सानिया की शादी को पाँच साल हो गए थे उसके पति रवीश जिला कोषालय अधिकारी थे। वे एक बड़े सरकारी बंग्ले में रहते थे आज उनकी शादी की पाँचवी सालगिरह मनी थी कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक शामिल हुए थे कलेक्टर साहब भी आए थे। आयोजन की सफलता पर सानिया और रवीश बहुत खुश नजर आ रहे थे।
सानिया से जब रवीश की शादी हुई तब रवीश बेरोजगार थे पाँच बार पी एस सी की परीक्षा दे चुके थे उनके पिता रमेश कपड़े की दुकान पर काम करते थे रवीश ट्यूशन से इतने पैसे कमा लेते थे जिसमें वे प्रतियोगी परीक्षा में आवेदन का शुल्क भर सकें जब रवीश की उम्र अठ्ठाइस वर्ष की हो गई उनके पिता रमेश को रवीश की शादी की चिंता हुई पर बेरोजगार को कौन लड़की दे तभी रवीश की बुआ रश्मी ने सानिया से रवीश की शादी कराने की बात कही सानिया के पिता राजन गरीब थे वे एक कंपनी में सुरक्षा गार्ड थे। उन्होंने रवीश को पसंद तो कर लिया पर यही कहा कि मैं अत्यंत गरीब हूँ मेरे पास दहेज के पैसे नहीं है। जिसे सुनकर रमेश ने कहा हम भी तो गरीब हैं यह क्या कम बड़ी बात है कि आपकी बिटिया भी पढ़ी लिखी है और हमारा बेटा भी पढ़ा लिखा फिर इनका भाग्य दोनों की शादी बहुत सादगी के साथ हुई सानिया रवीश की पत्नी बनकर घर आ गई। सानिया की किस्मत ने जोर मारा शादी के चार महीने बाद ही रवीश का चयन जिला कोषालय अधिकारी के पद पर हो गया। दूसरी और सानिया की सहेली रूपा की शादी तहसील में कार्यालय सहायक के पद पर कार्यरत दीपक से हुई थी रूपा के पिता सेक्शन ओफिसर थे। उन्होंने रूपा की शादी में बीस लाख रूपये खर्च किए थे रूपा सुंदर और गोरी थी। दीपक का घर दहेज के सामान से भर गया था। पर कहते हैं कि लालच का अंत कभी नहीं होता वही रूपा के साथ हो रहा था रूपा जब भी मायके आती तो भर भर के सामान ले जाती फिर भी ससुराल वाले खुश नहीं रहते थे एक दिन दोपहर में रूपा ने अपनी सास ससुर की बातें सुन ली वे कह रहे थे कि एक और लड़की कुँवारी है उसके पिता पचास लाख रुपये देने को तैयार हैं। पर दीपक की तो शादी हो गई तो ससुर बोले दीपक इसे ठिकाने लगाने की सोच रहा है। अच्छा है आज रात्रि को दीपक रूपा को छत से धक्का देचर नीचे गिरा देगा रूपा का काम तमाम होने के बाद हम दीपक की शादी उस लड़की से कर देंगे। उनकी यह बात सुनकर रूपा डर गई थी लेकिन सतर्क भी थी। दीपक उसे रात में छत पर घुमाने ले गया चार मंजिला छत पर वे चहलकदमी करने लगे वो छत के किनारे आई तो दीपक उसे धक्का देने के लिए आया रूपा अचानक वहाँ से हट गई दीपक नीच गिरने ही वाला था पर रूपा ने उसे बचा लिया था। इसके बाद थोड़े दिन तक वो चुप ही रहा फिर उसके तेवर फिर वैसे हो गए पर वो अपने कुटिल इरादे पूरे नहीं कर पाया तो उसने रूपा से तलाक ले लिया था दीपक तो शादी करके दूसरी पत्नी ले आया था पर रूपा अकेली बैठी हुई थी और सानिया जीवन का आनंद ले रही थी।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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