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कहानी: दूसरी क्रूर माँ

अमित अपनी सौतेली माँ अनीता का बुढ़ापे में सगे बेटे से बढ़कर ख्याल रख रहा था। अनीता का सगा बेटा तो उसे  उज्जैन रेल्वे स्टेशन पर छोड़कर चला गया था अनीता एक रात और पूरे दिन उसके आने की प्रतीक्षा करती रही थी भूख और प्यास से उसका बुरा हाल हुआ था अमित  अपने मित्र को रोहन को छोड़ने रेल्वे स्टेशन पर आया था तब उसने माँ को घबराई हुई हालत में स्टेशन की बैंच पर बैठे देखा था। वहाँ से वो माँ को अपने घर ले आया था आज माँ को पूरे पाँच साल हो गए थे अमित के पास रहते वो रोज अमित और उसकी अमिता को खूब दुआएँ दिया करतीं थीं अब उनकी उम्र अठहत्तर वर्ष होने जा रही थी। अमित के पिता दौलतराम जी का निधन हुए आठ वर्ष हो गए थे। अमित को अच्छी तरह से याद है जब वो सात वर्ष का था तब उसकी सगी माँ नीता का डिलेवरी के दौरान निधन हो गया था। जब वो आठ वर्ष का हुआ तब उसके पिता दौलतराम जी ने अनीता से शादी कर ली अनीता ने अमित को तीन साल तक तो अच्छे से रखा फिर जब उसके बेटे सुमित का जन्म हुआ तो उसकी सारी ममता अपने सगे बेटे तक सिमटकर रह गई थी छः महीने तक सुनीता ने अमित के ऊपर वो अत्याचार किए थे कि अगर अमित किसी को वो दास्ताँ सुनाता तो उसकी आँखों में आँसू आ जाते थे। दौलतराम अपने बेटे की गिरती हालत देखकर चिंतित होते थे एक दिन पड़ोसन विमला ने दौलतराम जी से कहा हमसे देखा नहीं जाता आपके जाने के बाद अनीता आपके बड़े बेटे पर खूब जुल्म ढाती है। उन्होंने अमित को घर से दूर ले जाकर जब  उससे सारी बात पूछी तब उसने कहा कि माँ मुझे मारेगी दौलतराम जी बोले बेटा मैं अब तेरे साथ ऐसा कभी नहीं होने दूँगा और जब अमित ने माँ के अत्याचार के विषय में बताना शुरू किया तो उनकी आँखों से आँसू टपकने लगे। बोले बेटा तुम इस साल पाँचवी की परीक्षा दे रहे हो इसी शहर में तुम्हारी मौसी रहती है पाँच महीने तक तुम वहीं रहो और दूसरे ही दिन वे उसे उसकी मौसी शारदा के पास छोड़ आए वहीं से उसके स्कूल जाने आने की व्यवस्था भी उन्होंने कर दी थी नवोदय विद्यालय की चयन परीक्षा में भी दौलतराम ने अमित को शामिल करा दिया था मौसी के यहाँ उसे पढ़ाई का पूरा अवसर हासिल हुआ जिसके फायदा सुमित ने उठाया वो पाँचवी पास होने के साथ ही नवोदय की परीक्षा में क्वालीफाई हो गया था। दौलतराम जी ने अमित के भविष्य का ख्याल रखते हुए भारी मन से उसे नवोदय विद्यालय में छोड़ दिया। इसके बाद दौलतराम जी ने अमित को कभी अनीता से नहीं मिलने नहीं दिया। नवोदय से बारहवीं पास करने के बाद उसका चयन मेडिकल कॉलेज में हो गया वहाँ वो होस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई करने लगा पाँच साल में एम बी बी एस करने के बाद उसकी नियुक्ति सरकारी अस्पताल में चिकित्साधिकारी के पद पर हो गई थी। इसके बाद दौलतराम जी ने अमित की शादी उसकी पसंद से अमिता से करा दी वह भी डॉक्टर थी। अनीता को उन्होंने यह बात नहीं बताई वैसे भी उसे अमित से कुछ लैना देना नहीं था।  दौलतराम जी जरूर अपने बैटे से संपर्क बनाए रखते थे।  इधर सुमित भी बड़ा हो गया था माँ के लाड़ प्यार ने उसे पूरी तरह से बिगाड़ दिया था वो दसवीं में तीन साल फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ घर में बैठ गया था। दौलतराम जी पोस्ट ऑफिस में नौकरी करते थे वे अब रिटायर हो चुके थे अब सुमित को अनाप शनाप खर्च करने को रुपये मिलने बंद हो गए थे। सुमित ने गुंडे मवालियों से दोस्ती कर लूटमारी शुरू कर दी थी। आखिर एक दिन उसे  पुलिस ने पकड़ लिया था उसे जेल की सजा हो गई थी। 
जेल में तीन साल रहकर वो वहाँ से छूटकर घर आ गया था यहाँ आकर उसने जेबकतरी लड़की रजनी से शादी कर ली। इसके तीन वर्ष बाद दौलतराम जी का निधन हो गया था। दो साल तक सुमित ने अपनी माँ को अच्छी तरह से रखा जब माँ के पास से एक एक पैसा सुमित के पास आ गया तब वो अनीता को रेल्वे स्टेशन पर भगवान के भरोसे छोड़कर आ गया था। तबसे अमित अपनी सगी माँ से बढ़कर उन्हें रख रहा था।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 

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