सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कहानी: कलेक्टर का दौरा

रतनपुर संकुल केन्द्र  के बीस ग्रामों के विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों का आज का दिन बड़ा दहशत भरा गुजरा था एक दिन पहले एक शिक्षक संजय सिंह  ने यह खबर सभी  तक पहुँचा दी थी कि कल कलेक्कटर  साहब  शोभा खेड़ी ग्राम में आएँगे किस समय आएँगे ये नहीं बताया था। सभी शिक्षक सचेत हो गए थे शोभाखेड़ी गाँव से लगे आसपास के बीस स्कूलों में सभी शिक्षक सुबह सवा सात बजे स्कूल पहुँच गए थे सभी डरे सहमे थे सभी के चेहरों पर हवाइयाँ उड़ रही थीं सब मन ही मन दुआ कर रहे थे कि साहब हमारे स्कूल न आएँ तो अच्छा है अगर आ गए तो किसी की वेतनवृद्धि रुकेगी या किसी का वेतन कटेगा या किसी को कारण बताओ नोटिस मिलेगा या कोई अभागा सस्पेण्ड होगा सबसे बुरी हालत शाला प्रभारियों की थी शाला का समय सुबह साढ़े सात से डेढ़ बजे तक था पर दिन के ढाई बजे तक कोई टस से मस नहीं हुआ था ढाई बजे जब रतनपुर के सर ने फोन पर खबर दी कि साहब सीधे जिला मुख्यालय के लिए हाइवे से निकल गए हैं तब सभी ने राहत की साँस ली तीन बजे तक सभी ने शाला बंद की और भीषण गर्मी में घर के लिए रवाना अनेक शिक्षक ऐसे भी थे जिनकी तबियत खराब हो गई थी एक शिक्षक का ब्लड प्रेशर बढ़ गया था। घर के लोग भी चिंतित थे रोज साढ़े बारह बजे तक घर पहुँचने वाले साढ़े तीन बजे तक भी नहीं आ सके थे। जब वे घर पहुँचे तो उनके परिवार के लोगों की भी चिंता दूर हुई।
सुबह सूरज खेड़ा ग्राम के स्कूल में सवा सात बजे पूरा स्कूल का स्टॉफ आ गया था कलेक्टर साहब उनके स्कूल के सामने से ही गुजरने वाले थे। एक मेडम रोशनी जो साढ़े दस बजे स्कूल आतीं थीं और ग्यारह बजे शाला छोड़ देती थीं वे आज सात बजे ही स्कूल आ गईं थीं  शाला प्रभारी ओम प्रकाश जो सबसे पहले आकर स्कूल का ताला खोलते थे आज वे ताला चपरासी ने समय पर आकर खोल दिया था आज चपरासी भी समय पर आ गया था। सभी कलेक्टर साहब के विषय में ही बातें कर रहे थे मेडम रजनी वर्मा कह रहीं थी पिछले महीने  कलेक्टर साहब ने चार स्कूलों का  निरीक्षण किया दस शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही की थी उनमें से एक शिक्षक वे भी थे जिनके रिटायरमेन्ट में एक महीने का समय ही बचा था।  ज्यादातर यही कह रहे थे कलेक्टर साहब अभी तक  जितने स्कूलों में निरीक्षण करने आ गए हैं उन सभी स्कूलों के शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही अवश्य हुई है वैसे आज कलेक्टर साहब स्कूल चेक करने की मंशा से नहीं आए थे। बल्कि शोभाखेड़ी ग्राम में बाँध  बन रहा था उसमें जो जमीन डूब में आ रही थे उनके किसानों से मुआवजे के संबंध में बात करने आए थे।  पूरे समय कलेक्टर साहब  ग्राम में रहे पर उन्होंने  स्कूल की तरफ  देखा ही नहीं था फिर भी खौफ तो  था ही  जो उनके जाने के बाद ही दूर हुआ था। जन शिक्षा केन्द्र  के जन शिक्षक ने ही ये सूचना दी की साहब  अपने ऑफिस पहुँच चुके हैं। यह सुनकर संकुल प्राचार्य के चेहरे का तनाव दूर हो गया था।
*****
रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

व्यंग्य : जीते जी रोटी को तरसाया मरने के बाद श्राद्ध

आज कल सोलह श्राद्ध का समय चल रहा है कई जगह पर श्राद्ध के आयोजन हो रहे हैं बहुत सारे लोगों को भोजन कराया जा रहा है अपने पितरों के श्राद्ध में लोग हज़ारों रुपये भी खर्च कर रहे हैं उनमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने जीते जी अपने बूढ़े माँ बाप की खबर तक नहीं ली और अब उनके मरने पर उनके श्राद्ध पर बड़ा आयोजन कर रहे हैं उनकी तस्वोर पर माला चढ़ा रहे हैं। ऐसे लोगों में शहर के रविकांत जी भी हैं उन्होंने अपने स्वर्गीय माता पिता की तिथि पर भव्य आयोजन किया था खूब पकवान खिलाए गए थे खूब दान किया गया था पर उन्होंने अपने माता पिता को जीते जी बहुत दुख दिए थे। उनके पिताजी सत्तासी वर्ष के थे माँ पिच्यासी वर्ष की दोनों अपने पुराने घर में रहते थे उनका बेटा रविकांत उनकी कभी खोज खबर नहीं लेता था बेटी विदेश में दामाद के साथ रह रही थी। वे दोनों ही एक दूसरे का ख्याल रख रहे थे एक दिन रविकांत जी के पिताजी का दुखद निधन हो गया तब रविकाँत घर?आया पिताजी की उत्तर क्रिया करने के बाद चला गया रविकाँत की माँ अकेली रह गई थीं वे सीधी सरल थी जबकि बेटा बहू चपल चालाक बेटे बहू ने बातों में लेकर उनकी सारे सोने चाँदी के जे...

दुर्भावना रखकर निंदा करने वाले लोग (व्यंग्य)

कबीर जी ने निंदक को इसलिए हितकारी कहा है क्योंकि वो हमारी बुराइयों को उजागर करते हैं और हम उन्हें दूर करते चले जाते हैं। इस तरह हमारा स्वभाव निर्मल हो जाता है। लेकिन आज के दौर में दुर्भावना रखकर निंदा करने वालों की संख्या ज्यादा हो गई है। ऐसे लोग हमारी बुराईयों को उजागर नहीं करते बल्कि हमारी खूबियों को छिपाकर मन में दुर्भावना रखते हुए हमारी निंदा करते हैं। इन लोगों से दूर रहने में ही भलाई है। अगर इनको साथ रखा तो ये हमारा मनोबल तोड़कर रख देंगे। हमें नकारा साबित करने की कोशिश करेंगे हमारे आत्मविश्वास को डगमगा देंगे। ये दुर्भावना रखकर निंदा करने वाले लोग अपने विरोधियों को निपटाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उसके सारे अवसर या तो खत्म कर देते हैं या छीन लेते हैं। ये लोग हद दर्जे के मतलबी इंसान होते हैं। जिस से मतलब निकालना हो उसकी झूठी तारीफों के पुल बाँधते हैं। उसकी खूब चापलूसी करते हैं उसे महान सिद्ध कर देते हैं और समाज में एक भ्रम की स्थिति पैदा कर देते हैं। ये ग्रुप बनाने में माहिर होते हैं। जो इनके गुट में शामिल हो जाता है ये उसके हर ऐब ढँक लेते हैं। उसे स्थापित करने के हर स...

कहानी: बकरी

वनक्षेत्र के समीप स्थित गाँव खुशामदा के बकरी पालक रमणलाल ने इस बार के पशु मेले में पाँच लाख रुपये के बकरे बेचे थे। दो महीने पहले वो तीन लाख रुपये की बकरियाँ बेच चुका था इसके अलावा हर महीने वो चालीस हज़ार रुपये का बकरी का दूध भी बेच देता था। उसने गाँव में पक्का मकान बनवा लिया था और अच्छे से अपना जीवन यापन कर रहा था। जबकि दूसरी और उसका पड़ोसी किसान ओम प्रकाश दस एकड़ का भूमि स्वामी होने के बाद भी गले-गले तक कर्ज में डूबा हुआ था। दो लाख रुपये कर्ज तो रमणलाल ने भी उसे दे रखा था। रमणलाल के पास आठ साल पहले कुछ नहीं था। वो अत्यंत गरीब खेतिहर मजदूर था। महीने में कभी बीस दिन तो कभी दस दिन ही उसे काम मिलता था। जिसमें उसका मुश्किल से गुजर बसर होता था। रमणलाल ने तब गाँव के किसान हेमराज के यहाँ कुआँ की खुदाई के कार्य में मजदूरी की थी उसके एक हज़ार रुपये बकाए थे। वो अपने रुपये का तकाजा करने हेमराज के पास गया था। हेमराज को उदास देखकर उसने कारण पूछा तो हेमराज ने दौखक होकर कहा कि बच्चे को बकरी का दूध पिलाने का परामर्श वैद्य जी ने दिया था। उसके लिए मैं बाजार से बकरी लाया था जो दो चार दिन में जनने वाली थी...