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कहानी: तेज धूप और नौकरी

शाला प्रभारी अजय तिवारी के रिटायरमेंन्ट में छः महीने का समय बचा था। गर्मी की एक महीने  की छुट्टी के बाद स्कूल का पहला दिन उनका बड़ा तकलीफदेह रहा था । शाम को जब वे घर आए थे उनकी हालत बहुत खराब थी पत्नी उन्हें इस हाल में देखकर घबरा गई थी बोली आप तो छुट्टी ले लो पर वे बोले कैसे ले लूँ मेर सिरपर बहुत जिम्मेदारी है। अजय सर हार्ट पेशेन्ट थे उन्हें शुगर की भी बीमारी थी  उनके लड़के ने आते ही उनका बी पी चेक शुगर की जाँच की सब कुछ नार्मल देखकर राहत की साँस ली थी। फिर वे पत्नी को आज दिन भर का घटनाक्रम बताने लगे। 
जब वे तीस किलोमीटर मोटर साइकिल चलाकर स्कूल गए तो स्कूल का ताला बंद था स्कूल की  चाबी चुनाव के समय में उन्होंने पंचायत के चपरासी को दे दी थी । वो घर पर नहीं मिला तेज धूप में उन्हें चक्कर आने लगे। लगभग एक घंटे बाद उसके घर से कोई बारह साल का बच्चा चाबी लेकर आया तब कहीं उन्होने स्कूल खोला घर में महीने भर कूलर की  ठंडी हवा में रहे थे सोचा था कि स्कूल में कम से पँखे की गरम हवा ही खा लेंगे लेकिन पँखा  नहीं चला लाइट नहीं थी  चुनाव के बाद  जो इलेक्ट्रीशियन मतदान केन्द्र पर बिजली  की व्यवस्था कर रहे थे। वे स्कूल के लाइट डिस्कनेक्ट कर  गए थे।  मेकेनिक को फोन लगाया पर इतनी गर्मी में कोई आने को तैयार नहीं हुआ। तेज धूप में बाहर सन्नाटा था सड़क भी सूनी थी  वे  सकूल परिसर में लगे नीम के पेड़ की छाया में बैठे थे हवा की गर्म लपट उन्हें झुलसा रही थी। वैसे तो स्कूल में सात शिक्षकों का स्टाफ था  उसमें तीन सर थे और चार मेडम थीं उन्हें छोड़कर सब सोर्स सिफारिश वाले थे। बारह बजे एक मेडम अपनी वातानुकूलित कार से आईं  बोली सर बहुत गर्मी है  रजिस्टर पर दस्तखत किए पाँच मिनिट रुकीं और बोली सर में जा रही हूँ।  उनके पति इंजीनियर थे।  दूसरी मेडम बस से आईं थी वे सीधे संकुल केन्द्र पर उतरी  और वहीं से बस से वापस घर चली गई फोन पर उनसे बोली सर आज की मेरी ओडी लगा देना। मैं संकुल केन्द्र से अपनी उपस्थिति का प्रमाण पत्र लाकर दे दूँगी। तीसरी मेडम ने घर से ही फोन लगाकर कहा सर मैं आज नहीं आ रही हूँ आज की ऑन ड्यूटी का  पत्र में साथ लेकर  आऊँगी  चौथी मेडम स्कूल में  कुछ देर रहीं स्कूल में लंच किया पर वे भी तेज लपट को नहीं झेल पाई  और कार से  वापस घर चली गईं एक सर आए वे सरपंच के चाचा थे वे भी थोडी देर स्कूल रुके और चले गए बोले सर में घर पर ही हूँ अगर कोई चैक करने आए तो मुझे फोन कर देना वो भी चले  दूसरे  सर भी थोड़ी देर रुके और फिर संकुल केन्द्र जाने की बात कहकर एक बजे चले गए फिर नहीं आए  अब स्कूल में अकेले अजय सर रह गए थे जो दिन भर गर्म हवा के थपेड़े सह रहे थे सिद्धाँत वादी  थे इसलिए समय से पहले जा नहीं सकते थे। स्कूल में कोई छात्र भी नहीं था।  वे अकेले थे कोई पशु  पक्षी भी नहीं दिखाई दे रहा था गिलहरी और गिरगिट भी कहीं किसी ठंडी जगह पर बैठकर अपनी दोपहरी काट रहे थे। अजय सर अपनी किस्मत को दोष दे रहे थे। उन्हें आठ साल पहले कार्डिएक अरेस्ट आया था उनकी ऐंजो प्लास्टी हुई थी तीस परसेंन्ट हार्ट बचा था डाइबिटीज की भी उन्हें बीमारी थी  तब भी वह स्कूल नियमित आते थे।  उन्होंने अपने ट्राँसफर की भी खूब कोशिश की  एक छुटभैया नेता उनके ट्रांसफर कराने के नाम से उनके अस्सी हजार रुपये हड़प चुका था। अब उनमें इतनी दमखम नहीं बची थी  फिर भी तीस किलो मीटर आना और तीस किलोमीटर मोटर सायकिल से जाना करते थे कई बार मोटर सायकिल से गिरकर घायल हो गए थे पर उन पर तरस खाने वाला कोई नहीं था।  पिछले साल तो  उनके स्कूल के गाँव तक बसें भी चल रही थीं जो अब बंद हो गई थीं  शासन ने उस रूट पर इलेक्ट्रिक बसे चलाने का निर्णय लिया था। पर आठ महीने बाद भी बसें नहीं चल पाई थीं उन्हें उम्मीद नहीं थी कि  उनके रिटायरमेन्ट के पहले बस चल सकेंगी  अभी तो उन्हें इस गर्मी के बाद बरसात और इसके बाद कड़ी ठंड का भी सामना करना पड़ेगा अपनी बयालीस साल की नौकरी में वे अच्छी तरह जान गए थे   ईमानदार और कर्तव्य निष्ठ बनकर रहना बड़ा मुश्किल है। फिर भी  उन्हें इसका कोई मलाल नहीं था। बस वे तो यही चाह रहे थे कि ये छः महीने का वक्त और अच्छे गुजर जाए फिर तो रिटायरमेन्ट के बाद आराम ही आराम है।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


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