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कहानी: भण्डारा

शिव शक्ति गणेश उत्सव समिति द्वारा  आयोजित दस दिवसीय गणेश उत्सव का आज भण्डारे के साथ समापन  हो गया था। समिति के अध्यक्ष गौरीशंकर जी आयोजन की सफलता से बहुत खुश थे भण्डारे की सफलता से वे और अधिक खुश नजर आ रहे थे। विसर्जन के बाद थोड़ा दुख सबको हुआ था जिनको दस दिन तक पूजा उनकी विदाई दुखदायी तो थी पर आयोजन की सफलता मन को संतोष प्रदान कर रहीं थी।
शहर से  लगी हुई शिवशक्ति परिसर में बिल्डर ने अठ्ठाईस टू बी एच के  फ्लेट बनवाए थे जिसका जुलाई में पजेशन दिया  गया था  जुलाई के अंत तक पूरे अठ्ठाइस परिवार  फ्लेट में रहने आ गए थे। अपार्टमेन्ट में चार ब्लाॅक थे नीचे बड़ा पार्किंग एरिया था। गौरीशंकर जी जो सरकारी स्कूल में शिक्षक थे वे ए ब्लाक के फर्स्ट फ्लोर पर रह रहे थे  सभी रहवासी एक दूसरे के लिए अजनबी थे गौरी शंकर जी ने विचार किया कि बीस दिन बाद गणेश उत्सव आने वाला है तो क्यों न फ्लेट में गणेश उत्सव का आयोजन कराया जाए उससे सब एक दूसरे से परिचित होंगे तथा आत्मीयता भी बढ़ेगी गौरीशंकर जी ने रहवासियों की  बैठक बुलाई सबके घरों से कुर्सियाँ मँगवा ली गई थीं  उसी बैठक में आयोजन की रूपरेखा तय हुई  शिवशक्ति गणेश उत्सव समिति का गठन भी हुआ सभी की सर्वसम्मति से गौरीशंकर जी को समिति का अध्यक्ष बना दिया गया। समिति ने निर्णय लिया की चंदा  सिर्फ अपार्टमेंट में रहने वाले अठ्ठाइस परिवारों से ही लिया जाएगा और किसी से चंदा नहीं लेंगे।  हर परिवार से दो हजार रुपये चंदे के रूप में लिए गए। इस तरह कुल छप्पन हजार रुपये की धनराशि एकत्रित हुई  आयोजन को देखते हुए राशि बहुत कम थी। चंदे की सहयोग राशि बढ़ाई नहीं जा सकती थी। गौरीशंकर जी को पूरा भरोसा था कि  वो इस धनराशि में भी आयोजन को भव्यतापूर्वक मना लेंगे।  डेकोरेशन वाले के पास गए तो उसने माइक तथा डेकोरेशन के चौदह हजार रुपये माँगे टेन्ट हाउस वाला स्टेज बनाने के सात हजार रुपये माँग रहा था  इक्कीस हजार रुपये तो यही हो गए थे  फिर सोलह हजार रुपये की मूर्ति आ रही थी  पंडित जी ने पूजन एवं हवन सामग्री  की जो सूची दी थी  उतना सामान दस हजार रुपये में आ रहा था। चार हजार रुपये पंडित जी अपनी दक्षिणा माँग रहे थे  इक्यावन हजार रुपये  का तो यही खर्च आ रहा था फिर रोज सुबह शाम आरती प्रसाद फूल माला का खर्च अलग से था अन्य सभी खर्च जोड़ने पर हिसाब अस्सी हजार रुपये तक पहुँच रहा था जबकि चंदा छप्पन हजार रुपये ही मिला था। उसमें भण्डारे का खर्च शामिल कर दें तो खर्च डेढ़ लाख रुपये पहुँच रहा था।  सभी ने कह दिया था चाहे कितना ही घाटा हो हम इसकी भरपाई नहीं करेंगे।  गौरीशंकर जी के चेहरे पर फिर भी कोई शिकन नहीं थी पंडित का कार्य उन्होंने खुद सम्भाल लिया टेन्ट हाउस से कोई सामान नहीं लिया  छः हजार रुपये में बाजार से नई माइक मशीन खरीद लाए  अपने घर से दो तख्त निकाले जिनसे स्टेज बनाई और बिल्डर के पास से लकड़ी की बल्लियाँ ले लीं।  बिजली की झालर बल्ब हेलोजन बाजार से खरीद लाए दो दिन की कड़ी मेहनत रंग लाई बढ़िया स्टेज बनकर तैयार हो गया  पहले दिन गणेश जी की भव्य प्रतिमा की स्थापना की गई इसके साथ ही दस दिवसीय आयोजन की शुरूआत हो गई।  गौरीशंकर जी खुद चकित थे कि इतनी कम राशि में आयोजन इतना भव्य कैसे हो रहा है रोज शाम को एक झाँकी  सजाई जाती शाम को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती। गौरीशंकर जी की इच्छा थी की आयोजन के समापन पर भव्य भंडारे का आयोजन हो परंतु पास में इतने रुपये ही नहीं थे। खाना बनाने वालों से बात की तो उन्होंने खाना बनाने के बीस हजार रुपये माँगे।  गौरी शंकर जी ने समापन के चार दिन पूर्व अपार्टमेन्ट के सभी परिवार की बैठक बुलाई बैठक में भण्डारे की बात पर सहमत तो सब थे पर खर्च सुनकर घबरा रहे थे। तब गौरीशंकर जी  ने प्रस्ताव रखा  कि पैसे न देने की बजाय सामग्री का दान  भी किया जा सकता है इस बात पर सभी सहमत हो गए  देखते ही देखते पाँच क्विंटल आटा  एक क्विंवटल आलू दस पीपा तेल  और बहुत सी सामग्री इकठ्ठी हो गई। आलू छोले की सब्जी पूरी  रायता  की सामग्री तो आ गई पर खीर के लिए कोई धनराशि नहीं आई थी गौरीशंकर जी ने कह दिया की खीर भी बनेगी  खाना बनाने में गौरीशंकर जी ने सबका सहयोग माँगा  सब सहर्ष तैयार हो गए किसी ने पूरी बनवाने की जिम्मेदारी ली किसी ने सब्जी बनाने की, रायता बनाने वाले सामने आ गए थे। भण्डारे की सुबह बिल्डर द्वारा नियुक्त कॉलोनी का मैनेजर रितेश शर्मा उनसे मिलने आए भण्डारे की जानकारी ली  फिर बोले खीर क्यों नहीं बन रही गौरीशंकर बोले पैसे ही नहीं बचे इस पर उन्होंने किराने की दुकान पर फोन लगाकर खीर के लिए चावल शक्कर तथा मेवा इलायची शक्कर प्रदान करने की बात की तथा इसका खर्च उनके खाते में लिखने को कहा डेरी पर से पचास थैली दूध भी वे अपनी तरफ से दे गए। फिर क्या था देखते ही देखते चालीस थैली दूध और आ गया।  गौरीशंकर जी को बड़ी खुशी हुई सभी ने टीम भावना से काम किया एकदम निःशुल्क। तीन बजे से भण्डारा प्रारंभ हो गया जो रात के आठ बजे तक चलता रहा पूरे दो हजार लोगों ने भोजन किया पर आखिरी तक किसी चीज की कमी नहीं आई भोजन बहुत स्वादिष्ट बना था उसकी सभी तारीफ कर रहे थे। पूरी कॉलोनी में शिवशक्ति द्वारा आयोजित उत्सव की चर्चा थी गौरीशंकर जी रात को ग्यारह बजे मूर्ति विसर्जन करके आए थे उनके साथ समिति के सभी पदाधिकारी भी थे सब आयोजन के सफल समापन की एक दूसरे को बधाई दे रहे  थे।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 

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