शहर से बीस किलोमीट दूर के गाँव बिसन खेड़ा के स्कूल में पदस्थ विकलाँग शिक्षिका पुष्पलता जी का आज बरसात का दिन बड़ा भारी बीता था। वह शाम को घर पर आने पर सहज तो दिखाई दे रही थीं पर अंदर अंदर ही काफी डरी हुई थीं। आज बरसाती नाले को उन्होंने कितनी कठिनाई से पार किया था ये वो ही जानती हैं। सड़क के स्कूल में इस बार भी उनका तवादला नहीं हुआ था अभी तो बरसात का पूरा सीजन बाकी था आगे क्या होगा वे ये सोचकर ही काँप जाती थीं।
पुष्प लता अनूपनगर में रहतीं थी अनूप नगर से सतरह किलोमीटर की सड़क तो पक्की थी लेकिन इससे आगे का तीन किलोमीटर का रास्ता कच्चा था उसी के बीच में तीन छोटे नाले भी पढ़ते थे जो बरसात में जानलेवा हो जाते थे। पुष्पलता मेडम उनके स्कूल में पदस्थ राकेश सर के साथ मोटर सायकिल से रोज बिसनखेड़ा आती थीं। आज जब वे स्कूल के लिए निकलीं तब आसमान साफ था बारिश के कोई आसार नहीं थे वे सवा दस बजे गाँव में आ गई थी सर ने केशरसिंह के आँगन में मोटर सायकिल खड़ी की आगे पाँच सौ मीटर का रस्ता बारिश के मौसम में मोटर सायकिल चलाने लायक नहीं रहता था उस रस्ते के बीच में एक नाला पडता था जिसमें बारिश होने पर उफान आ जाता था। स्कूल के आसपास कोई बस्ती नहीं थी जंगल खेत के अलावा स्कूल के पास गाँव का श्मशान घाट भी था। स्कूल की अस्सी प्रतिशत जगह पर दबंगों ने कब्जा कर लिया था स्कूल तक जाने का रास्ता पगड॔डी में बदल चुका था। उसी पर चलकर बच्चे स्कूल आते थे सारे बच्चे गरीबों के तथा दलितों के थे दबंगों के बच्चे गाँव के अंदर बने सर्वसुविधायुक्त प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे सरकारी स्कूल मिडिल तक था जिसमें पाँच शिक्षक पदस्थ थे उनमें पुष्पलता मेडम भी शामिल थीं । आज जब वे स्कूल,आईं तो प्रार्थना के बाद सातवीं का छात्र सोहन जब टाट पट्टी बिछा रहा था तब उसे बिच्छू ने काट खाया। उसकी तड़प दर्द से पीड़ित होकर रोना मेडम से देखा नहीं जा रहा था। सोहन को जैसे तैसे घर भैजा गया लंच में मध्यान्ह भोजन के बाद स्कूल फिर से लगा मेडम कक्षा में पढ़ा रही थीं बाहर मौसम बिगड़ गया बादलों से पूरा आकाश भर गया पूरे एक घंटे जोरदार बारिश हुई। जिसके कारण नाला उफान पर आ गया। जब वे स्कूल की छुट्टी कर नाले के पास आए तो नाले में बाढ़ आ गई थी। वे नाले किनारे चलते हुए उस जगह आए जहाँ नाला उथला था पर वहाँ भी पानी कमर से ऊपर था गाँव के बच्चे तो धीरे धीरे उस पार निकल गए थे लेकिन मेडम की हिम्मत नाला पार करने की नहीं हो रही थी दो सर नाला पार कर चुके थे और उस पार खड़े होकर मेडम और उनके साथ खड़े दोनो सर से नाला पार करने का कहने लगे उन्होंने कहा भी अगर नाला जल्दी पार नहीं किया गया तो इसका जल स्तर और बढ़ जाएगा फिर इसे पार करना संभव नहीं होगा मेडम की आँखों में आँसू भर आए थे वे बोलीं सर आप भी नाला पार कर लीजिए मैं स्कूल में ही ठहर जाऊँगी सर बोले मेढम यहाँ रात में कोई नहीं ठहरता रात में यह जगह खतरनाक हो जाती है मेडम बोली मत डराओ मुझे मैं तो रह लूँगी तभी दोनों सर ने देखा की जल्दी ही जोर की बरसात शुरू होने वाली है दोनों सर ने आपस में इशारा किया एक ने मेडम का एक हाथ पकड़ा और दूसरे ने दूसरा और जबरदस्ती उन्हें लटकती हुई अवस्था में नाला पार करा दिया। उस पार आकर मेडम डर से थर थर काँप रही थीं पर नाला पार करने पर उनके मन को संतोष था। वहाँ से वे केशरसिंह के घर पहुँचे राकेश सर ने अपनी भोटर सायकिल उठाई और मेडम जी को बिठाकर चल दिए रास्ते में कई जगह पर पहियों में कीचड़ भर गया गाड़ी जाम हो गई सर ने लकडी से कीचड निकाला कुछ दूर तक चले और फिर गाडी जाम हो गई सर ने फिर कीचड़ निकाला वे पसीने में लथपथ हो गए बीच में तीन नाले भी पड़े वे उन्होंने खतरा उठाकर मोटर सायकिल से ही पार कर लिए कड़ी मशक्कत के बाद वे पक्की सड़क पर आए तब कहीं उन्होंने राहत की साँस ली। रास्ते में मेडम ने सर से कहा सर आप मेरे घर जब मुझे छोड़ने जाओ तो मेरे पापा से कुछ मत बताना उनको दुख पहुँचेगा मेरे तबादले के लिए उन्होंने बड़े प्रयास किए थे लेकिन समय पर एक लाख रुपये की व्यवस्था नहीं कर पाए जिससे मेरा तबादला सड़क किनारे के स्कूल में नहीं हो सका वे पहले ही इस बात से दुखी हैं और आप उन्हें अगर ये बात बताएँगे तो वे और भी अधिक दुखी हो जाएँगे पुष्पलता मेडम की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी सात सदस्यों के परिवार में वे अकेली कमाने वाली थीं। शाम को जब वे स्कूल से घर पहुँची तो सहज दिखाई दे रही थीं।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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