शाला प्रभारी वृंदावन लाल राय को रिटायर हुए छः महीने भी नहीं हुए थे और स्कूल की सारी व्यवस्थाएँ बुरी तरह गड़बडा गईं थीं वर्तमान शाला प्रभारी को आज सस्पेण्ड कर दिया गया दो शिक्षिकाएँ पहले ही निलंबित हो चुकीं थीं एक शिक्षक लंबे अवकाश पर चले गए थे चपरासी ने अपना तबादला कहीं और करा लिया था। स्कूल से बच्चे धड़ाधड़ टी सी निकलवाकर दूसरे स्कूल में प्रवेश ले रहे थे।
वृंदावनलाल जी जब इस विद्यालय में पदस्थ थे तब इसी स्टाफ ने उन्हें बहुत परेशान किया था उस समय उनके स्टाफ में सात शिक्षक और एक चपरासी कार्यरत थे उनमें दो सर थे पाँच मेडम थीं चपरासी भी महिला ही थी। वृंदावन लाल और जो सर थे उनका नाम मोहन लाल थे वे ऑफिस का और व्यवस्था का काम देखते थे जो मेडम थीं उनके जिम्मे पढ़ाने के अलावा और कोई काम नहीं था उसका निर्वहन भी वो ठीक से नहीं करती थीं प्रभारी को समायोजन में बड़ी परेशानी आती थी तीन साल पहले जब वृंदावन सर शाला प्रभारी बने थे तब शाला के शौचालयों की सफाई की व्यवस्था सभी शिक्षकों के आर्थिक सहयोग से होती थी परिसर की सफाई चपरासी सफाई कर्मी को अपनी तनख्वाह से पैसे देकर कराती थी वही कक्षाओं की सफाई भी करती थी। कुछ दिनों तक तो व्यवस्था ठीक चलती रही पर एक बार जब वृंदावन लाल जी ने सफाई कर्मी की सहयोग राशि माँगी तो रश्मी मेडम ने कहा हम सभी ये राशि इकठ्ठा करके परसों देंगी परसों जब फिर कहा तो बोली कल देंगे सर ने जब दूसरे दिन राशि माँगी तो सबने एकमत होकर कहा हमने तो वो राशि आपको दे दी आप झूठ बोल रहे हो आप बेईमान हो रश्मी मेडम झगड़े पर उतारू हो गईं तो सर चुप हो गए वो राशि उन्होंने अपने पास से जमा कर दी। अगले महीने जब फिर राशि माँगी तो सभी ने राशि देने से इंकार कर दिया बोली यह आपकी जिम्मेदारी है आप कुछ भी करो हम क्यों यह राशि दें वे सौ रूपये देने को भी तैयार नहीं हुईं वृंदावन सर ने कुछ माह तो बैंक में जमा स्वच्छता कोष से वो राशि जमा की जब स्वच्छता कोष भी खत्म हो गया तो अपनी तनख्वाह से सफाई कर्मी का भुगतान करने लगे शाला की सफाई का जो फंड पंचायत में आता था उसे सरपंच तथा सेक्रेटरी कई वर्षों से हड़प रहे थे। वृंदावन जी उनसे कुछ कह नहीं सकते थे क्योंकि वो जनप्रतिनिधि थे। स्टाफ के बाकी लोग मनमाने समय पर स्कूल आते और जब चाहे चले जाते थे वृंदावन जी कुछ कहते तो उन्हें धमकाते थे झूठे केस में फँसाकर उनकी नौकरी खाने की धमकी देते थे उनमें से तीन ऐसे थे जो उन्हें सहयोग देते थे उनमें से एक स्कूल चपरासी कमला भी थी इस कारण से वे कमला से खार खाए रहतीं थीं कोशिश करतीं अपने में मिलाने की जब वे नहीं मिलतीं तो उन्हें परेशान करती थीं। फिर भी वृंदावनलाल जी शाला का संचालन कर रहे थे आखिर वो दिन आ ही गया जब वृंदावन लाल जी रिटायर हो गए शाला प्रभारी का चार्ज रश्मी मेडम के पास आ गया जो विरोधियों की सरगना थीं और उनमें एकता बनाए रखती थीं। एक महीने बाद सफाई कर्मी को पैसे देने की बात आई तो सबने मना कर दिया रश्मी मेडम चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए वाली कंजूस थीं सबने मिलकर चपरासी से कहा कि वो शौचालय की सफाई की राशि भी अपनी तनख्वाह से भुगतान करे वो बोली मैं क्यों करूँ तो सबने मिलकर उसे परेशान करना शुरू कर दिया तंग आकर उसने अपना तबादला दूसरे स्कूल में करा लिया अब ये स्कूल भी चपरासी विहीन नब्बे प्रतिशत स्कूलों में शामिल हो गया था। सफाई कर्मी ने सफाई का काम पूरी तरह बंद कर दिया था क्योंकि कोई उन्हें भुगतान करने को तैयार नहीं था पाँच दिन में पूरा परिसर कचरे के ढेर में बदल गया । शिक्षक छात्रों से कक्षा की झाड़ू लगवाने लगे तो शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ने रोक लगा दी फिर भी जब पहली क्लास की टीचर छः साल की छोटी बच्ची से झाड़ू लगवा रही थीं तब किसी ने चोरी से उनका वीडियो बना लिया स्कूल परिसर में बिल्ली मरी पाई गई जब रश्मी मेडम ने सफाई कर्मी से उसे फेंकने को कहा तो उसने पाँच हजार रुपये माँगे रश्मी मेडम झल्ला पड़ी उन्होंने सौ रुपये बच्चों से चंदा लेकर इकठ्ठे किए थे वो देकर काम चलाना चाहतीं थीं पर सफाई कर्मी ने मना कर दिया वे बोली हम किसी और से ये काम करा लेंगे पर कोई दूसरा सफाई कर्मी यह कार्य करने को तैयार नहीं हुआ पूरे विद्यालय में बिल्ली के सड़ने की दुर्गंध आ रही थी बच्चे अपने अपने घर चले गए। स्कूल का ताला खोलकर कोई जरा भी देर बैठने को तैयार नहीं था लिहाजा दो घंटे स्कूल के बाहर रुककर पूरा स्टाफ बारह बजे वाली बस से घर चला गया दो बजे डी ई ओ साहब स्कूल का निरीक्षण करने आए तो स्कूल में ताला लगा था पंचनामा बनाकर ताला तुड़वाया तो मरी बिल्ली की दुर्गंध कचरे का ढेर कक्षाओं में पड़ी गंदगी और वर्किंग समय में शाला बंद होने पर आग बबूला हो गए किसी ने पहली कक्षा की छात्रा का झाड़ू लगाता वीडियो डी ई ओ साहब को बता दिया इसने उन्हें और अधिक गुस्से से भर दिया पूरे स्कूल की उन्होंने वीडियोग्राफी कराई। जनशिक्षक जो रश्मी मेडम की गहरी मित्र थीं वे जब उनका बचाव करने लगीं तो डी ई ओ साहब बोले मेडम सबसे पहले तो मैं आपको सस्पेण्ड कर रहा हूँ जनशिक्षा केन्द्र से चंद कदम दूर के स्कूल की ये हालत है तो बाकी स्कूलों की स्थिति कैसी होगी जनशिक्षक के चेहर पर हवाइयाँ उड़ने लगीं तभी एस डी एम साहब भी स्कूल आ गए किसी ने स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था उनमें एक वीडियो वो भी था जिसमें वे गुस्से में एक छात्रा की बेरहमी से पिटाई कर रही थीं। इसलिए कलेक्टर साहब ने एस डी एम को जाँच करने भेजा था एस डी एम की रिपोर्ट कलेक्टर ने संबंधितों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराने के निर्देश दिए और पूरे स्टॉफ को सस्पेण्ड कर दिया था। दूसरे दिन अखबारों में छपी खबर ने उन्हें हर जगह बदनाम कर दिया था वृंदावनलाल जी ने भी यह खबर पढ़ी थी वो इसे पढ़कर दुखी थे पर उनकी पत्नी कह रही थी आप इतने दुखी क्यों हो रहे हो उन्हें तो उनकी करनी का फल मिला है।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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