष।
शारदा को सात वर्ष पहले का  वो समय अच्छी तरह याद है जब उनका बेटा रोहन उनसे चिकनी चिपड़ी बातें कर के उन्हें अपने साथ कलकत्ता ले गया था।  रोहन की पत्नी निशा भी नौकरी करती थी और रोहन भी नौकरी कर रहा था।  निशा को सात माह का गर्भ था  माँ के आने के पहले रोहन और निशा ने नौकरानी की छुट्टी कर दी थी शारदा बहुत सरल स्वभाव की महिला थीं उनमें रोहन और निशा की तरह छल कपट नहीं था।  वे निशा की खूब सेवा कर रही थीं दिन भर घर का सारा काम करतीं और रात को थककर चूर हो जातीं कोई उनके पैर दबाने वाला भी नहीं था फिर भी खुशी से वो सबकी सेवा कर रहीं थीं।  शारदा के पति दीनानाथ अकेले  ही कानपुर में रह रहे थे। टिफिन सेंटर से खाना आ जाता था सुबह सैर को निकल जाते थे और शाम दोस्तों के बीच कटती थी।  शारदा रोहन के पास रह रही थी इसलिए वे आधी  मकान किराये की राशी तथा आधी  पेंशन की राशि रोहन को हर माह भिजवा देते थे। बदले निशा  उन्हें बचा हुआ बासी खाना खिलाती थी जो रोटी सब्जी वे बनाती थीं वे ताजी और गर्म बहू बेटे खाते थे उनको तो शाम को सुबह का बचा खाना  तथा सुबह रात का बचा खाना दिया जाता था और वो उस खाने  को भी खुशी के साथ खा लेतीं थी। शारदा उन्हें अपने उतरे हुए कपड़े पहनने को देती थी। बेटे के घर इसी तरह रहते हुए उन्हें आठ महीने  हो गए थे उनका पोता रिंकू छः महीने का हो गया था।  उनके मन में ख्याल आया कि अब अपने पति दीनानाथ का पास जाना चाहिए जब उसने रोहन से यह बात कही तो रोहन घबरा गया निशा के चेहरे पर भी हवाइयाँ उड़ने लगीं एक मुफ्त की नौकरानी उन्हें छोडकर जाना चाहती है शारदा के जाने से जो दीनानाथ की ओर से बीस हजार रुपये प्रतिमाह मिलते थे वे भी बंद होने वाले थे जो खाना उन्हें दिया जा रहा था वो तो मुहल्ले के कुत्ते भी नहीं खाते थे। नौकरानी भी पुराने कपड़े नहीं लेती थीं और निशा उन्हें अपनी उतरन पहनने के लिए देती थी।  जब शारदा ने ज्यादा जिद की तब मजबूर होकर रोहन ने  उनका ट्रेन में  टिकट का रिजर्वेशन करा दिया। वे कानपुर आ गईं दीनानाथ जी उन्हें देखकर बड़े खुश हुए  वे बहुत दुबले और कमजोर दिखाई दे रहे थे।  शारदा ने उनके खाने पीने पर ध्यान देना शुरू किया ही था कि सात दिन बाद रोहन उन्हें लेने के लिए आ गया  बोला मम्मी रिंकू का रो रोकर बुरा हाल है वो आपको बहुत मिस कर रहा है शारदा दीनानाथ की तरफ देखा तो वे बोले चली जाओ रोहन के साथ कलकत्ता  मैं अपना ख्याल रख लूँगा । वे रोहन के साथ आ गईं निशा के चेहरे पर कुटिल मुस्कारहट थी उसने आया और नौकरानी की  छुट्टी कर दी थी। इस तरह बेटे के पास रहते हुए उन्हें दो साल हो गए थे। तभी शारदा को खबर लगी की दीनानाथ की तबियत बहुत खराब है सुनकर वे घबरा गईं और कानपुर जाने की जिद करने लगीं।  निशा और रोहन उन्हें कानपुर नहीं जाने दे रहे थे। रोहन को अपने पिता की बीमारी से भी कोई मतलब नहीं था।  वे छत पर चली गईं थीं। थोड़ी देर घूमने के बाद वे छत से उतरकर नीचे आ गईं  तो देखा कि रोहन और निशा आपस में बातें कर रहे हैं रोहन कह रहा था ये बुढ्ढा मर क्यों नहीं जाता वे छिपकर उनकी बातें सुनने लगीं निशा कह रही थी तुम्हारी माँ जैसी नौकरानी कलकत्ता में मिलना मुश्किल है और वे अगर चली गई तो बीस हजार रुपये का नुक्सान होगा वो  अलग आया और नौकरानी पर तीस हजार रुपये खर्च हर महीने खर्च करना  पड़ेंगे बचा हुआ खाना भी कचरे में फिकेगा। निशा क्रूरता की हद पार  कर बोली मेरा बस चले तो मैं उस बुढ्ढे को जहर देकर मार दूँ। रोहन सुनकर कुछ नहीं बोला।  शारदा तो यह बात सुनकर सन्न रह गई वो दीनानाथ को बहुत चाहती थी उनके बिना जीने की वो कल्पना तक नहीं कर सकतीं थीं। यह बात सुनकर उन्होंने कानपुर जाने का कड़ा इरादा कर लिया था।  उन्होंने बहू बेटे की एक नहीं सुनी  और कानपुर आ गईं  तो देखा की दीनानाथ जी गँभीर रूप से बीमार हैं।  वो सब कुछ भूलकर उनकी सेवा में लग गईं उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टर ने यही कहा कि अगर इन्हें दो दिन बाद लाया जाता तो इनकी जान बचाना मुश्किल हो जाता।  दस दिन तक दीनानाथ जी अस्पताल में भर्ती रहे इस बीच रोहन आया रोहन उन्हें देखने के लिए नहीं बल्कि माँ को लेने आया था।  शारदा ने पति  को इस हाल में छोड़कर जाना मंजूर नहीं किया तिलमिलाता हुआ रोहन वापस चला गया पन्द्रह दिन बाद फिर आया तब तक दीनानाथ जी की अस्पताल से छुट्टी हो गई थी शारदा की देखभाल से वे तेजी से ठीक होते जा रहे थे।  रोहन ने फिर माँ से कलकत्ता चलने को कहा लेकिन शारदा ने मना कर दिया  रोहन बोला भी कि तुम्हारे  जाने के बाद नौकरानी रखी थी वो रिंकू को अफीम खिलाकर सुला देती थी एक दिन घर से दस लाख रुपये का सामान नगदी चुराकर जो गई तो आज तक उसका अता पता नहीं चल पाया। रोहन की यह बात सुनकर भी शारदा नहीं पसीजीं तो रोहन किरायेदारों को धमकाने लगा कहने लगा इस माह का किराया मुझे देना  नहीं तो मकान खाली करने की नौबत आ जाएगी। सुनकर किरायेदार भी हैरान हो गए।  रोहन पैर पटकता हुआ वहाँ से निकल गया। फिर कभी कानपुर नहीं आया।शारदा पति की तीमारी करती रही जिससे वे जल्दी ही ठीक होने लगे। रोहन और निशा ने उनसे इसके बाद कोई संपर्क नहीं किया आज शारदा को पूरे पाँच वर्ष हो गए थे कानपुर आए। अब रोहन और उसके परिवार से शारदा जी का कोई मोह नहीं रह गया था ।
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ररनाकार
प्रदीप कश्यप


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